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मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर विशेष

किसानों की आय दोगुनी करने का रोड-मेप

प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने में अग्रसर मध्यप्रदेश

भोपाल : शनिवार, अक्टूबर 29, 2016, 20:32 IST
 

18 फरवरी 2016 मध्यप्रदेश के लिए ऐतिहासिक दिन था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सीहोर जिले के शेरपुर में प्रदेश की सरजम़ी पर किसानों के हित की दो महत्वपूर्ण घोषणाएँ की। पहली घोषणा थी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करना और दूसरी थी किसानों की आय को वर्ष 2022 तक दुगना करने का संकल्प। प्रधानमंत्री का किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव के लिए इन दो अहम कदमों का ऐलान करने के लिये मध्यप्रदेश के चयन से यह साफ था कि यह वह राज्य है जहाँ 11 वर्ष पहले खेती-किसानी करना दूभर था। न बिजली थी, न सिंचाई थी और न ही वातावरण। 11 वर्षों में स्थिति पलट गई थी और वे सभी चीज यहाँ मौजूद हैं जिनसे किसानों का खेती करना आसान हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री को विदाई देने के चंद घंटे बाद ही एक उच्च-स्तरीय बैठक में किसानों की आय दोगुना करने का रोडमेप बनाने के दिशा-निर्देश दिये। इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया गया। मुख्यमंत्री की तत्परता और जुनून ही है जिसने प्रदेश के खेती-किसानी के हालातों को बिल्कुल पलट दिया है। मध्यप्रदेश देश में पहला राज्य बना जिसने किसानों की आय दोगुना करने का रोड मेप तैयार कर लिया। लक्ष्य यह है कि प्रधानमंत्री ने 2022 का जो समय निर्धारित किया है उसके एक वर्ष पूर्व ही उनका यह सपना प्रदेश में पूरा हो जाये।

प्रदेश सरकार द्वारा तैयार कृषि रोड मेप किसानों को 360 डिग्री पर सहायता करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसमें किसानों को मौसम की प्रत्येक परिस्थिति के अनुरूप सुविधाएँ तो उपलब्ध करवाई ही जायेगी। साथ ही कृषि संबंधी शोध, बीज, खाद, पर्याप्त बिजली-पानी, सरकार की योजनाओं, उत्पादन की लागत, मंडी के दामों इत्यादि को सरलता से किसानों तक पहुँचाया जायेगा। इससे किसानों को अन्न उत्पादन में अधिक से अधिक मदद मिल सकेगी। कृषि रोडमेप में प्रमुख रूप से भू-राजस्‍व संहिता एक्ट में संशोधन कर छोटे किसानों में कांट्रेक्ट फार्मिंग को अमली जामा पहनाना, सहकारिता के नेटवर्क से प्रत्येक किसानों को जोड़ने की प्राथमिकता, कृषि वानिकी नीति बनाना, किसानों को एसएमएस से उनके लोन, बीमा आदि की जानकारी मुहैया करवाना, वर्ष 2017 तक प्रत्येक किसान का स्वाईल हेल्थ कार्ड बनना सुनिश्चित करना और बिजली के स्थायी कनेक्शन के लिए अभियान चलाकर प्रत्येक किसान को पर्याप्त बिजली उपलब्ध करवाना शामिल है।

रोड मेप में 23 हजार ग्राम पंचायत में कृषि उत्पादों के प्र-संस्करण के लिए युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन, फ्रूट रूट एवं वेजीटेबल रूट बनाकर संस्थागत व्यवस्था, प्रत्येक जिले में अलग से फल-सब्जी मंडी तैयार करना और क्लस्टर में एग्री बिजनेस सेंटर की स्थापना, फूड प्रोसेसिंग यूनिट को प्रोत्साहन देना एवं विकासखंडों में 4-5 आटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित करना प्रमुख है। इस रोड मेप में लगभग सभी संभावनाओं पर विचार किया गया है। जैविक खेती उत्पाद को बढ़ावा, स्प्रिंकलर एवं ड्रिप इरीगेशन में क्षेत्रफल का प्रतिवर्ष विस्तार, उद्यानिकी फसलों का रकबा एक लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 लाख हेक्टेयर करना, धान उत्पादक जिलों में किसानों का प्रशिक्षण कार्यक्रम सुनिश्चित करना और प्रत्येक जिले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का सफल क्रियान्वयन सरकार की प्राथमिकता रहेगी।

कृषि रोड मेप में मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा में प्रत्येक वर्ष 1000 किसान को विदेशों में कृषि भ्रमण के लिये भेजना, लघु एवं सीमांत किसानों को अधिक उत्पादन देने वाले बीजों पर अनुदान की योजना प्रारंभ करना, 1, 2, 3 एवं 5 एकड़ के किसानों के लिये कृषि फार्म, होलिस्टिक फार्म तैयार कर उन्हें मुख्यमंत्री खेत-तीर्थ के रूप में विकसित करना है। प्रदेश की 50 कृषि मण्डी को राष्ट्रीय कृषि बाजार के रूप में विकसित करना एवं प्रतिवर्ष कुल एक लाख हेक्टेयर भूमि का गहरी जुताई के लिये हलधर योजना में क्षेत्राच्छादन किया जाना प्रस्तावित है।

सोयाबीन उत्पादन में 50 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि में रिज और फ़रो खेती पद्धति से विकसित करना, ऊँचाई कम रखकर कम लागत से ग्रीन हाउस और पॉली हाउस क्लस्टर बनाना, प्रदेश के उपयुक्त क्षेत्रों में प्याज का उत्पादन बढ़ाना, निजी क्षेत्र में टिश्यू कल्चर लेब का गठन, शीत श्रंखला निर्माण को वृहद स्तर पर प्रोत्साहन देना, प्रदेश में 4 स्टार-5 स्टार नर्सरियों की स्थापना, सफेद मशरूम के उत्पादन को बढ़ावा देना, सेमी वेल्यूबल आयटम जैसे गुड़, पनीर आदि के कुटीर उद्योगों की स्थापना करना, खाद्य प्र-संस्करण नीति अनुरूप उद्यानिकी हब्स और पोस्ट हार्वेस्ट एवं प्रोसेसिंग के लिये संस्थान की स्थापना करना भी प्रमुख तौर पर रोडमेप में शामिल है।

रोड-मेप में भोपाल-इंदौर उद्यानिकी गलियारा, जबलपुर, ग्वालियर, रतलाम, झाबुआ, छिन्दवाड़ा और छतरपुर के आसपास उद्यानिकी समूह को विकसित करना एवं इंदौर-भोपाल में हवाई कार्गो लॉजिस्टिक इकाइयों को विकसित कर उद्यानिकी और फूलों की खेती उत्पादों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना सुनिश्चित करना है। इसमें क्षेत्र की 8 मॉडल लॉजिस्टिक इकाई और फ्रूट राइपिनिंग चेम्‍बर की स्थापना करना भी शामिल है। जिन गाँवों में दुग्ध उत्पादन अधिक है, उन्हें मिल्क-रूट पर लाना, पशु स्वास्थ्य रक्षा के संस्थागत आच्छादन का मौजूदा 48 से 75 प्रतिशत तक विस्तार, 200 लाख पशुओं का प्रतिवर्ष संक्रामक एवं पशुजन्य रोगों के विरुद्ध टीकाकरण, पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान के आच्छादन का विस्तार, देशी नस्लों के कृषि पशुओं के संरक्षण और प्रसार को बढ़ावा देना, नये सेंट्रल सीमन स्टोर की स्थापना, उत्तम एवं गुणवत्तापूर्ण हरे चारे की उपलब्धता के लिये कदम उठाना और 500 लीटर से अधिक दुग्ध उपार्जित करने वाली दुग्ध सहकारी समितियों में स्व-चलित इकाइयों की स्थापना करना मुख्य है।

वर्ष 2018 तक सिंचाई में करीब 700 लघु परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य प्राप्त करना, 5 लाख हेक्टेयर में फील्ड चेनल्स एवं वॉटर कोर्स का निर्माण, नर्मदा जल के माध्यम से क्षेत्र में भूमिगत जल की रिचार्जिंग, पीपीपी मोड से साढ़े आठ लाख एमटी क्षमता के स्टील साइलोज के निर्माण को प्रोत्साहन, वार्षिक मत्स्य-बीज उत्पादन को बढ़ावा देना, 20 हजार मछुआरों को अल्पकालीन प्रशिक्षण देना, 2 लाख मछुआरों को बीमा सुरक्षा प्रदान करना, मलबरी रेशम उत्पादन को 10 लाख किलो से 20 लाख किलो करना और टसर उत्पादन को 9 करोड़ से 20 करोड़ ककून करना है।

प्रत्येक कृषि जलवायु क्षेत्र में 100 गाँव इस तरह प्रदेश के कुल 1100 गाँव को क्लाइमेट स्मार्ट के रूप में विकसित करना, 500 नए कस्टम हायरिंग केंद्र की स्थापना, 10 वर्ष में माइक्रो इरिगेशन में कुल 20 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को लेकर आना, अगले 10 वर्ष में एक लाख हेक्टेयर में पाली हाउस और सेडनेट हाउस बनाने का लक्ष्य, बाँस मिशन को गाँव-गाँव एवं खेत-खेत तक ले जाना, जीरो टिलेज एवं जैविक मल्चिंग को बढ़ावा देना, बीज निगम को राष्ट्रीय स्तर का जैविक बीज का उत्पादक और विक्रेता बनाना, चंबल के बीहड़ों को विकसित करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाना, एक फ़सली भूमि को दो और दो फ़सली भूमि को तीन फ़सली बनाने के उद्देश्य से योजनाओं की पहल को अभियान के रूप में लिया जाना भी रोड मेप के मुख्य बिन्दु हैं।

ग्रागीण युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से वेल्यू चेन सिस्‍टम खड़ा करना, गामा-रे इरेडियेशन सयंत्रों की स्थापना, नहरों से सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 60 लाख हेक्टेयर करना, परंपरागत भारतीय नस्‍लों (गीर, राठी) के उन्नयन का अभियान, सभी 313 विकासखंड में कौशल विकास केंद्र की स्थापना, कृषि आधारित उद्योंगों में 3 लाख युवा उद्यमी की पहचान, प्रशिक्षण, वित्त, ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करना एवं पवन ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए भू स्वामियों को डेवलपर्स के साथ साझेदारी करने की अनुमति देना भी रोडमेप में शामिल है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की किसान की आर्थिक समृद्धि की चिंता इस रोड मेप में स्पष्ट दिखाई देती है। सरकार द्वारा चलाई जा रही किसान कल्याणकारी योजनाएँ दूसरे राज्यों के लिए अनुकरणीय रही हैं। रोड मेप में तैयार किए गए बिन्दु निश्चित तौर पर कृषि विकास में और किसान भाइयों की आय को दोगुना करने में मील का पत्थर बनेंगे।

 
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