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मध्यप्रदेश - स्थापना दिवस पर विशेष

सैलानियों के लिये आतुर द्वितीय जल-महोत्‍सव

भोपाल : शनिवार, अक्टूबर 29, 2016, 21:04 IST
 

द्वितीय जल-महोत्‍सव इस बार भी हनुवंतिया में और भी व्‍यापक स्‍तर पर होगा। जल-महोत्‍सव 15 दिसम्‍बर, से प्रारंभ होकर 15 जनवरी, 2017 तक चलेगा। मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के अनुरूप द्वितीय जल-महोत्‍सव एक माह का रहेगा। सैलानी इस बार दिसम्‍बर में वर्षान्‍त एवं शीतकालीन अवकाश के दिनों में प्राकृतिक सुन्‍दरता एवं विपुल जल-राशि के बीच यहाँ की सैर का लुत्‍फ उठा सकेंगे।

जल-महोत्‍सव में वॉटर स्‍पोर्टस की गतिविधियों के साथ रोमांचक और साहसिक गतिविधियाँ भी आयोजित की जायेगी। हनुवंतिया में कश्‍मीर के सिकारे और केरल की तर्ज पर इस बार हाउस-बोट का संचालन एक अन्‍य महत्‍वपूर्ण आकर्षण होगा। यहाँ क्रूज और मोटरबोट, जलपरी का संचालन पहले से ही किया जा रहा है। सैलानियों के आकर्षण के लिये इस बार बोरियामाल एवं अन्‍य टापू पर विभिन्‍न गतिविधियों की जायेगी। इस बीच जल-महोत्‍सव की प्रारंभिक तैयारियों की शुरूआत हो चुकी है।

प्रथम जल-महोत्‍सव को मिली सफलता और दूर-दूर से आए सैलानियों से मिले प्रतिसाद के मद्देनजर द्वितीय महोत्‍सव में भी सैलानियों के लिये स्विस कॉटेज उपलब्‍ध रहेंगे। रोमांचक एवं साहसिक पर्यटन पर केन्द्रित विभिन्‍न गतिविधियाँ की जायेगी। इनमें वॉटर स्‍पोर्टस, आईलेण्‍ड कैम्पिंग, एडवेंचर एक्टिविटीज हॉट एयर बेलूनिंग, पेरा सेलिंग, पेरा मोटर्स, स्‍टार गेजिंग, वॉटर स्‍कीइंग, जेट स्‍काइंग, वॉटर जॉर्बिंग, बर्मा ब्रिज, आर्टिशियल क्‍लाइंबिंग बॉल, बर्ड वॉचिंग, ट्रेकिंग, ट्रीजर हंट, नाइट कैंपिंग आदि गतिविधियाँ शामिल हैं। इनके अतिरिक्‍त क्राफ्ट बाजार के जरिये हथकरघा वस्‍तुओं का प्रदर्शन, सांस्‍कृतिक गतिविधियों पर केन्द्रित कार्यक्रम आदि भी होंगे। लज़ीज़ और सुस्‍वादु योजना का भी लुत्‍फ लिया जा सकेगा।

मध्‍यप्रदेश राज्‍य पर्यटन विकास निगम ने खण्‍डवा जिले में स्थित इंदिरा सागर बाँध के नजदीक हनुवंतिया को वॉटर स्‍पोर्टस कॉम्‍प्‍लेक्‍स के रूप में विकसित किया है। इसे एक प्रमुख पर्यटन एवं वॉटर स्‍पोर्टस केन्‍द्र के रूप में निर्मित किया गया है। निगम द्वारा यहाँ कॉटेज, रेस्‍टोरेंट एवं बोट क्‍लब आदि बनाये गये हैं। संपूर्ण परिसर को हरा-भरा बनाने के लिये पौधरोपण सहित आकर्षक ढंग से विद्युत साज-सज्‍जा की गई है। इस साल अत्‍यधिक वर्षा से यहाँ और भी अधिक विपुल जल-राशि दूर तलक नजर रही है। दूर-दूर तक भरे नीले जल के अकूत भण्‍डार से इसे नीलाभ जल वाला हनुवंतिया के रूप में भी जाना जाने लगा है।

इंदिरा सागर बाँध स्‍थल पुनासा संभवत: एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित वॉटर बॉडी है। नर्मदा पर बाँध के बेक वॉटर से यहाँ लगभग 100 से अधिक टापू प्राकृतिक रूप से बन गए हैं। टापुओं की इस श्रंखला की शुरूआत इनके प्रवेश द्वार मूंदी से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हनुवंतिया से होती है, जो टापू भले हों लेकिन तीन ओर से नर्मदा के बेक वॉटर से भरा हुआ है। आस-पास के सघन वन क्षेत्र से इस स्‍थल की रमणीयता और भी बढ़ गई है।

मास्‍टर प्‍लान

राज्‍य पर्यटन विकास निगम द्वारा हनुवंतिया निवेश क्षेत्र के 8 गाँव को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिये मास्‍टर प्‍लान (विकास योजना) भी तैयार किया गया है। प्‍लान में हनुवंतिया निवेश क्षेत्र की भूमि का सक्षम उपयोग, ट्रांसपोर्ट की सुगमता, कमर्शियल उपयोग के लिये भूमि का प्रावधान, क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय महत्‍व के पर्यटन स्‍थल के रूप में विकसित कर विकासोन्‍मुखी नियोजन सुनिश्चित करना आदि बिन्‍दु को शामिल किया गया है। प्लान को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

नई पर्यटन नीति

मध्‍यप्रदेश में पर्यटन की दृष्टि से बीते तीन-चार माह अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण और ईवेंट तथा विविध गतिविधियों से ओत-प्रोत रहे हैं। इस बीच जहाँ पर्यटन केबिनेट की प्रथम बैठक में नई पर्यटन नीति-2016 का अनुमोदन होकर इसे जारी किया गया, वहीं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये अन्‍य फैसले भी लिये गये। इन फैसलों पर अमल की शुरूआत भी हो गई है। वस्‍तुत: नई पर्यटन नति को निवेशक मित्र, सरल और उदार स्‍वरूप दिया गया है। अनुदान संबंधी नियम और शर्तों के अधिक व्‍यावहारिक और निवेशकों के अनुकूल बनाया गया है।

हाल ही में इंदौर में संपन्‍न ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स समिट के प्रथम दिन ही पर्यटन पर केन्द्रित सत्र पृथक से हुआ। सत्र में प्रदेश की नई पर्यटन नीति, निवेशकों के लिये सहूलियतें, हेरिटेज नीति, मार्ग सुविधा केन्‍द्र (WSA) नीति, होम स्‍टे योजना, ओरछा स्थित जहाँगीर महल को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित कर निजी क्षेत्र द्वारा संचालन की पहल, विभिन्‍न स्‍थान पर उपलब्‍ध भूमि और उसे पर्यटन की दृष्टि से लीज पर दिये जाने आदि से अवगत करवाया गया। सत्र में पर्यटन के क्षेत्र में निवेश के इच्‍छुक प्रतिनिधि मौजूद थे।

भोपाल में हाल ही में तीन दिवसीय तीसरा ट्रेवल मार्ट सफलता से हुआ। मार्ट में इस साल इसके पहले की तुलना में अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। मार्ट में 70 अंतर्राष्ट्रीय और 175 घरेलू बायर्स के साथ ही ट्रेवल एवं टूर से संबंधित मीडिया प्रतिनिधि तथा होटल, हॉस्पिटेलिटी, टूर एवं ट्रेवल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने हिस्‍सा लिया। मार्ट के दौरान 525, बी-2-बी मीटिंग हुई। साथ ही प्रथम एमपी टूरिज्‍म अवार्ड के रूप में 22 श्रेणियों में 39 अवार्डस भी प्रदान किये गये। मार्ट में पहली बार Webinar का सफल उपयोग भी किया गया।

प्रदेश की नई पर्यटन नीति, उदार और निवेशकों के अनुकूल बनाई गई है। पूर्व में प्रचलित नीति को बदलते हुए अब पर्यटन क्षेत्र में निवेश के लिये पूरे मध्‍यप्रदेश के लिये एक सी लागत पूँजी और अनुदान पूँजी नीति तैयार की गयी है। सभी संभव पर्यटन परियोजनाओं को इस नीति में शामिल कर लागत पूँजी अनुदान की पात्रता दी गयी है। अब पूरे प्रदेश में कहीं भी पर्यटन क्षेत्र में निवेश करने पर निवेशकों को 15 से 40 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा, जिसकी सीमा 10 करोड़ तक होगी। शासकीय भूमि पर स्‍थापित होने वाली पर्यटक परियोजनाओं को स्‍टॉम्‍प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्‍क से भी मुक्‍त रखा गया है।

इन्‍वेस्‍टर फेसिलिटेशन के लिये पर्यटन विकास निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया है। एम.पी.ट्राईफेक और जिला उद्योग केन्‍द्र के माध्‍यम से प्रदेश स्‍तर से लेकर जिला स्‍तर तक इन्‍वेस्‍टर फेसिलिटेशन प्रणाली स्‍थापित की गई है। भारत सरकार के उच्‍च लक्ष्‍यों के अनुरूप विश्‍व पर्यटन में देश एवं प्रदेश को स्‍थापित करने के लिये मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन नीति में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने एवं निवेश प्रोत्‍साहन की कार्य-योजना निर्धारित की गयी है। रोप-वे को पर्यटन परिवहन अधोसंरचना मानकर 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जायेगा। निवेशकों को पर्यटन परियोजना आवंटित शासकीय भूमि पर सड़क, बिजली, पानी जैसे इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर पर किये गये निवेश पर भी 25 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। पर्यटन परियोजनाओं की उद्योग क्षेत्र एवं औद्योगिक पार्कों में बड़ी आवश्‍यकता है। यह प्रावधान किया गया है कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों, आईटी पार्कों, इंडस्ट्रियल पार्क में पर्यटन परियोजनाओं को उद्योगों की दरों पर जमीन दी जाये। प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को बिजली, पानी, प्रापर्टी टैक्‍स, डायवर्शन आदि शुल्‍क अब औद्योगिक दरों पर लिये जायेंगे।

भोपाल एवं इंदौर सहित प्रदेश के प्रमुख स्‍थानों के लिये एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिये भारत सरकार के साथ प्रयास किये गये हैं। आंतरिक वायु परिवहन के लिये छोटे विमानों की सेवाएँ उपलब्‍ध करवाने के लिये टेंडर की कार्यवाही प्रचलित है। हेरिटेज पर्यटन विकास के लिये निवेशकों को नये अवसर उपलब्‍ध करवाये गये हैं। एक लाख रुपए की अपसेट प्राईस पर निवेशकों को निविदा के माध्‍यम से हेरिटेज प्रॉपर्टी आफर की जाती है। हाल ही में ताजमहल पैलेस भोपाल, गोविंदगढ़ फोर्ट रीवा एवं माधवगढ़ फोर्ट के विकास के लिये इन्‍वेस्‍टर्स का चयन किया गया है।

प्रदेश में जल पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में राज्‍य शासन ने महत्‍वपूर्ण पहल की है। वन विभाग, जल संसाधन तथा पुरातत्‍व विभाग के साथ मिलकर ऐसे स्‍थलों को चिन्हित किया गया है जो पर्यटकों के लिये एकदम नये अनुभव एवं रोमांच देने वाले स्‍थल होंगे। लगभग 2400 वर्ग किलोमीटर जलाशयों में वॉटर एडवेंचर टूरिज्‍म गतिविधियाँ विकसित की गयी हैं। जल पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश के गांधी सागर बाँध, बाणसागर परियोजना, बरगी डेम तथा तवा डेम को भी इसी तर्ज पर विकसित किये जाने की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है।

इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा प्रसिद्ध पर्यटक स्‍थलों तक पहुँच मार्ग के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का काम किया गया है। खजुराहो एवं भीम-बैठका जैसे कुछ पर्यटक स्‍थल राष्‍ट्रीय राजमार्गों पर स्थित हैं जिनके सुदृढ़ीकरण एवं उन्‍नयन का अनुरोध भारत सरकार से किया गया है। विश्‍व अर्थ-व्‍यवस्‍था में पर्यटन का बड़ा योगदान है। विश्‍व की जीडीपी में इसका हिस्‍सा तकरीबन 9.8 प्रतिशत है तथा लगभग 29 करोड़ लोगों को यह रोजगार देता है। आगामी 2025 तक देश की जीडीपी में पर्यटन क्षेत्र का योगदान 7.6 प्रतिशत तक करने और निवेश बढ़ाने और लोगों को रोजगार देने का लक्ष्‍य रखा गया है। इस दृष्टि से पर्यटन से रोजगार सृजन शासन का मुख्‍य लक्ष्‍य है।

अवार्डस की श्रंखला

मध्‍यप्रदेश पर्यटन को हाल ही में और भी महत्‍वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा घोषित पाँच नेशनल अवार्ड मध्‍यप्रदेश को हासिल हुए हैं। इनमें बेस्‍ट टूरिज्‍म स्‍टेट का राष्‍ट्रीय अवार्ड शामिल है। इसके पहले पिछले साल भी मध्‍यप्रदेश को 6 राष्‍ट्रीय अवार्ड प्राप्‍त हुए थे।

इसके अतिरिक्‍त नई दिल्‍ली में मध्‍यप्रदेश पर्यटन को ‘हॉस्पिटेलिटी अवार्ड-2016’ प्रदान किया गया। पुणे में ट्रेवल एंड टूरिज्‍म फेयर में मध्‍यप्रदेश राज्‍य पर्यटन विकास निगम को ‘बेस्‍ट डेकोरेशन अवार्ड’ प्राप्‍त हुआ। हैदराबाद में इंडीवुड फिल्‍म फेस्टिवल में पर्यटन को ‘बेस्‍ट टूरिज्‍म बोर्ड अवार्ड’ से सम्‍मानित किया गया। मुम्‍बई में ट्रेवल एंड टूरिज्‍म फेयर में मध्‍यप्रदेश पर्यटन के पवेलियन को ‘बेस्‍ट डेकोरेशन अवार्ड’, मुम्‍बई में ही इंडिया इंटरनेशनल ट्रेवल मार्ट में मध्‍यप्रदेश पर्यटन को ‘बेस्‍ट वाइल्‍ड लाइफ डेस्टिनेशन ऑफ द इयर अवार्ड’ और मुम्‍बई में लोकेशन्‍स एक्‍जीबिशन कॉन्‍फ्रेंस में मध्‍यप्रदेश पर्यटन को ‘लोकेशन्‍स एप्रीसिएशन्‍स फॉर इंडिया स्‍टेट स्‍पॉन्‍सरशिप अवार्ड’ प्रदान किया गया है।

पर्यटन संवर्धन परिषद

वन क्षेत्रों में वन एडवेंचर एवं नेचर पर्यटन के लिये क्षेत्र चिन्हित करने की नीति बनायी गयी है। इन चिन्हित क्षेत्रों में निवेशक अपनी परियोजनाएँ स्‍थापित कर सकेंगे। राज्‍य स्‍तर पर पर्यटन संवर्धन परिषद और जिला स्‍तर पर जिला पर्यटन संवर्धन परिषद गठित की गयी है। इन परिषद को स्‍थानीय स्‍तर पर पर्यटन विकास के लिये सशक्‍त बनाया जा रहा है।

निवेशकों को प्रदेश में कुशल एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन मिल सकें तथा प्रदेश के युवाओं को कौशल विकास के पश्‍चात रोजगार के अवसर प्राप्‍त हो सकें, इसके लिये हॉस्पिटेलिटी, स्किल डेवलपमेंट के लिये प्रशिक्षण संस्‍थान स्‍थापित किये गये हैं।

डोमेस्टिक टूरिज्म के साथ डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स भी महत्‍वपूर्ण है। एक अभियान में प्रदेश के प्रत्‍येक संभाग तथा प्रदेश के बाहर गुजरात, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, कर्नाटक आदि प्रदेशों में निवेशक सम्‍मेलन किये गये हैं। इनमें प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता एवं छूट, रियायतों आदि से अवगत करवाया गया है। इन प्रयासों एवं नीतियों के सार्थक परिणाम अब सामने भी आने लगे हैं। वर्ष 2016 में अब तक 1500 करोड़ के निवेश के 125 से अधिक प्रस्‍ताव प्राप्‍त हो चुके हैं।

मध्‍यप्रदेश एक लैण्‍ड लॉक स्‍टेट है। देश के विभिन्‍न भागों में सड़क मार्ग से आने-जाने वाले यात्रियों को मार्ग में स्‍तरीय एवं स्‍वच्‍छ खान-पान, विश्राम एवं प्रसाधन सुविधाएँ उपलब्‍ध करवाने की दृष्टि से मार्ग सुविधा केन्‍द्र विकास की नीति बनायी है। इस नीति में अगले तीन वर्ष में प्रदेश से गुजरने वाले राज मार्गो एवं स्‍टेट हाईवे पर लगभग प्रत्‍येक 50 किलोमीटर पर ऐसी सुविधाएँ स्‍थापित की जायेगी। अभी तक 57 ऐसी सुविधाएँ तैयार की जाकर निजी निवेशकों को सौंपने की कार्यवाही की जा रही है।

 
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