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जन-कल्याण के 11 वर्ष

स्वाधीनता के संघर्ष और शहीदों की प्रेरक गाथाओं को उद्घाटित करने में अव्वल मध्यप्रदेश

भोपाल : सोमवार, नवम्बर 28, 2016, 16:45 IST
 

स्वाधीनता संग्राम के दस्तावेजीकरण और आजादी के संघर्ष के आदर्शों, बलिदानों, प्रेरक विचारों को समाज के बीच पहुँचाने एवं स्वाधीनता संग्राम में आदिवासियों की भागीदारी, जनजातीय चेतना और संघर्ष को शिद्दत के साथ रेखांकित करने में मध्यप्रदेश देश में अव्वल स्थान पर काबिज है।

प्रदेश में वर्ष 2003 तक स्वाधीनता दिवस एवं गणतंत्र दिवस पर ही मुख्यत: सीमित आयोजन राजधानी भोपाल में किये जाते थे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के 11 साल के कार्यकाल में स्वतंत्रता संघर्ष और शहीदों पर केन्द्रित गतिविधियों का उल्लेखनीय विस्तार हुआ। मुख्यमंत्री द्वारा लिये गये निर्णयों का नतीजा रहा कि पिछले ग्यारह वर्ष के सफर में अब प्रदेश के सभी अंचलों में लगभग 8188 आयोजन किये जा रहे हैं। शहीद स्मारक, धर्मपाल शोध पीठ, महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ तथा रेडियो आजाद हिन्द की स्थापना, स्वाधीनता संग्राम के महानायकों की स्मृति में अमर शहीद आजाद के जन्म-स्थल चन्द्रशेखर आजाद नगर (भाभरा) जिला अलीराजपुर में आजाद स्मृति मंदिर, जननायक टंटय्या भील की जन्म-स्थली ग्राम बड़ौदा अहीर (खण्डवा) एवं सेना के शहीद स्व श्री चंपालाल मालवीय की स्मृति में ग्राम घटला (रतलाम) में स्मारक लोकार्पित किये जा चुके हैं।

इसके अलावा इसी अरसे में शुरू किये गये जननायक भीमा नायक की जन्म-स्थली ग्राम धावा बावड़ी (बड़वानी) में, शहीद स्व. श्री ओमप्रकाश मर्दानिया की स्मृति में ग्राम शाहपुर (सीहोर) में स्मारक निर्माण तथा गौंड साम्राज्य की स्मृति में ग्राम रामनगर (मण्डला) में स्तंभ का निर्माण कार्य भी पूरा हो गया है।

26 जनवरी 2006 से आजादी के तरानों पर केन्द्रित रेडियो कार्यक्रम ' वतन का राग' का प्रसारण प्रदेश के सभी आकाशवाणी केन्द्रों से, विविध भारती तथा दिल्ली, मुम्बई, लखनऊ से किया जा रहा है। इस विषय के 565 ऐपिसोडस के माध्यम से लगभग 850 संकलित गीत प्रसारित हो चुके हैं। प्रदेश में इन सभी गतिविधियों के लिये स्थापित स्वराज संस्थान के लिए वर्ष 2003-04 में मात्र 39 लाख 50 हजार रूपये का बजट प्राप्त होता था, जो अब बढ़कर 1009.44 लाख हो गया है। इस तरह संस्थान के वार्षिक बजट में 969.94 लाख की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

शहीदों के स्मारक-स्तम्भ

वर्ष 1857 के मुक्ति संग्राम के योद्धा बखतवली शाह,बोधन दौआ, पंजाब सिंह, श्यामसिंह, धीरसिंह बघेल, खाज्या नायक, भीमा नायक, सीताराम कंवर, रघुनाथ मंडलोई, आदिल मोहम्मद, फाजिल मोहम्मद, मेहरबान सिंह लोधी, हिरदेशाह, मंदसौर के शहीद सैनिक, देसपत बुंदेला, विजयसिंह लोधी, दौलतसिंह कछवाहा, गरुलसिंह, किशोर सिंह, सदाशिवराव अमीन, सरजू प्रसाद, महादेव शास्त्री, फरजंद अली, दौलत सिंह, वारिस मोहम्मद खाँ, मोहम्मद अली खाँ, खलकसिंह दौआ, धीरजसिंह एवं उमराव सिंह सूबेदार आदि के शहीद स्मारक/स्तम्भ का निर्माण करवाया जा रहा है।

शहीदों के प्राणोत्सर्ग स्थल एवं वीरगाथा से आमजन को परिचित करवाने के साथ ही सदभावना जागरण के उद्देश्य से टुरिया जिला सिवनी, जननायक टंट्या भील की स्मृति में पातालपानी जिला इंदौर तथा बड़ौदा अहीर की स्मृति में जिला खण्डवा में, बिरसा मुण्डा की स्मृति में डगडौआ जिला उमरिया में, रानी दुर्गावती एवं राजा शंकर शाह एवं रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर मण्डला,राजा सरजूप्रसाद की स्मृति में विजयराघवगढ़ जिला कटनी में, अमरशहीद चन्द्रशेखर आजाद की स्मृति में भाभरा जिला अलीराजपुर में और रानी अवंतीबाई बलिदान दिवस पर बालपुर जिला डिन्डौरी में मेले लगवाये गये।

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के प्रखर हस्ताक्षर अमरशहीद चन्द्रशेखर आजाद का जन्म शती वर्ष समारोह, इतिहास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटनाक्रम 1857 मुक्ति संग्राम के पक्ष को समाज के सामने लाने की दृष्टि से 1857 मुक्ति संग्राम के 150 वर्ष समारोह, राजा भोज के राज्यारोहण का 1000 वर्षवाँ समारोह, प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी पं. उद्धवदास मेहता जन्म शताब्दी समारोह एवं राष्ट्र अभ्युदय और स्वाभिमान के प्रतीक अद्धितीय विद्धान स्वामी विवेकानंद के जन्म के 150 वर्ष समारोह मनाया गया। इन समारोह में प्रदेश में लोकव्यापी एवं जन आधारित आयोजन, चित्र प्रदर्शनी, संगोष्ठी के आयोजन के साथ पुस्तकों का प्रकाशन करवाया गया।

स्वाधीनता फैलोशिप

स्वाधीनता संग्राम के बहु-विध पहलुओं पर शोध कार्य, जिला स्तरीय फैलोशिप में 1857 मुक्ति संग्राम को लेकर जिलों का विशद शोध कार्य, अक्षय निधि एवं स्वराज पुस्तक माला में प्राचीन भारतीय संस्कृति, आजादी के संघर्ष एवं महापुरुषों की 80 से अधिक पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैं।

स्वाधीनता संघर्ष के स्मृति-चिन्हों को एकत्रकर उनका प्रदर्शन, भारत और दुनिया भर में हुए स्वाधीनता संघर्ष पर केन्द्रित फिल्म, समाचार-पत्रों, पुस्तकों, चित्रों और अन्य रचनाओं के संग्रहण, निर्माण- प्रदर्शन, व्याख्यान, गोष्ठी, अध्ययन-शोध आदि कार्यक्रम किये गये। प्रदेश में पिछले ग्यारह वर्ष से दुर्लभ प्रामाणिक ऐतिहासिक एवं अन्य विविध ग्रन्थों का संग्रह कर प्रकाशन और स्वाधीनता संग्राम सेनानियों /शहीदों को समर्पित शताब्दी/ जयन्ती समारोह तथा बहुआयामी स्तरीय गतिविधियों का संचालन सतत रूप से किया जा रहा है।

 
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