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जन-कल्याण के 11 वर्ष

मध्यप्रदेश में कला-संस्कृति की समृद्ध परंपरा को दिया गया विस्तार

भोपाल : सोमवार, नवम्बर 28, 2016, 16:56 IST
 

मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग ने देश और दुनिया में अलग ही कीर्तिमान स्थापित किया है। वर्ष के 365 दिनों में 1600 छोटे-बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर यह संदेश दिया है कि देश के हृदय प्रदेश में संस्कृति की अविरल धारा सदैव प्रवाहमान रहेगी। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान के नेत्तृत्व वाली सरकार ने वैचारिक महाकुंभ, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन,शौर्य स्मारक का निर्माण और हाल ही में सम्पन्न लोक-मंथन के सफल आयोजन से इस बात पर मुहर लगा दी है कि भारत की अस्मिता और संस्कृति की पताका मध्यप्रदेश के हाथों में ही रहेगी। प्रदेश की बहुवर्णी संस्कृति का संरक्षण-संवर्द्धन अपने आप में बड़ा काम है। यह काम प्रदेश में अगर सुविचारित रूप से हो रहा है, तो इसके पीछे मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह की सुचिंतित सोच है। इसी सोच से प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर, पुरातात्विक सम्पदा, ऐतिहासिक महत्व का यथास्थिति संरक्षण, संवर्धन, कला-संस्कृति, राजभाषा, स्वाधीनता संग्राम से सम्बन्धित महत्वपूर्ण पहलुओं पर बहु-आयामी कार्य हो रहे हैं। राजभाषा हिन्दी के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की सघन गतिविधियों के संचालन से भी प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान कायम की है। संस्कृति विभाग का वार्षिक बजट वर्ष 2005-06 में रूपये 12784 लाख होता था जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर रूपये 15309 लाख हो गया है।

राष्ट्रीय/प्रादेशिक सम्मान और पुरस्कार

मध्यप्रदेश देश का संभवतः पहला प्रदेश है जहाँ साहित्य, संस्कृति, सिनेमा, सामाजिक समरसता, सदभाव आदि बहु-आयामी क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य और उपलब्धियों के लिये राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मान स्थापित हैं। वर्ष 2004 तक 15 राष्ट्रीय और 6 राज्य स्तरीय सम्मान अस्तित्व में थे। अब लगभग 81 राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मान,पुरस्कार एवं फैलोशप दिये जा रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे राष्ट्रीय/राजकीय सम्मान भी हैं जिनकी सम्मान राशि में भी दो गुना इजाफा किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान के कार्यकाल में अब तक 12 नए राष्ट्रीय एवं एक राज्य स्तरीय सम्मान शिखर सम्मान श्रेणी में शुरू करवाये गये हैं। इनमें हिन्दी भाषा के एक-एक लाख रूपये के 5 नए राष्ट्रीय सम्मान वर्ष 2015-16 से स्थापित किये गये जिनमें हिन्दी साफ्टवेयर, सर्च इंजिन, वेब डिजाइनिंग, डिजिटल भाषा प्रयोगशाला, प्रोग्रामिंग, सोशल मीडिया, आडियो-विजुअल एडीटिंग में उत्कृष्ट योगदान के ‘सूचना प्रौद्योगिकी', भारतीय अप्रवासी होकर विदेश में हिन्दी के विकास में अमूल्य योगदान करने वाले को ‘निर्मल वर्मा', विदेशी मूल के ऐसे लोगों को जिन्होंने हिन्दी भाषा एवं उसकी बोलियों के विकास में उत्कृष्ट योगदान दिया है को ‘फादर कामिल बुल्के', हिन्दी में वैज्ञानिक एवं तकनीकी लेखन एवं पाठ्य-पुस्तकों के निर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले को ‘गुणाकर मुले’ सम्मान और ऐसे हिन्दी भाषा लेखकों और साहित्यकार जिन्होंने अपने लेखन तथा सृजन से हिन्दी को समृद्ध किया है, उन्हें 'हिन्दी सेवा सम्मान' दिया जायेगा।

राष्ट्रीय स्तर के सम्मान में पुरातत्व विषय पर ‘डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर’, स्वाधीनता संग्राम के आदर्श, राष्ट्रभक्ति और समाज सेवा के लिए ‘अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद’, सामाजिक सदभाव और समरसता के लिए ‘महाराजा अग्रसेन सम्मान’, शिक्षा विषय के लिये ‘महर्षि वेद व्यास’, संगीत-संस्कृति एवं कला संरक्षण के लिए 'राजा मान सिंह तोमर सम्मान’, सामाजिक, सांस्कृतिक समरसता, उत्थान, परिष्कार, आध्यात्म परम्परा के लिए 'नानाजी देशमुख सम्मान’, देश की सुरक्षा-कर्त्तव्य में बलिदान, अदम्य साहस, वीरता, नारी उत्थान के लिए 'वीरांगना लक्ष्मीबाई सम्मान' शामिल हैं।

राज्य स्तरीय शिखर सम्मान के अंतर्गत वर्ष 2009-10 में ‘दुर्लभ वाद्य वादन’ के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिये जाने वाले सम्मान को जोड़ा गया है।

संस्कृति विभाग के अधीन उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी द्वारा रूपंकर कलाओं के क्षेत्र के लिए 21-21 हजार एवं लतीफ खाँ सम्मान 51 हजार का पुरस्कार दिया जाता है। साहित्य अकादमी द्वारा अखिल भारतीय स्तर के 5, प्रादेशिक 10 एवं पाण्डुलिपि प्रकाशन सहायता योजना में 45 वर्ष की आयु के रचनाकारों की पहली रचना के प्रकाशन के लिए पुरस्कार दिया जाता है।

कालिदास संस्कृत अकादमी द्वारा अखिल भारतीय स्तर का कालिदास पुरस्कार एवं प्रादेशिक स्तर के तीन पुरस्कार दिये जाते हैं। सिन्धी साहित्य अकादमी द्वारा तीन प्रादेशिक पुरस्कार, मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा अखिल भारतीय स्तर के 5 एवं प्रादेशिक स्तर के 8 सम्मान से साहित्यकारों/ लेखकों को नवाजा जाता है। भाषाओं के संरक्षण,संवर्धन एवं इन भाषाओं में साहित्य सृजन को प्रोत्साहन की दृष्टि से मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के अंतर्गत भोजपुरी साहित्य अकादमी, मराठी साहित्य अकादमी एवं पंजाबी साहित्य अकादमी भी स्थापित की गईं हैं।

अर्थाभावग्रस्त कलाकारों को सहायता

प्रदेश के चयनित अर्थाभावग्रस्त कलाकार और साहित्यकार को मासिक पेंशन के साथ-साथ बीमारी के इलाज के लिए चिकित्सा सहायता प्रदान की जाती है। पूर्व में साहित्यकार, कलाकार को मासिक पेंशन मात्र 500 से 700 रूपये के बीच दी जाती थी। अब इसमें बढ़ोत्तरी कर रूपये 1200 से 1500 प्रतिमाह कर दी गई है। प्रतिभा प्रोत्साहन योजना में प्रतिभावान साहित्यकार एवं कलाकार को एकमुश्त आर्थिक सहायता रूपये 25 हजार तक उपलब्ध करवाई जाती है। गंभीर रूप से बीमार साहित्यकार, कलाकार को रूपये 5 हजार तक की चिकित्सा सहायता भी दी जाती है।

हिन्दी का व्यापक प्रचार-प्रसार

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा 10वाँ विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित करने का दायित्व मध्यप्रदेश को दिया गया था। सम्मेलन 10 से 12 सितम्बर 2015 की अवधि में भोपाल में हुआ। स्थानीय समन्वय एवं सहयोग का दायित्व प्रदेश के संस्कृति विभाग को सौंपा गया। सम्मेलन का गौरवमयी शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किया। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘हिन्दी जगत विस्तार एवं संभावनाएँ’ था। आठ समान्तर सत्र में देश-विदेश से आए अतिथियों एवं प्रतिभागियों द्वारा हिन्दी के प्रयोग तथा वैश्विक स्तर पर भाषा की मान्यता पर गहरा विचार-विमर्श कर विषयपरक चिन्तन किया गया। समापन केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने किया। सम्मेलन के दौरान हिन्दी के विद्धानों को उनके विशिष्ट योगदान के लिए हिन्दी सम्मान से सम्मानित किया गया। विश्व हिन्दी सम्मेलन में की गई अनुशंसाओं के परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार ने सरकारी काम-काज में हिन्दी को प्रोत्साहित करने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं को हिन्दी में रखने के लिए बाकायदा निर्देश जारी किये हैं। सम्मेलन के सफल आयोजन से हिन्दी भाषा के मामले में प्रदेश की ख्याति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँची।

मध्यप्रदेश संभवतः पहला राज्य है जहाँ भाषा एवं बोलियों के विकास के लिए अकादमी स्थापित की गयी हैं। लुप्त हो रही बोलियों और भाषा को समर्थन, संरक्षण एवं उनके दस्तावेजीकरण का कार्य किया जा रहा है। राजभाषा हिन्दी और प्रदेश के अंचलों की बोलियाँ बुन्देली, मालवी, निमाड़ी और बघेली बोलियों के शब्द अर्थ, कहावतें, मुहावरों का संकलन कर प्रकाशन करवाया जाता है। मालवी एवं निमाड़ी साहित्य के इतिहास की पुस्तक प्रकाशित की जा चुकी हैं। प्रत्येक आँचलिक बोली के कम से कम एक रचनाकार को वार्षिक आधार पर पुरस्कृत करने की योजना है।

महत्वपूर्ण उत्सव एवं समारोह

प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर महत्वपूर्ण उत्सव एवं समारोह आयोजित किये जाते हैं। इनमें राष्ट्रीय कुमार गंधर्व सम्मान अंलकरण (देवास), मालवा उत्सव (इंदौर), गीता फेस्ट (भोपाल), स्वतंत्रता दिवस पर भक्ति संगीत कार्यक्रम (दतिया), पं. विष्णु नारायण भातखण्डे स्मृति संगीत प्रसंग (भोपाल एवं सभी संगीत महाविद्यालय), राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान अलंकरण समारोह (खण्डवा), श्री रामलीला उत्सव (भोपाल), नर्मदा महोत्सव (भेड़ाघाट), शरदोत्सव (चित्रकूट), गीत-संगीत प्रस्तुति (भोपाल), मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह (भोपाल), पचमढ़ी उत्सव (पचमढ़ी), गढ़-कुण्डार महोत्सव (गढ़-कुण्डार), राष्ट्रीय कालिदास सम्मान अलंकरण समारोह (उज्जैन), राष्ट्रीय तानसेन सम्मान अलंकरण समारोह (ग्वालियर), भोजपुर उत्सव (भोजपुर), खजुराहो नृत्य समारोह (खजुराहो), लोक रंग उत्सव (भोपाल), अनुगूँज (उज्जैन), उत्तराधिकार (भोपाल) एवं महाबोधि उत्सव (साँची-रायसेन) प्रमुख हैं।

साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय

बौद्ध तथा भारतीय ज्ञान अध्ययन में अंतर्राष्ट्रीय उत्कृष्टता एवं नालंदा और तक्षशिला की परम्परा का ज्ञानपीठ बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष अभिरूचि से प्रदेश के रायसेन जिले के साँची में साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2012 में की गई। वर्ष 2015 में विश्वविद्यालय द्वारा वैश्विक विषय विशेषज्ञों के जरिए ‘कश्मीर शैववाद’ जैसे गूढ़ तथा ‘संस्कृत अध्ययन’ जैसे प्राचीन विषय पर प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम संचालित किये गये। इन पाठ्यक्रमों में देश-विदेश के छात्रों के साथ 70 वर्षीय ज्ञानपिपासु भी शामिल हुए। ‘भारतीय चिन्तन में एकात्म मानववाद’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई जिसमें 50 शोध पत्र प्रस्तुत हुए।

सिंहस्थ 2016 श्रृंखला के चार अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में से द्वितीय सम्मेलन के लिए विश्वविद्यालय को नोडल विभाग नामांकित किया गया। ‘मानव-कल्याण के लिए धर्म’ विषय पर इंदौर में 24 से 26 अक्टूबर 2015 के दौरान हुए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में दुनियाभर से 1200 विभिन्न विषय के विद्धान और श्रोता शरीक हुए। सम्मेलन के दस सत्र की अध्यक्षता विदेशी विद्धानों ने की और 10 विषय पर सामान्तर सत्रों में करीब 150 शोध-पत्र प्रस्तुत किये गये। 12 से 14 फरवरी तक 'गलोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन-समाधान की ओर' तथा ' विज्ञान एवं अध्यात्म' विषय पर संगोष्ठियाँ भी हुईं।

सिंहस्थ- 2016

सिंहस्थ 2016 के महापर्व को भव्यता प्रदान करने का दायित्व संस्कृति विभाग ने संभाला। सिंहस्थ के आयोजन में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये गये इनमें मुख्यतः संग्रहालयों की स्थापना, विक्रमकीर्ति मंदिर उज्जैन का जीर्णोद्धार, उज्जैन के प्राचीन प्रवेश द्वारों का पुनर्निर्माण, विक्रय परिसर की स्थापना, सिग्नेचर टयून्स, उपवन एवं प्रदर्शनी दीर्घा के निर्माण के साथ ही उज्जैनी की साज-सज्जा का कार्य रहा। पुस्तक प्रकाशन आदि के साथ ही सिंहस्थ के दौरान की योजनाओं में अस्थाई मंचों एवं परिसर का निर्माण, प्रदर्शनी एवं कार्यशालाएँ, उज्जैनी केन्द्रित गतिविधियाँ, सात कला मंच पर प्रतिदिन नयनाभिराम-कर्णप्रिय कला प्रस्तुतियाँ हुईं, जिनमें श्रद्धालुओं को भारत वर्ष के विभिन्न अंचलों के प्रतिष्ठित कला-रूपों और शैलियों से परिचित होने का दुर्लभ अवसर मिला।

सिंहस्थ- 2016 के परिप्रेक्ष्य में आयोजित विभिन्न वैचारिक संगोष्ठियों के समापन स्वरूप सिंहस्थ मेला अवधि के दौरान उज्जैन के ग्राम निनौरा में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय विचार महाकुंभ प्रतिष्ठा एवं गौरवपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। वैचारिक महाकुंभ का उद्घाटन श्री मोहन राव भागवत,सरसंघ चालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक के मुख्य आतिथ्य एवं महामंडेश्वर स्वामी अवधेशानंद तथा श्री प्रणव पंड्या कुलपति देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्धार तथा महामहिम श्री लोबसन्ग सन्गे, सिकियोंग,सीटीएडी धर्मशाला की विशिष्ट उपस्थिति में हुआ। इस तीन दिवसीय विचार महाकुंभ का समापन प्रधान मंत्री श्री नरेन्द मोदी के मुख्य आतिथ्य एवं श्रीलंका के राष्ट्रपति श्री मैत्रीपाल सिरीसेना के विशेष आतिथ्य में हुआ।

शौर्य स्मारक

राष्ट्र की सुरक्षा में जीवन बलिदान करने वाले शहीदों की पावन-स्मृति को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए भोपाल में शौर्य स्मारक निर्मित किया गया है। स्मारक की परिकल्पना एक पवित्र स्थान को संबोधित करती है जिसकी विवेचना परम्परागत एलोरा,खजुराहो तथा मोधेरा जैसे भारतीय मंदिरों से की गई है। इस स्मारक में मंदिर-अक्ष की पवित्रता को अंतिम स्थान (मृत्यु पर विजय) में जीवन बलिदान करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने को दर्शाया गया है। यह स्मारक भोपाल नगर के महत्वपूर्ण एवं दर्शनीय स्थल पर चिनार पार्क के समीप 51 हजार 250 वर्गमीटर भूमि पर निर्मित है। निर्मित क्षेत्र लगभग 800 वर्ग मीटर है। इसके निर्माण पर रू 41 करोड़ की लागत आई है। नवनिर्मित शौर्य स्मारक का लोकार्पण प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 14 अक्टूबर 2016 को किया गया।

शौर्य स्मारक में पृथ्वी से उभरता हुआ 62 फीट ऊँचा स्तंभ, एक सैनिक के जीवन को दर्शाता है जिसे उसने स्वयं अपनी स्वेच्छा से स्वीकारा है। यह स्तंभ अंदरुनी शक्ति एवं साहस की बुनियाद पर निर्मित है। स्मारक जीवन के विभिन्न पड़ावों पर सिपाहियों द्वारा किये गये त्याग और अंत में अपने जीवन का बलिदान, उनका देश के प्रति प्रेम, स्वामित्व तथा आत्मपूर्ति का द्योतक है जो देश की रक्षा कर रहे उनके इस विशाल परिवार की समृद्धि से उन्हें प्राप्त हुआ है। स्तंभ की प्रत्येक ग्रेनाइट डिस्क इस आरोहण का वर्णन करती है। स्तंभ के आस-पास एवं वातावरण से हमें जीवन के चरम लक्ष्य को प्राप्त शूरवीरों के बलिदान का अहसास होगा एवं दर्शकों के मन में सहज ही उनके प्रति नमन का भाव पैदा होगा। स्मारक की अनन्त ज्योति,ग्लास प्लाक्स,लाल स्कल्पचर, व्याख्या केन्द एवं शौर्य वीथी सचमुच अद्धितीय है।

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के लिए हुआ लोक-मंथन

राष्ट्र सर्वोपरि के विचार से ओत-प्रोत विचारकों और कर्मशीलों का तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन लोक-मंथन 12 से 14 नवम्बर तक विधानसभा परिसर,भोपाल में हुआ। इस आयोजन की विशेषता है कि इसमें राष्ट्र निर्माण में कला, संस्कृति, इतिहास, मीडिया और साहित्य की भूमिका पर विमर्श किया गया है। 'औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति' लोक-मंथन का केन्द्रीय विषय था। लोक-मंथन में शामिल हुए देश-दुनिया से प्रख्यात विचारक और रचनाधर्मियों के परस्पर विचार- विमर्श से भारत के साथ विश्व को नई दृष्टि मिलेगी। लोक-मंथन का आयोजन संस्कृति विभाग, भारत भवन और सामाजिक वैचारिक संस्था प्रज्ञा प्रवाह के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। लोक-मंथन में देश भर के लगभग 800 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

प्रासंगिक एवं महत्व के सम-सामयिक विषयों पर संवाद-संगोष्ठी

प्रदेश में देशकाल और सम-सामयिकता के विराट फलक पर प्रासंगिक एवं महत्व के विषयों पर संवाद और संगोष्ठी का आयोजन सांस्कृतिक जागरण का महत्वपूर्ण उपक्रम बना है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश विधानसभा में देश-दुनिया के मान्य एवं प्रतिष्ठित विचारकों की सहभागिता में ‘मूल्य आधारित जीवन शैली’ पर एक बड़ा आयोजन हुआ। इसी क्रम में साँची बौद्ध विश्वविद्यालय द्वारा इंदौर में ‘मानव कल्याण के लिए धर्म’ विषय और इसके बाद ‘ग्लोबल वार्मिंग एण्ड क्लायमेट चेंज एण्ड वे- आऊट’, चौथी संगोष्ठी ‘विज्ञान एवं आध्यात्म’ और अंतिम संगोष्ठी ‘सिंहस्थ का सार्वभैमिक संदेश एवं विचार’ का आयोजन सिंहस्थ की अवधि में उज्जैन में हुआ। अंतिम संगोष्ठी अंतर्राष्ट्रीय स्तर की थी। इसमें विचार-मंथन के 51 सूत्री सार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विश्व मानवता के नाम जारी किया गया। एक तरह से इस आयोजन से सिंहस्थ में आदिकाल की सम-सामयिक विषयों पर विचार-मंथन की परम्परा पुनर्जीवित हुई।

अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियाँ

प्रदेश में मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद गठित है। परिषद के अंतर्गत 9 अकादमियाँ, संगीत एवं नृत्य के विभिन्न केन्द्र, सृजन पीठें आदि संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संचालित है। ग्वालियर में राजा मान सिंह तोमर के नाम पर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2008 में की गई है। इसके अलावा प्रदेश में 7 शासकीय संगीत महाविद्यालय और 4 ललित कला संस्थान स्थापित है। वर्ष 2013 में एक पृथक से शासकीय संगीत एवं ललित कला संस्थान की स्थापना खण्डवा में की गई है।

रंग-अभिव्यक्ति केन्द्र के रूप में मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय की स्थापना वर्ष 2011 में की गई है। इसके माध्यम से नाट्य जगत में बेहतर भविष्य की आकांक्षा रखने वाले युवाओं को एक बेहतर मंच प्रदान किया जा रहा है। नाट्य विद्यालय के संदर्भ में जून 2011 में पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवानी ने अपने ब्लाग में मध्यप्रदेश सरकार के नाट्य विद्यालय की शुरुआत को सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि इससे रंगमंच, टेलीविजन और सिनेमा तीनों माध्यम और समृद्ध हो सकेंगे। सिने-तारिका एवं राज्य सभा सदस्य श्रीमती जया बच्चन ने भी विद्यालय की स्थापना की सराहना की। भोपाल क्षेत्र में फिल्म सिटी की शीघ्र स्थापना पर विचार हो रहा है। भोपाल के समीप ग्राम छावनी एवं मेण्डोरी में तथा रायसेन जिले के चिकलोद ग्राम में भूमि का चयन हो चुका है।

 
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