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जन-कल्याण के 11 वर्ष

बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण शांति का टापू बना मध्यप्रदेश

भोपाल : सोमवार, नवम्बर 28, 2016, 16:57 IST
 

अच्छी कानून-व्यवस्था विकास की सबसे पहली शर्त है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में पिछले 11 साल में बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण मध्यप्रदेश को शांति का टापू कहा जाता है। यही वजह है कि देश-विदेश के निवेशक और उद्योगपति मध्यप्रदेश में निवेश के लिये लगातार आगे आ रहे हैं।

पुलिस बल में वृद्धि

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बढ़ती चुनौतियों का सामना करने के लिये चरणबद्ध तरीके से मध्यप्रदेश पुलिस बल में वृद्धि की प्रक्रिया शुरू की और अब तक 50 प्रतिशत से अधिक पुलिस बल वृद्धि मध्यप्रदेश में हुई है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2005 में कुल 77 हजार 414 स्वीकृत बल था, जो अब बढ़कर एक लाख 19 हजार 750 हो गया है। इस दौरान 161 नये पुलिस थाने तथा 111 नई पुलिस चौकियाँ स्थापित की गयी हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जनसंख्या के अनुपात में प्रतिवर्ष 6000 पुलिसकर्मी के नये पद स्वीकृत करने की घोषणा की है। मध्यप्रदेश में विगत वर्षों में पुलिस बल के लिये 42 हजार से अधिक नये पद स्वीकृत किये गये हैं।

कमजोर वर्ग की सुरक्षा

पिछले 11 वर्ष में अनुसूचित जाति-जनजाति के विरूद्ध देश में होने वाले कुल अपराधों में मध्यप्रदेश का प्रतिशत कम हुआ है। महिलाओं के खिलाफ भी अपराध कम हुए हैं। महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, बलात्कार और अत्याचार के मामलों में त्वरित न्याय के लिये विशेष न्यायालय गठित किये गये हैं। पुलिस मुख्यालय पर महिला अपराध शाखा, प्रत्येक जिले में राजपत्रित अधिकारी के प्रभार में महिला प्रकोष्ठ और 141 महिला डेस्क स्थापित की गयी हैं। सभी जिला मुख्यालय पर महिला अपराध हेल्पलाइन-1090 शुरू की गयी है। साथ ही सभी जिला मुख्यालय पर निर्भया पेट्रोलिंग की व्यवस्था है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर कार्यशाला, प्रशिक्षण, सेमीनार के माध्यम से बालिकाओं को सुरक्षा एवं अपराध से बचाव के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

डॉयल-100

नागरिकों को त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से देश में अपने प्रकार की अभिनव डॉयल-100 सेवा एक नवम्बर, 2015 से शुरू की गयी। इससे प्रतिदिन 5 से 7 मिनट में व्यक्ति को पुलिस की तत्काल मदद मिल रही है। इससे आम जनता में सुरक्षा का नया माहौल और विश्वास बना है। मध्यप्रदेश पुलिस की इस योजना को 17 दूसरे राज्य और केन्द्र-शासित प्रदेश अपने क्षेत्रों में लागू कर रहे हैं। बड़े शहरों में लूट जैसे गंभीर अपराधों पर रोक लगी है तथा अपराधियों में पुलिस की सक्रियता से दहशत पैदा हुई है।

सी.सी. टी.व्ही. कैमरे

जिला मुख्यालय और बड़े चिन्हित 61 शहर में निरंतर निगरानी तथा यातायात प्रबंध के लिये महत्वपूर्ण स्थानों और चौराहों पर सी.सी. टी.व्ही. कैमरे लगाये जा रहे हैं। उज्जैन, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, खण्डवा, कटनी और सागर में यह काम अंतिम चरण में है। दूसरे चरण में सभी शेष 50 शहर के सुरक्षा तंत्र को सी.सी. टी.व्ही. कैमरे के माध्यम से मजबूत किया जायेगा।

सिंहस्थ

इसी वर्ष मई में उज्जैन में आयोजित सिंहस्थ के दौरान मध्यप्रदेश पुलिस बल की विनम्रता, कार्य-कुशलता और आचरण की व्यापक रूप से सराहना हुई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में पुलिस की सख्त छवि बदली और उसे एक मददगार पुलिस बल के रूप में पहचान मिली। इसकी प्रशंसा देश ही नहीं, विदेशों में भी हुई।

सी.सी.टी.एन.एस.

क्राइम एण्ड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एण्ड सिस्टम (सी.सी.टी.एन.एस.) भारत सरकार की मिशन-मोड योजना है। इसका उद्देश्य देश के सभी थानों को एकत्रित नेटवर्क एवं सॉफ्टवेयर के माध्यम से जोड़कर अपराध एवं अपराधी संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाना है। सिस्टम के जरिये थानों में एफआईआर भेजना, केस-डायरी और अन्य सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज के लिखने का काम पूरे प्रदेश में एक साथ करने में भी मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में है। सिस्टम से प्रदेश के सभी जिले एवं थाने जोड़े गये हैं।

नियमित मॉनीटरिंग

प्रदेश में गंभीर एवं सनसनीखेज अपराधों में अति-संवेदनशील प्रकरणों को चिन्हित कर उनकी नियमित मॉनीटरिंग की व्यवस्था की गयी है। सभी सूचीबद्ध डकैत गिरोह का सफाया किया गया है। हाल ही में भोपाल की केन्द्रीय जेल से जेल प्रहरी की निर्मम हत्या कर फरार हुए सिमी के 8 खूँखार आतंकवादियों को कुछ घंटों में ही मध्यप्रदेश की पुलिस ने धराशायी कर दिया।

राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल और आतंकवादी विरोधी दल

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दृढ़-संकल्प के साथ पुलिस बल में वृद्धि ही नहीं की है, वरन औद्योगिक संस्थाओं की सुरक्षा के लिये अलग से राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल की स्थापना भी की है। आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिये आतंकवादी विरोधी दल (एटीएस) का गठन किया गया है।

पुलिस प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री ने भविष्य में पुलिस की भूमिका को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिये पुलिस की प्रशिक्षण प्रक्रिया को भी नया आयाम दिया है। पिछले वर्षों में पुलिस के नये प्रशिक्षण केन्द्र ही नहीं खोले गये, बल्कि पहले से स्थापित प्रशिक्षण केन्द्रों का उन्नयन एवं विस्तार भी किया गया। राजधानी भोपाल के समीप सब इंस्पेक्टर एवं डीएसपी स्तर के अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिये ग्राम भौंरी में अत्याधुनिक संसाधन से लैस नया प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किया गया है। सागर में एक और नया प्रशिक्षण केन्द्र मकरोनिया में खोला गया है। जबलपुर और उज्जैन में नये प्रशिक्षण केन्द्र शुरू किये जा रहे हैं। इंदौर के प्रशिक्षण केन्द्र का स्कूल से कॉलेज में उन्नयन किया गया है। पुलिस ट्रेनिंग स्कूल तिगरा, ग्वालियर, रीवा, पचमढ़ी और उमरिया का काया-कल्प कर प्रशिक्षण के आधुनिक संसाधन उपलब्ध करवाये गये हैं। मध्यप्रदेश सशस्त्र बल के 6, 8 और 13वीं वाहिनी में स्थित नये प्रशिक्षण केन्द्रों का उन्नयन एवं विस्तार भी किया गया है। पहले प्रदेश में 2000 लोगों के प्रशिक्षण की व्यवस्था थी, जो अब बढ़ाकर 10 हजार से अधिक कर दी गयी है।

आवास सुविधा

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पुलिसकर्मियों के कल्याण के लिये भी भगीरथी प्रयास किये हैं। आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक के कर्मचारियों को नि:शुल्क आवास देने के राज्य शासन के संकल्प में मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिये पिछले चार वर्ष में अत्याधुनिक 10 हजार 500 आवास का निर्माण किया गया है। अगले पाँच वर्ष में पुलिसकर्मी के लिये 25 हजार पारिवारिक आवास बनाये जा रहे हैं। पुलिस के पुराने आवासों के पुनरोद्धार की भी समुचित व्यवस्था की गयी है। इसके लिये 50 करोड़ की राशि मंजूर की गई है।

स्वास्थ्य सुरक्षा योजना

पुलिसकर्मियों की कठिन परिस्थितियों की ड्यूटी को ध्यान में रखकर मध्यप्रदेश पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को भी वर्ष 2013 से अमली जामा पहनाया गया। अब यदि प्रदेश में कोई पुलिसकर्मी किसी रोग या गंभीर बीमारी से पीड़ित होता है तो न सिर्फ उस कर्मी को, बल्कि उसके आश्रितों, पत्नी, बच्चे, बूढ़े माता-पिता को भी 8 लाख रुपये तक का लाभ इस योजना से दिया जा रहा है।

आधुनिकीकरण

मुख्यमंत्री श्री चौहान की पुलिस बल के आधुनिकीकरण संबंधी दूरदृष्टि की सराहना पूरे देश में की जा रही है। पुलिस के आधुनिकीकरण के कामों को योजना व्यय में शामिल किया जाना इसमें प्रमुख है। शुरू में चार योजना के लिये 25 करोड़ की राशि स्वीकृत की गयी थी, अब बढ़ते-बढ़ते 45 आधुनिकीकरण योजनाओं पर 1000 करोड़ की राशि खर्च की जा रही है।

कुशल नेतृत्व

वर्तमान दौर में जब छुटपुट तनाव पर भी गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति निर्मित होती है, तब मध्यप्रदेश पुलिस ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के कुशल नेतृत्व में गंभीर से गंभीर स्थितियों को सुगम एवं व्यवस्थित तरीके से हल किया है। देश की एक चर्चित राष्ट्रीय पत्रिका द्वारा कानून-व्यवस्था के आकलन में मध्यप्रदेश को शीर्ष प्रथम चार राज्य में शामिल किया गया है। पिछले 11 वर्ष में मध्यप्रदेश में आंतरिक सुरक्षा की दीवार मजबूत हुई और आम जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। इसका श्रेय केवल मुख्यमंत्री की दूरदृष्टि और कुशल नेतृत्व क्षमता को जाता है। उम्मीद है कि श्री चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सुरक्षा और विकास के मामले में आने वाले समय में भी भारत का सर्वोत्तम राज्य बना रहेगा।

 
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