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जन-कल्याण के 11 वर्ष

प्रदेश में सड़क निर्माण के बेमिसाल 11 साल

भोपाल : सोमवार, नवम्बर 28, 2016, 17:00 IST
 

मध्यप्रदेश के विकास में पिछले ग्यारह वर्ष अभूतपूर्व रहे हैं। इस अरसे में मध्यप्रदेश ने विकास के नये आयाम स्थापित किये। शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, परिवहन, कृषि, नगरीय और ग्रामीण विकास, विद्युतीकरण के साथ मध्यप्रदेश में सड़क तथा भवन निर्माण/उन्नयन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य हुआ। इस सबसे मध्यप्रदेश की गणना अब पिछड़े अथवा बीमारू राज्य के स्थान पर देश के सबसे प्रगतिशील राज्यों में होने लगी है।

विकसित मध्यप्रदेश में जहाँ वाहनों का आवागमन सभी तरह के मार्गों पर कई गुना बढ़ा। दूसरी ओर विकास की रफ्तार ने वाहनों की रफ्तार में भी वृद्धि कर दी। उन्नत किस्म के अद्यतन वाहन मध्यप्रदेश की सड़कों पर दिखाई देने लगे जिनके लिये उच्च गुणवत्ता के मार्गों की आवश्यकता पड़ी। वाहनों के बढ़ते दबाव तथा मार्ग की गुणवत्ता के सुधार के साथ-साथ एक चिन्ता मार्गों पर बढ़ रही दुर्घटनाओं की भी उत्पन्न हुई, इसके लिये मार्ग की बनावट में भी जरूरत के मुताबिक सुधार किया गया।

वर्ष 2005-06 से वर्ष 2015-16 के मध्य योजना मद में सड़क निर्माण/उन्नयन पर लगभग रूपये 21 हजार 412 करोड़ व्यय किये गये। इससे कुल 33 हजार 781 किलोमीटर सड़कों का निर्माण संपन्न किया गया। वर्ष 2016-17 में योजना मद में रूपये 5000 करोड़ की राशि स्वीकृत है जिसका उपयोग सीमेंट-कांक्रीट की सड़कें बनाने में भी होगा।

सड़क निर्माण में निजी पूँजी निवेश में म.प्र. देश में अग्रणी

निजी पूँजी निवेश के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश की गिनती राष्ट्र के अग्रणी राज्यों में की जाती है। विगत ग्यारह वर्षों में लगभग रूपये 14 हजार 521 करोड़ की राशि से लगभग 6500 किलोमीटर उच्च गुणवत्तापूर्ण सड़कों का निर्माण किया गया। मध्यप्रदेश ही एकमात्र राज्य है जहाँ बीओटी, बीओटी+एन्युटी तथा ओएमटी तीनों वित्तीय माडल में जरूरत के अनुरूप निजी पूँजी निवेश को प्रोत्साहित करते हुए मार्ग निर्माण/संधारण की कार्यवाही की गई है। इतनी अधिक मात्रा में निजी पूँजी निवेश यह बताता है कि निवेशकों का विश्वास राज्य के प्रति बढ़ा है।

भारत सरकार की व्हीजीएफ (Viability Gap Funding) योजना का लाभ लेकर मध्यप्रदेश सर्वाधिक सड़कों के निर्माण में भी देश में प्रथम रहा है।

मध्यप्रदेश राष्ट्र का एकमात्र राज्य हैं जहाँ एशियन डेव्हलपमेंट बैंक ने मार्ग निर्माण के क्षेत्र में पाँचवीं बार ऋण दिये जाने में अपनी रूचि दिखाई। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा एडीबी से चार चरण में 11000 लाख डॉलर के वित्तीय ऋण प्राप्त किए गए। पिछले दस वर्ष में इन ऋणों से प्रदेश में 4500 किलोमीटर लम्बाई की सड़कों का निर्माण हुआ है। एडीसी से लिये गये ऋण का समय-सीमा में सभी औपचारिकताएँ पूरी करते हुए उपयोग कर लिये जाने की वजह से बैंक द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश को प्रशंसित किया गया तथा अन्य देश एवं राज्यों को अनुसरण का सुझाव भी दिया गया। एडीबी तथा ब्रिक्स देशों द्वारा प्रायोजित एनडीबी (New Development Bank) से रूपये 6000 करोड़ के ऋण का उपयोग अगले सालों में 3000 किलोमीटर लंबाई की सड़कों के निर्माण/उन्नयन में किया जायेगा। यह सभी सड़कें सीमेन्ट-कांक्रीट की होंगी।

सड़कों आगामी 10 वर्ष में 30 हजार करोड़ का व्यय होगा

विगत दशक के विकास की रफ्तार को बढ़ाते हुए आगामी दस वर्ष में लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रदेश को और अधिक गतिशील और उन्नत बनाये जाने के दृष्टिकोण से अधोसंरचना विकास के अपने लक्ष्य को अधिक बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्यवाही शुरू कर दी गई है। प्रथम चरण में राज्य के सड़क नेटवर्क को पुन: परिभाषित कर नये राज्य राजमार्ग, मुख्य जिला मार्ग घोषित किए गए हैं। इसी प्रकार राज्य राजमार्गों को नवीन राष्ट्रीय राजमार्गों में बदला गया है।

राज्य राजमार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग (अधिसूचित)

2611 किलोमीटर

राज्य राजमार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग

2383 किलोमीटर

मुख्य जिला मार्ग से राज्य राजमार्ग

3778 किलोमीटर

अन्य जिला मार्ग से मुख्य जिला मार्ग

4211 किलोमीटर

इन उन्नत मार्गों के विकास पर लगभग रूपये 30 हजार करोड़ का व्यय संभावित है। वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था आगामी वर्षों में की जाकर व्यय सुनिश्चित किया जायेगा।

5 हजार करोड़ से ज्यादा राशि के 3720 भवन का निर्माण

प्रदेश में विभिन्न शासकीय भवनों का निर्माण समय-सीमा में गुणवत्ता से पूरा करने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग के अधीन पीआईयू की संरचना अक्टूबर 2010 में 15 जिलों में स्वीकृत करने के बाद कार्यों की संख्या बढ़ने से मार्च 2014 में इन इकाइयों का सुदृढ़ीकरण किया गया। प्रत्येक जिले में पीआईयू के जिला स्तरीय कार्यालय, भोपाल, इन्दौर जबलपुर, ग्वालियर एवं रीवा में परिक्षेत्रीय कार्यालय के साथ प्रदेश स्तर पर अलग से प्रमुख अभियंता स्तर के परियोजना संचालक कार्यालय की स्थापना की गई। पिछले 8 वर्ष में पीआईयू द्वारा रूपये 5055 करोड़ की लागत के 3720 कार्य पूरे किए गए।

19 एकीकृत जाँच चौकी का निर्माण

मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा वाणिज्यिक कर, परिवहन, वन, मण्डी तथा खनिज विभागों से संबंधित अंतर्राज्यीय करों के संग्रहण के लिये 24 एकीकृत जाँच चौकियों तथा दो केन्द्रीय नियंत्रण प्रणाली का निर्माण भी किया जा रहा है। इसमें इन्दौर तथा ग्वालियर स्थित केन्द्रीय नियंत्रण प्रणाली तथा 19 एकीकृत जाँच चौकियों का निर्माण हो गया है। इन जाँच चौकियों से न सिर्फ यातायात सुगम हुआ है वरन राजस्व चोरी पर रोक लगाने में भी सफलता मिली है।

एक्सीडेन्ट रेस्पांस सिस्टम लागू

दुर्घटना प्रतिक्रिया प्रणाली के माध्यम से राज्य राजमार्गों को एकसूत्र में पिरोया गया है। राज्यमार्गों पर जीपीएस धारी एम्बूलेंस तथा टोल नाकों पर कैमरे की व्यवस्था की गई है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा विकसित 'Accident Response System' प्रणाली को '108 सेवा' से जोड़ा जा रहा है। इससे पूरे प्रदेश में सड़क दुर्घटना में घायलों को त्वरित एम्बूलेंस सहायता की जा सकेगी।

एकीकृत सड़क प्रणाली

प्रदेश के सभी मार्गों की एकीकृत सड़क प्रणाली भी विकसित की जा रही है। इसमें राज्य की सभी सड़क निर्माण एजेंसियों को सम्मिलित किया जा रहा है। इसके पोर्टल के माध्यम से जन-सामान्य को किन्हीं दो स्थान के बीच सबसे सुगम मार्ग का चयन करना आसान होगा। इस प्रणाली का प्रयोग मार्गों के समुचित नियमन के लिये एनालिटिकल डाटा प्राप्त करने के लिये भी हो सकेगा।

इलेक्ट्रानिक टोल कलेक्शन सिस्टम लागू होगा

मध्यप्रदेश में टोल प्लाजा पर यातायात को सुगम बनाने एवं ईधन एवं समय की बचत के लिये इलेक्ट्रानिक टोल कलेक्शन सिस्टम भी लागू किया जा रहा है। इसके लिये भारतीय हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड, नई दिल्ली से ई-टेंडरिंग करार किये जाने की भी कार्यवाही की जा रही है।

ई-टेंडरिंग

लोक निर्माण विभाग द्वारा क्रियान्वित परियोजनाओं में गुणवत्ता के साथ-साथ कार्य-प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा सीमित समय में योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में भी ठोस कार्यवाही प्रारंभ कर दी गयी है। विभाग में ई-टेण्डरिंग प्रणाली पहले से ही लागू है। अब निविदाएँ आमंत्रित किये जाने के पहले ही जरूरी वैधानिक/प्रशासकीय स्वीकृतियों के साथ भूमि उपलब्धता की अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। एक समान निविदाओं को समूह में जारी किये जाने से अनुबंधों की संख्या में कमी आयी है। ठेकेदार के पंजीयन की व्यवस्था को सरल कर अनावश्यक दस्तावेजों की अनिवार्यता हटाई गयी है। निविदा के प्री-क्वालिफिकेशन में सफल निविदाकारों से संबंधित श्रेणी, पंजीयन के पूर्व अनुभव की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया है। निम्न श्रेणी की परियोजनाओं जैसे 02 करोड़ तक के भवन निर्माण तथा 5 करोड़ तक के अन्य कार्यों में भी प्री-क्वालिफिकेशन की शर्त समाप्त कर दी गयी है। सभी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिये प्री-क्वालिफिकेशन की शर्तों को उदार बनाया गया है। एल-1 को छोड़कर अन्य निविदाकारों से प्राप्त अमानत राशि निविदा खोले जाने के तत्काल बाद वापस करने की व्यवस्था लागू की गयी है। कार्य पूरा होने संबंधी प्रमाण-पत्र को जारी करने को भी समयबद्ध कर दिया गया है।

गुणवत्ता सुधार के प्रभावी कदम

सड़क निर्माण गुणवत्ता में सुधार के संबंध में भी प्रभावी कदम उठाये जा रहे हैं। इसमें ठेकेदार द्वारा प्रत्यक्ष रूप से मान्य प्रयोगशाला, राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड, नई दिल्ली का उपयोग किया जा रहा है। अनुबंध में स्वतंत्र सलाहकार के माध्यम से गुणवत्ता की निगरानी तथा आधुनिकतम तकनीक तथा जीआईएस सहित सूचना तकनीक का अधिकाधिक उपयोग किया जाना भी शामिल है। गुणवत्ता की सतत निगरानी के लिये ठेकेदार तथा अधिकारियों के मध्य निश्चित समय-अंतराल पर बैठकें किये जाने से भी प्रभावशील परियोजनाओं में यथासमय आवश्यक सुधार किया जाना संभव हो सका है। गुणवत्ताविहीन कार्यों के लिए जहाँ विभागीय अधिकारियों का दायित्व निर्धारित किया जा रहा है, वहीं दोषी ठेकेदार के विरूद्ध अनुबंधानुसार कार्यवाही करते हुए उसे ब्लेक लिस्ट करने की प्रभावी व्यवस्था कायम की गयी है।

अभियंता प्रशिक्षण पर जोर

कार्यों की गुणवत्ता का सीधा संबंध अभियंताओं का अत्याधुनिक तकनीक तथा पद्धति से अद्यतन रहने से भी जुड़ा हुआ है। इस उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं के प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था की जा रही है। इस व्यवस्था में अधीक्षण यंत्री तथा इससे वरिष्ठ अधिकारियों के लिये प्रत्येक दो वर्ष में एक विशेषज्ञ संस्था के माध्यम से प्रशिक्षण, विभिन्न कार्यशालाओं, कांन्फ्रेंस में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। विभाग अथवा निगम में कार्यरत विशेषज्ञ अधिकारियों का भी इन-हाऊस उपयोग प्रारंभ कर दिया गया है। अन्य राज्यों में प्रशंसित नवाचारों का भी अध्ययन किया जा रहा है। भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी के माध्यम से बड़े स्तर पर विभाग के अभियंताओं का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। सीधी भर्ती से नियुक्त अभियंताओं की पर्यवेक्षणाधीन अवधि का प्रशिक्षण केलेण्डर बनाया जा रहा है। इसमें संस्थागत तथा मैदानी दोनों कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है।

अमले का युक्तियुक्तकरण

अधिकारियों की जिम्मेदारी को बढ़ाते हुए निर्णय के चरण कम किये गये हैं। कार्यों की आवश्यकताओं के आधार पर अधिकारियों तथा कर्मचारियों के युक्तियुक्तकरण की कार्यवाही की जा रही है। प्रचलित परियोजनाओं तथा वर्तमान जरूरतों को देखते हुए नये सिरे से स्वीकृत अमले के औचित्य के पुर्ननिर्धारण की कार्यवाही भी की जा रही है। इसमें औचित्यहीन पदों को समाप्त कर जरूरत के मुताबिक नये पदों का सृजन कर उन पर भर्ती किया जाना शामिल है।

प्रदेश में विकसित बायपास मार्गों ने शहरों के विकास में नए आयाम जोड़ दिए हैं। आज मध्यप्रदेश की विकास दर दो अंक में है और इसका प्रमुख कारण पिछले 11 वर्ष में हुआ सड़कों का विकास भी है। मध्यप्रदेश में आज सड़कें सपनों को साकार करने का जरिया बनकर आयी है और उनकी अच्छी गुणवत्ता से मध्यप्रदेश की पहचान बनी है।

 
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