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जन-कल्याण के 11 वर्ष

उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना हुआ साकार

भोपाल : सोमवार, नवम्बर 28, 2016, 17:00 IST
 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 11 वर्ष में प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रगति हुई है। उन्होंने सभी वर्गों का ध्यान तो रखा ही है। हर बच्चा स्कूल शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा भी पायें, इसके लिये उन्होंने कई ठोस कदम उठाये। जिस प्रदेश में बच्चों को स्कूल शिक्षा पाना कठिन था, वहीं आज प्रदेश के बच्चों का उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना साकार हो रहा है। उच्च शिक्षा को नये आयाम देने के लिये मुख्यमंत्री लगातार प्रयासरत हैं और नित नये प्रयासों से बच्चों की शिक्षा, शिक्षा ऋण योजना और नए महाविद्यालय खोले गये।

उच्च शिक्षा ऋण के लिये राज्य सरकार की गारंटी

प्रदेश के युवाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में पैसे की कमी बाधा न बने, इसके लिये शिक्षा ऋण गारंटी योजना लागू की गयी है। उच्च शिक्षा के लिये बैंक से ऋण के लिये राज्य सरकार गारंटी दे रही है। प्रदेश में निम्न आय वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिये शिक्षा ऋण प्राप्त करने में बैंकों द्वारा निर्धारित सीमा 4 लाख 50 हजार से अधिक ऋण प्राप्त करने पर कॉलेटरल सिक्यूरिटी की आवश्यकता के प्रावधान के कारण कठिनाई होती थी। इसके लिये मेधावी विद्यार्थियों को, जिन्हें उच्च शिक्षा के लिये ऋण की आवश्यकता है और वे कॉलेटरल सिक्यूरिटी के अभाव में बैंक से ऋण प्राप्त नहीं कर सकते, उन्हें इस योजना के तहत बैंकों के माध्यम से राज्य सरकार की गारंटी पर शिक्षा ऋण उपलब्ध करवाये जाने का प्रावधान किया गया।

विगत 11 वर्ष में 150 नये महाविद्यालय की स्थापना की गयी है। इसमें 3 कन्या तथा 28 विधि महाविद्यालय शुरू किये गये हैं। वर्ष 2005-06 में 298 अनुदान अप्राप्त महाविद्यालयों की संख्या वर्ष 2015-16 में 838 हो गयी है।

ऑनलाइन प्रवेश व्यवस्था

महाविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया में पारदर्शिता रहे, इसके लिये सभी महाविद्यालयों में प्रवेश की ऑनलाइन व्यवस्था की गयी है। अशासकीय महाविद्यालयों में वर्ष 2009-10 से बी.एड. पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू की गयी है। इसी प्रकार वर्ष 2015-16 और 2016-17 में भी बी.एड., एम.एड., बी.पी.एड., एम.पी.एड., बी.एस.सी., बी.एड. आदि संकाय में प्रवेश ऑनलाइन शुरू किया गया।

स्वामी विवेकानन्द कॅरियर मार्गदर्शन, स्व. लक्ष्मण गौड़ और हरिसिंह गौर स्मृति पुरस्कार

स्वामी विवेकानन्द कॅरियर मार्गदर्शन योजना में अब तक वर्ष 2005 से 2016 तक समन्वय कार्यक्रम में रोजगार और शिक्षा में अलग-अलग सत्र में प्रशिक्षण दिया गया।

विभाग द्वारा छात्रों/शिक्षकों/प्राचार्यों के लिये स्व. श्री लक्ष्मण सिंह गौड़ स्मृति पुरस्कार योजना लागू की गयी। इसी प्रकार विश्वविद्यालय के शिक्षाविद कुलपतियों के लिये स्व. श्री हरिसिंह गौर पुरस्कार योजना लागू की गयी।

गाँव की बेटी, प्रतिभा किरण, विक्रमादित्य योजना

वर्ष 2005-06 से लागू गाँव की बेटी योजना में अब तक 2 लाख 18 हजार 506 छात्राएँ लाभान्वित हुईं। प्रतिभा किरण योजना वर्ष 2008-09 में प्रारंभ की गयी। इसमें शासकीय-अशासकीय महाविद्यालयों में नियमित छात्राओं को अध्ययन के लिये पात्रता अनुसार 5000 रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2014-15 तक इस योजना में 17 हजार 441 छात्राएँ लाभान्वित हुई हैं।

विक्रमादित्य छात्रवृत्ति योजना वर्ष 2008 से शुरू कर कुल 461 शोधार्थी को लाभान्वित किया गया। विभिन्न छात्रवृत्तियों में वर्ष 2008-09 से वर्ष 2015-16 तक 17 हजार 51 छात्र-छात्राओं को लाभान्वित किया गया। अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों को शोध के लिये आर्थिक सहायता देने का काम भी सरकार ने शुरू किया। यह छात्रवृत्ति प्रतिवर्ष 156 विद्यार्थियों की अधिकतम सीमा के अधीन रहते हुए अनुसूचित-जाति के 100 और अनुसूचित-जनजाति के 56 विद्यार्थियों को प्रतिमाह 16 हजार रुपये या समय-समय पर शासन द्वारा निर्धारित दर से देय है। अनुसूचित जाति-जनजाति के पीएचडी शोधार्थियों के लिये वर्ष 2005 में एकीकृत/संस्कृत छात्रवृत्ति शुरू की गयी। इसमें वर्ष 2005-06 से वर्ष 2015-16 तक 3,788 हितग्राही को छात्रवृत्ति दी गयी है। प्रदेश में विकलांग विद्यार्थियों को शोध छात्रवृत्ति दिया जाना वर्ष 2009 से शुरू किया गया। इसमें वर्ष 2015-16 तक 17 हितग्राही को छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। योजनाओं के जरिये वर्ष 2014-15 तक 2 लाख 35 हजार 947 विद्यार्थी को अध्ययन के लिये छात्रवृत्ति दी गयी है।

शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ी

23 निजी विश्वविद्यालय और 13 शासकीय विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है। शासकीय महाविद्यालयों की संख्या 311 से बढ़कर 457 हुई है। मुख्यमंत्री ने भोपाल में अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना कर सभी विषय का अध्ययन हिन्दी में करवाने की पहल की है।

प्रयोगशालाओं का उन्नयन

विज्ञान के क्षेत्र में प्रदेश का गौरव स्थापित करने के उद्देश्य से शासकीय महाविद्यालयों की प्रयोगशालाओं का उन्नयन करने की योजना शुरू की गयी। योजना में महाविद्यालयों की प्रयोगशाला को चरणबद्ध रूप से आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है। वर्ष 2013-14 से लागू इस योजना में लगभग 1421 लाख रुपये का आवंटन कर 135 महाविद्यालय को लाभान्वित किया गया है।

पुस्तकालय का विकास

शासकीय महाविद्यालयों के पुस्तकालयों के अधोसंरचना विकास के लिये योजना वर्ष 2012-13 से शुरू की गयी। अब तक योजना से 172 महाविद्यालय में ई-लर्निंग रिसोर्स सेंटर एवं पुस्तकालय विकास के अन्य कार्य किये जा रहे हैं। वर्ल्ड बैंक परियोजना एक महती योजना है, जो 6 वर्ष के लिये है। परियोजना की कुल लागत 430 मिलियन डॉलर है। इसमें 300 मिलियन डॉलर का योगदान विश्व बैंक का एवं 130 मिलियन डॉलर का योगदान राज्य सरकार का होगा। वित्त पोषण परियोजना परिणामों पर आधारित है। संस्था द्वारा निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के संकेतों को उपलब्ध करने के बाद संबंधित संस्था को तय राशि देय होगी।

महाविद्यालयों के मुख्य भवनों का निर्माण

प्रदेश के नये 58 शासकीय महाविद्यालयों के मुख्य भवनों के निर्माण के लिये प्रशासकीय स्वीकृतियाँ जारी की गयी हैं। इनमें से 20 महाविद्यालय के भवनों के निर्माण काम पूरे किये जा चुके हैं। शेष भवनों के निर्माण का काम प्रगति पर हैं। प्रदेश के 19 शासकीय महाविद्यालयों में छात्रावास निर्माण के लिये प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गयी है। इनमें से पाँच छात्रावास का निर्माण काम पूरा हो चुका है। शेष निर्माणाधीन हैं।

प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में जन-भागीदारी राशि से एक वित्तीय वर्ष में 50 लाख रुपये तक की राशि के अधिकार जन-भागीदारी समिति के सचिव को दिये गये हैं।

सराहना और सम्मान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्च शिक्षा को जो नये आयाम दिये, उनकी प्रदेश में ही नहीं, देश में भी सराहना हुई। भारत सरकार ने वर्ष 2011 में द बेस्ट वेबसाइट ऑफ मध्यप्रदेश, वर्ष 2010 में बेस्ट एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर डेव्हलप्ड इन मध्यप्रदेश, वर्ष 2009 में मंथन साउथ एशिया अवार्ड (डिजिटल इन्क्लूजन फॉर डेव्हलपमेंट) ई-संवेद और वर्ष 2008 में सर्टिफिकेट ऑफ बेस्ट एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर डेव्हलप इन एम.पी. बाय मेप-आई.टी. के अवार्ड से नवाजा। साथ ही स्कॉच अवार्ड विभागीय ई-प्रवेश कार्य के लिये मध्यप्रदेश के सभी शासकीय-अशासकीय महाविद्यालय में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में देश में अव्वल होने के लिये दिया गया।

रूसा

राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान (रूसा) भारत सरकार की योजना है। इसे 3 अक्टूबर, 2013 को मध्यप्रदेश में शुरू किया गया। अभियान के तहत शासकीय संस्थानों के लिये केन्द्रीय अनुदान 60 और राज्य अनुदान 40 प्रतिशत का प्रावधान है। योजना में उच्च शिक्षा का विकास गुणवत्ता वृद्धि के साथ ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहुँच एवं कमजोर वर्ग तथा महिलाओं को समान रूप से उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाना है। रूसा कार्यक्रम में शहडोल में स्थित एक महाविद्यालय का उन्नयन कर विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने की योजना है। आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित महाविद्यालयों में भवन निर्माण एवं आदिवासी विद्यार्थियों को उच्च-स्तरीय अध्ययन करवाने की योजना शामिल है।

97 हजार स्मार्ट फोन वितरित

राज्य सरकार द्वारा विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा गारंटी योजना एवं विद्यार्थियों को 5 अक्टूबर, 2016 तक 97 हजार 156 स्मार्ट फोन दिये हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर उच्च शिक्षा विभाग के बजट में 11 साल पहले की तुलना में 602.69 की वृद्धि हुई है।

 
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