| اردو خبریں | संस्कृत समाचारः मुख्य पृष्ठ | हिन्दी | English | संपर्क करें | साइट मेप
You Tube
पिछला पृष्ठ

आलेख
medical abortion nhs coat hanger abortion stories medications for pregnancy
why is abortion bad europeanwindowshosting.hostforlife.eu teen abortion stories
cialis coupon free cialis trial coupon manufacturer coupons for prescription drugs
cialis.com coupons prescription discount coupons online cialis coupons
coupons cialis shop.officeexchange.net cialis coupons online
what is naltrexone saveapanda.com naltrexone liver damage
naltrexone success rate s467833690.online.de purchase naltrexone
vivitrol for alcohol does naltrexone block tramadol vivitrol shot for opiate addiction
revia naltrexone partickcurlingclub.co.uk revia for alcoholism
naltrexone capsules click low dose naltrexone drug interactions

  
जन-कल्याण के 11 वर्ष

नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में आगे बढ़ता मध्यप्रदेश

भोपाल : सोमवार, नवम्बर 28, 2016, 16:18 IST

वर्तमान समय में दीर्घकालीन जीवन के लिये बेहतर पर्यावरण और इसके लिये गैर-पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग तथा दोहन का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त बढ़ते औद्योगीकरण की वजह से ऊर्जा की आवश्यकता भी निरंतर बढ़ती जा रही है। ऊर्जा के लिये जीवाश्म ईंधनों के अधिकाधिक उपयोग से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और वातावरण में निरंतर परिवर्तन हो रहा है।

नया विभाग-नयी नीतियाँ

मध्यप्रदेश सरकार ने देश में सर्वप्रथम एक स्वतंत्र मंत्रालय की दिशा में पहल कर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग का अप्रैल, 2010 में गठन किया। नवीन और नवकरणीय ऊर्जा स्रोतों के सुनियोजित विकास पर ध्यान देते हुए ऊर्जा नीति-2006 के स्थान पर निवेशक प्रोत्साहन नीतियाँ जैसे- बॉयोमास आधारित विद्युत उत्पादन क्रियान्वयन नीति-2011, लघु जल विद्युत उत्पादन परियोजना क्रियान्वयन नीति-2012, पवन ऊर्जा परियोजना क्रियान्वयन नीति-2012, सौर ऊर्जा परियोजना क्रियान्वयन नीति-2012 एवं सौर ऊर्जा पार्क परियोजना क्रियान्वयन नति-2012 का क्रियान्वयन किया गया। इससे प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। परिणामस्वरूप आज प्रदेश नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन में अहम स्थान पर है।

3125 मेगावाट उत्पादन

वर्तमान में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में कुल 3195 मेगावॉट उत्पादन किया जा रहा है। इसमें पवन ऊर्जा से लगभग 2226.5 मेगावॉट, सौर ऊर्जा से लगभग 790.52 मेगावॉट, बॉयोमास ऊर्जा से 92 मेगावॉट और लघु जल विद्युत ऊर्जा से लगभग 86.35 मेगावॉट का उत्पादन किया जा रहा है। प्रतिवर्ष लगभग 22.72 लाख टन कार्बन डाई आक्साइड (Co2) के उत्सर्जन में कमी आयी है। देश की सबसे बड़ी एवं विश्व की तीसरी सबसे बड़ी 130 मेगावॉट की सौर परियोजना प्रदेश के नीमच जिले के ग्राम डीकेन में स्थापित की गयी। इस परियोजना के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रदेश को सम्मानित किया गया।

विश्व का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र रीवा में

विश्व का सबसे बड़ा 750 मेगावॉट क्षमता का अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर प्लांट प्रदेश के रीवा जिले की गुढ़ तहसील के ग्राम बरसेता पहाड़, बदवार, रामनगर पहाड़, ईटार पहाड़ की असिंचित भूमि पर स्थापित किया जायेगा। यह परियोजना दुनिया की सबसे सुनियोजित तरीके से स्थापित की जाने वाली पहली एवं महत्वपूर्ण सौर ऊर्जा परियोजना होगी। परियोजना का क्रियान्वयन भारत सरकार के उपक्रम 'सोलर इनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया' (सेकी) और राज्य शासन के उपक्रम 'म.प्र. ऊर्जा विकास निगम' की संयुक्त कम्पनी के माध्यम से किया जायेगा। परियोजना में लगभग 5000 करोड़ का निवेश होगा।

सौर ऊर्जा पार्क और परियोजनाएँ

प्रदेश में इसके अतिरिक्त 2000 मेगावॉट के 4 अन्य सौर पार्क एमएनआरई द्वारा स्वीकृत हैं। इसमें नीमच-मंदसौर सौर पार्क-500 मेगावॉट, राजगढ़-मुरैना सौर पार्क-500 मेगावॉट, शाजापुर-आगर सौर पार्क-500 मेगावॉट तथा छतरपुर में 500 मेगावॉट के सौर पार्क के लिये भूमि चिन्हांकित की गयी है। केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा भी प्रदेश में सौर परियोजनाएँ स्थापित की जा रही हैं। इसमें एनटीपीसी-750 मेगावॉट, कोल इण्डिया लिमिटेड- 450 मेगावॉट, ओआईएल/आईओसी-500 मेगावॉट, मोइल (Moil)-20 मेगावॉट और नालको (NALCO)- 20 मेगावॉट की सौर परियोजना स्थापित करेगा।

वर्ष 2014-15 में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में 450 मेगावॉट एवं सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 205 मेगावॉट की परियोजनाओं के साथ प्रदेश देश में द्वितीय स्थान पर रहा। वर्ष 2015-16 के अंतराल में प्रदेश में 1497.69 मेगावॉट नवकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित हुई। यह इस वर्ष देश की सर्वाधिक स्थापित क्षमता है एवं देश की कुल स्थापित क्षमता का 24 प्रतिशत है। वर्ष 2015-16 में पवन ऊर्जा की क्षमता 1261.4 मेगावॉट हुई, जो देश में सर्वाधिक है और देश की कुल स्थापित क्षमता का 40 प्रतिशत है।

वर्तमान में नवकरणीय ऊर्जा की 10 हजार 947 मेगावॉट क्षमता की कुल 281 परियोजनाएँ प्रक्रियाधीन हैं। इसमें सौर ऊर्जा की 3670 मेगावॉट की 68 परियोजनाएँ, पवन ऊर्जा की 6975 मेगावाट की 151 परियोजनाएँ, बॉयोमास ऊर्जा की 38 मेगावाट की 6 परियोजनाएँ और लघु जल विद्युत ऊर्जा की 264 मेगावाट की 57 परियोजनाएँ सम्मिलित हैं। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में ऑफ ग्रिड आधारित अनेक योजनाएँ संचालित कर पर्यावरण को संतुलित करने और सुदूर क्षेत्रों को सुविधा देने का काम किया जा रहा है। इसमें विशेष है- घरेलू एवं कृषि उपयोगी सोलर पम्प, बॉयो-गैस संयंत्र, सोलर पॉवर पेक, सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर होम लाइट, सौर गर्म जल संयंत्र, सोलर कुकर आदि।

सोलर फोटोवोल्टिक पॉवर प्लांट

प्रदेश के आदिवासी छात्रावासों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, जेलों, वन विभाग, पुलिस बल की दूरस्थ ग्रामीण चौकियों/थानों, पातालकोट क्षेत्र के ग्रामों, शैक्षणिक संस्थाओं, पुलिस मुख्यालय इत्यादि में निर्बाध रूप से विद्युत प्रदाय के लिये सोलर फोटोवोल्टिक पॉवर पैक की स्थापना की गयी है। पिछले 11 वर्ष में 48 हजार 56 किलोवाट के संयंत्र स्थापित किये गये हैं। इन पर कुल व्यय लगभग 96 करोड़ रुपये हुआ। निजी एवं व्यावसायिक भवनों की छतों का उपयोग नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन करने के लिये नेट-मीटरिंग नीति पर मंत्री-परिषद के अनुमोदन के बाद अमल की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गयी है।

ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम

प्रदेश के सुदूर ग्रामों/मजरों-टोलों, जो विद्युतविहीन हैं एवं जिन्हें DISCOM द्वारा विद्युतीकृत नहीं किया जा सकता है, को सौर ऊर्जा से विद्युतीकृत किया गया है। कार्यक्रम में वर्ष 2012-13 तक (भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 में योजना समाप्त) 594 ग्रामों/मजरे-टोलों को विद्युतीकृत किया गया। इससे 44 हजार 946 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। योजना पर कुल व्यय लगभग 40 करोड़ रुपये हुआ।

डी.डी.जी. कार्यक्रम

डीसेन्ट्रलाइज्ड डिस्ट्रीब्युटेड जनरेशन (डी.डी.जी.) कार्यक्रम में स्थानीय ग्रिड के जरिये घर-घर एवं अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिये विद्युत व्यवस्था की जाती है। वर्ष 2014-15 से लागू इस कार्यक्रम में 24 ग्रामों को सौर ऊर्जा से विद्युतीकृत किया गया। इससे 2377 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। कुल व्यय लगभग 2197 करोड़ रुपये हुआ।

सोलर फोटोवोल्टिक स्ट्रीट लाइट एवं होम लाइट

प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों में सोलर फोटोवोल्टिक स्ट्रीट लाइट एवं होम लाइट के माध्यम से प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध करवायी जाती है। पिछले ग्यारह वर्ष में 17 हजार 185 सौर पथ प्रकाश संयंत्र एवं 13 हजार 225 सौर घरेलू प्रकाश संयंत्र स्थापित किये गये हैं। इससे 13 हजार 225 हितग्राही लाभान्वित हुए। इस पर व्यय लगभग 43 करोड़ रुपये हुआ।

सोलर पम्प कार्यक्रम

प्रदेश के कृषकों एवं आमजन के लिये सिंचाई एवं पेयजल व्यवस्था के लिये सोलर पम्प की स्थापना की जाती है। पिछले 11 वर्ष में 3073 सोलर पम्प स्थापित किये गये। किसानों को अनुदानित दरों पर कृषि के लिये सोलर पम्प दिये जाने के लिये नई नीति मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृत की गयी है।

विकासखण्ड-स्तरीय अक्षय ऊर्जा शॉप

अक्षय ऊर्जा के प्रचार-प्रसार, विपणन, रख-रखाव एवं ऊर्जा की बचत के लिये प्रदेश के 282 विकासखण्ड में अक्षय ऊर्जा शॉप स्थापित हैं। इन शॉप से आमजन को अक्षय ऊर्जा एवं ऊर्जा दक्ष उपकरण आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। साथ ही उपकरणों का रख-रखाव भी संभव हो रहा है।

सूर्यमित्र स्किल डेव्हलपमेंट कार्यक्रम

आईटीआई/डिप्लोमा उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को सौर ऊर्जा से संबंधित स्थापना, कमीशनिंग एवं संचालन-रख-रखाव के लिये भारत सरकार द्वारा सूर्यमित्र स्किल डेव्हलपमेंट कार्यक्रम वर्ष 2015-16 में प्रारंभ किया गया है। कार्यक्रम के जरिये अगले पाँच वर्ष में लगभग 4000 सूर्यमित्र तैयार किये जायेंगे। यह आवासीय प्रशिक्षण पूरी तरह नि:शुल्क है। प्रथम चरण में प्रदेश की 8 चुनी हुई संस्थाओं द्वारा 30-30 के बैच में प्रशिक्षण किया जा चुका है। प्रशिक्षित छात्र-छात्राओं को निर्मित/निर्माणाधीन सौर परियोजनाओं में रोजगार भी दिये जा रहे हैं।

ऊर्जा दक्ष एलईडी कार्यक्रम

प्रदेश में 72 करोड़ रुपये की उजाला योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री द्वारा इसी वर्ष 30 अप्रैल को किया गया। योजना में एलईडी बल्ब का वितरण 85 रुपये दर से डाकघर, म.प्र. ऊर्जा विकास निगम के जिला कार्यालय, अक्षय ऊर्जा शॉप्स, सहकारी संस्थाओं, विद्युत वितरण कम्पनी के काउंटर्स, पुलिस वेल्फेयर एवं एसएएफ बटालियन के माध्यम से आमजन को किया जा रहा है। अभी तक प्रदेश में 85 लाख से अधिक एलईडी बल्ब का वितरण किया जा चुका है। मासिक वितरण के आधार पर मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। एलईडी बल्ब की सफलता के मद्देनजर ऊर्जा दक्ष ट्यूब लाइट (20 वॉट) एवं ऊर्जा दक्ष 5-स्टार पंखे (50 वॉट) का वितरण क्रमश: 230 रुपये एवं 1150 रुपये की दर से शुरू किया गया है, जो बाजार दर से क्रमश: तिहाई और आधी कीमत पर है।

 
आलेख
medical abortion nhs coat hanger abortion stories medications for pregnancy
why is abortion bad europeanwindowshosting.hostforlife.eu teen abortion stories
cialis coupon free cialis trial coupon manufacturer coupons for prescription drugs
cialis.com coupons prescription discount coupons online cialis coupons
coupons cialis shop.officeexchange.net cialis coupons online
what is naltrexone saveapanda.com naltrexone liver damage
naltrexone success rate s467833690.online.de purchase naltrexone
vivitrol for alcohol does naltrexone block tramadol vivitrol shot for opiate addiction
revia naltrexone partickcurlingclub.co.uk revia for alcoholism
naltrexone capsules click low dose naltrexone drug interactions
गर्मियों में पचमढ़ी आना बन जाता है खास
एक सार्थक अभियान के साथ जुड़ता जन-जन - डॉ. नरोत्तम मिश्र
नर्मदा और सहायक नदियाँ प्रदेश में स्‍थाई परिवर्तन की संवाहक बनी
वर्ष 2016 : घटनाक्रम
आज का सपना कल की हकीकत
सार्वजनिक वितरण प्रणाली हुई सुदृढ़ और असरकारी
लोगों के साथ नगरों का विकास - माया सिंह
प्रदेश की तरक्की में खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग
रंग ला रही है वनवासी कल्याण की दीनदयाल वनांचल सेवा
"नमामि देवी नर्मदे-नर्मदा सेवा यात्रा-2016
शिक्षा के जरिये युवाओं को मिले बेहतर अवसर
खेती-किसानी में समृद्ध होता मध्यप्रदेश - गौरीशंकर बिसेन
नव स्वास्थ्य की भोर
प्रदेश में सड़क निर्माण के बेमिसाल 11 साल
उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना हुआ साकार
बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण शांति का टापू बना मध्यप्रदेश
जल-वायु स्वच्छता के महती प्रयास
मध्यप्रदेश में कला-संस्कृति की समृद्ध परंपरा को दिया गया विस्तार
तकनीकी शिक्षा सुविधाओं में हुई उल्लेखनीय वृद्धि
शासकीय सेवकों को दक्ष और सक्षम बनाती प्रशासन अकादमी
शिल्पी, बुनकर, कारीगर उत्थान और प्रदेश के हस्तशिल्प-हथकरघा वस्त्रों को नयी पहचान
चिकित्सा शिक्षा में विस्तार और सुधारों से जनता को मिला बेहतर इलाज
स्वाधीनता के संघर्ष और शहीदों की प्रेरक गाथाओं को उद्घाटित करने में अव्वल मध्यप्रदेश
युवाओं द्वारा पौने तीन लाख से ज्यादा सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्यम स्थापित
मछली-पालन बना रोजगार का सशक्त जरिया
बिजली संकट को दूर कर प्रकाशवान बना मध्यप्रदेश
आई.टी. के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने नई नीति जारी
पशुधन संवर्धन और दूध उत्पादन में लम्बी छलांग
धरती का श्रंगार ही नहीं रोजगार का साधन भी हैं मध्य प्रदेश के वन
मध्यप्रदेश में सुशासन महज जुमला नहीं हकीकत
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10