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जन-कल्याण के 11 वर्ष

पहली बार किसानोन्मुखी बनी सरकार

किसानों के हित में उठाये प्रभावी कदम

भोपाल : सोमवार, नवम्बर 28, 2016, 16:24 IST
 

राज्य सरकार द्वारा गत 11 वर्ष में किसानों को जमीन संबंधी सभी अभिलेख समय-सीमा में उपलब्ध करवाने और प्राकृतिक आपदा में ज्यादा से ज्यादा मदद की मंशा से अनेक प्रभावी कदम उठाये गये हैं। उल्लेखनीय बात इस अवधि में यह रही कि राज्य सरकार पहली बार किसानोन्मुखी बनी। राज्य सरकार ने जमीन संबंधी अधिकांश अभिलेख कम्प्यूटरीकृत करने के साथ ही ऑनलाइन उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की। सरकार की मंशा है कि किसानों को जरूरी अभिलेखों के लिये तहसील के चक्कर नहीं काटने पड़ें।

मध्यप्रदेश में भूमि-स्वामी एवं बँटाईदार के हितों का संरक्षण विधेयक-2016 पारित किया गया। इससे अलाभप्रद छोटी जोतों को लाभप्रद बनाने तथा भू-स्वामियों की भूमि को अवैध कब्जे से बचाने में सहूलियत होगी।

राजस्व न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण

प्रदेश के राजस्व न्यायालयों के कामां में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा तेजी लाने के उद्देश्य से उनका कम्प्यूटरीकरण किया गया है। इससे तहसील से कलेक्ट्रेट तक सभी राजस्व प्रकरणों को ऑनलाइन प्राप्त करने के साथ ही निराकरण की स्थिति भी जानी जा सकेगी।

डिजिटाइजेशन

प्रदेश में अभी तक 53 हजार 480 ग्राम की एक लाख 34 हजार 104 मेपशीट का डिजिटाइजेशन हो चुका है। कम्प्यूटराइज्ड खसरा डाटा एवं डिजिटाइज्ड नक्शे की लिंकिंग हो चुकी है। लिंक्ड डाटा राजस्व विभाग की वेबसाइट www.landrecords.mp.gov.in पर उपलब्ध है। डिजिटाइज्ड नक्शे एवं खसरे की कम्प्यूटराइज्ड प्रतिलिपि माँगे जाने पर किसानों को उपलब्ध करवायी जा रही हैं। राजस्व अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण वर्ष 2012 में प्रारंभ किया गया। प्रदेश में 55 हजार 393 ग्राम के एक करोड़ 40 लाख भू-धारकों के 4 करोड़ 17 लाख अभिलेख का कम्प्यूटरीकरण किया जा चुका है।

ऑनलाइन नकल

वर्तमान में किसानों को खसरा, नक्शा एवं बी-1 की अद्यतन नकल 21 जिले की 134 तहसील में इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन दी जा रही है। खातेदार पर पड़ने वाले वित्तीय भार को देखते हुए एक पृष्ठ पर उसके सभी खसरों की बी-1 (खतौनी) 30 रुपये में देने का प्रावधान रखा गया है। वेबसाइट www.mpbhulekh.gov.in पर खसरा बी-1 एवं नक्शा की नकल देखने एवं प्रिंट करने का नि:शुल्क प्रावधान है। यथा-समय सुझावों के आधार पर प्रणाली में संशोधन और उसे सरल भी बनाया जायेगा।

वर्ष 2008 में किसानों को 2 करोड़ 91 लाख खसरा एवं बी-1 की प्रति नि:शुल्क उपलब्ध करवायी गईं। इसी तरह वर्ष 2013 में नि:शुल्क्खसरे एवं बी-1 की नकल दी गईं। अगले वर्ष भी खसरें एवं बी-1 की नकल नि:शुल्क्देने का प्रस्ताव है।

अभिलेखों का आधुनिकीकरण

तहसील स्थित अभिलेखागारों का आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 51 जिले की तहसीलों के अभिलेखागारों में पुराने राजस्व अभिलेखों की स्केनिंग, इण्डेक्सिंग, बार-कोडिंग और टेगिंग कर डाक्यूमेंट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर से इनका रिट्रीवल एवं प्रिंट आउट निकालने के लिये जरूरी उपकरण उपलब्ध करवाये गये हैं। श्योपुर, मुरैना, भिण्ड, शिवपुरी, दतिया, भोपाल, सीहोर, रायसेन, होशंगाबाद, हरदा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मण्डला, ग्वालियर, गुना, अलीराजपुर, बुरहानपुर, खण्डवा, अशोकनगर, झाबुआ, अनूपपुर, डिण्डोरी, बड़वानी, बैतूल, खरगोन, छिन्दवाड़ा, इंदौर, दमोह, उमरिया, शाजापुर, नीमच, उज्जैन, सागर, रीवा एवं मंदसौर जिले में काम पूरा हो चुका है। शेष जिलों में कार्य जारी है।

प्रदेश के नगरीय एवं नगरों से इतर क्षेत्र की भूमि का आधुनिक तकनीक से सर्वे कर डिजिटल नक्शा एवं अधिकार अभिलेख तैयार करवाये जाने का काम तीन चरण में करवाया जा रहा है। प्रदेश के 35 जिले की सेटेलाइट इमेजरी खरीदने के आदेश नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, हैदराबाद को दिये गये हैं। इनमें से 18 जिले की सेटेलाइट इमेजरी प्राप्त हो गयी है।

वेबबेस्ड जी.आई.एस. एप्लीकेशन (ई-भूलेख) का उद्देश्य भू-अभिलेखों के सभी डिजिटल डाटा का सुरक्षित भण्डारण, प्रबंधन एवं ऑनलाइन डाटा अद्यतन, नागरिकों को इंटरनेट के जरिये भू-अभिलेख संबंधी सेवाओं का प्रदाय, काश्तकारों को उनकी माँग अनुसार स्मार्ट-कार्ड का प्रदाय और अन्य विभाग के साथ डाटा शेयरिंग है। आगामी 31 दिसम्बर तक सभी जिले में यह काम पूरा करने का लक्ष्य है।

किसानों की सुविधा के लिये पंचायतवार पटवारी हल्कों का पुनर्गठन किया गया है। प्राकृतिक आपदा में राहत पहुँचाने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) का गठन किया गया है।

निजी निवेशकों के लिये भूमि

प्रदेश के विकास के लिये निजी पूँजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये सरकारी दखलरहित भूमि के आवंटन की नीति 30 मई, 2013 को जारी की गयी है। नीति के अंतर्गत लैण्ड बैंक स्थापित किया गया है। इसकी जानकारी वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। इसके साथ ही सामाजिक, सांस्कृतिक एवं परोपकारी गतिविधियों में संलग्न संस्थाओं को भूमि आवंटन के लिये भी 30 अगस्त, 2013 को नीति जारी की गयी है। विभिन्न कम्पनियों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक भूमिगत पाइप लाइन बिछाने के संबंध में 'मध्यप्रदेश भूमिगत पाइप लाइन केबल एवं डक्ट अधिनियम-2012'' लागू किया गया है। इससे जहाँ एक ओर कम्पनियों को भूमिगत पाइन लाइन बिछाने की सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर किसानों को उनकी भूमि का समुचित मुआवजा भी मिल सकेगा।

मध्यप्रदेश लोक-सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम में राजस्व विभाग की 15 सेवाएँ अधिसूचित की गयी हैं। इससे निर्धारित समय में आवेदकों को सेवाएँ मिल रही हैं। इन सेवाओं में शारीरिक अंग हानि पर आर्थिक सहायता, चालू खसरा-खतौनी की प्रतिलिपियों का प्रदाय, चालू नक्शा की प्रतिलिपियों का प्रदाय, भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका का प्रथम बार प्रदाय, भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका की द्वितीय प्रति का प्रदाय, वन्य-प्राणियों से फसल हानि का नुकसान, नजूल अनापत्ति प्रमाण-पत्र, शोध्य क्षमता प्रमाण-पत्र, राजस्व न्यायालयों में प्रचलित प्रकरणों में पारित आदेश की सत्य प्रतिलिपि पक्षकारों को देने, अभिलेख प्रकोष्ठ में जमा भू-अभिलेखों की सत्य प्रतिलिपि प्रदाय करने, राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के अंतर्गत विभिन्न आपदाओं के प्रभावितों को आर्थिक सहायता देने, बँटवारा के आदेश के बाद, अक्स नक्शों में बटांकन तरमीन तथा उसके बाद अक्स नक्शा ए-4 साइज में आवेदक को प्रदाय करने, भूमि का सीमांकन, अविवादित नामांतरण और अविवादित बँटवारा जैसी सेवाएँ शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास ऋण-पुस्तिका

ग्रामों की आबादी का सर्वे कर नक्शा एवं अभिलेख तैयार किये जा रहे हैं। आबादी भूमि-धारकों को मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास ऋण-पुस्तिका दी जायेगी। इससे भूमि-धारक वित्तीय संस्थाओं से ऋण प्राप्त कर सकेंगे। ग्राम पंचायत में एक गौ-शाला के लिये दस एकड़ तक की भूमि एक रुपये के सांकेतिक शुल्क पर आवंटित की जा रही है।

आर्थिक सहायता अधिकार सीमा में वृद्धि

राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड-6 क्रमांक-4 के प्रावधानों के अनुसार प्राकृतिक प्रकोपों एवं विपत्तियों से पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार को आर्थिक सहायता अनुदान स्वीकृत करने के लिये अधिकारियों के वित्तीय अधिकार बढ़ाये गये हैं। अब तहसीलदार को 50 हजार रुपये, उप खण्ड अधिकारी को एक लाख, कलेक्टर को 5 लाख तक और संभागायुक्त को 5 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक अनुदान सहायता स्वीकृत करने के अधिकार दिये गये हैं।

प्राकृतिक विपत्तियों अर्थात तूफान, भूकम्प, बाढ़, अति-वृष्टि, ओला-वृष्टि, भू-स्खलन के साथ ही आकाशीय बिजली गिरने अथवा आग (खलिहान या मकान में आग लगने की दुर्घटना को सम्मिलित करते हुए) से मृत व्यक्ति के निकटतम व्यक्ति/वारिस को 4 लाख रुपये प्रति व्यक्ति की सहायता दी जाती है। हाल ही में लिये गये निर्णय अनुसार अब पानी में डूबने अथवा नाव दुर्घटना से मृत होने पर मृत व्यक्ति के निकटतम व्यक्ति/वारिस को भी 4 लाख रुपये की सहायता दी जायेगी।

इसी तरह सर्प, गुहेरा या जहरीले जन्तु के काटने से अथवा बस या अधिकृत अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नदी या जलाशय में गिरने या पहाड़ी आदि से खड्ड में गिरने के कारण इन वाहनों में सवार व्यक्तियों की मृत्यु होने पर मृत व्यक्ति के परिवार के निकटतम व्यक्ति/वारिस को दी जाने वाली आर्थिक सहायता 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये तक कर दी गयी है। सहायता प्रति व्यक्ति के मान से दी जायेगी। इसमें बच्चा भी शामिल है। शारीरिक अंग हानि के लिये भी आर्थिक अनुदान सहायता का प्रावधान है।

पक्का मकान पूरा नष्ट होने पर पहले 2500 रुपये और अब 95 हजार 100, झुग्गी नष्ट होने पर 6000 और पान के बरेजे नष्ट होने पर पहले 300 से 12000 रुपये और अब 500 से 30,000 रुपये तक दिये जाते हैं। प्राकृतिक प्रकोप से निजी कुएँ या नलकूप आदि की टूट-फूट या धँस जाने पर उसके मालिक को हानि के आकलन के आधार पर 6000 के स्थान पर अब 25 हजार रुपये तक की सहायता दी जायेगी। आग अथवा अन्य प्राकृतिक आपदा से कृषक की बैलगाड़ी अथवा कृषि उपकरण नष्ट हो जाने पर 4000 के स्थान पर अब 10 हजार रुपये की सहायता दी जायेगी। कुम्हारों के ईंट भट्टों एवं मिट्टी के बर्तनों को प्राकृतिक आपदा से क्षति होने पर दी जाने वाली आर्थिक सहायता अब 3000 के स्थान पर 10 हजार रुपये तक की दी जायेगी।

ऐसे छोटे दुकानदारों जिनकी दुकानें अग्नि दुर्घटना या अति वर्षा /बाढ़ के कारण नष्ट हो जाती हैं और उसकी दुकान का बीमा नहीं हो तथा दुकानदार के पास दुकान नष्ट हो जाने पर जीविकोपार्जन के अन्य सभी साधनों से वार्षिक आय एक लाख रुपए तक हो, तो दी जाने वाली सहायता में प्रति दुकानदार 12 हजार रुपए तक की वृद्धि की गयी है। पहले इसमें वार्षिक आय 35 हजार होने पर सहायता राशि 6 हजार रुपए दी जाती थी।

फसल हानि

फसल हानि 25 से 33 प्रतिशत होने पर पहले 2000 से 5000 रुपये और अब 5000 से 15000 रुपये प्रति हेक्टेयर, 33 प्रतिशत से अधिक क्षति पर पहले 3000 से 10,000 रुपये और अब 8000 से 20000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से राहत राशि दी जाती है।

बैल, भैंस और घोड़ा की मृत्यु पर वर्ष 2006 में 1800 रुपये और अब 30000 रुपये दिये जाते हैं। गाय की मृत्यु पर पहले के 1800 रुपये की तुलना में अब 25000 रुपये की राहत राशि दी जाती है। मुर्गे की मृत्यु पर वर्ष 1992 में 15 रुपये, वर्ष 2006 में 40 वर्ष और वर्ष 2015 से 60 रुपये प्रति मुर्गे की दर से सहायता दी जाती है।

राहत राशि में वृद्धि के अनुरूप राजस्व विभाग का बजट भी बढ़ा है। वर्ष 2005-06 में कुल बजट प्रावधान 577 करोड़ का था जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 3828.97 करोड़ का हो गया है।

इन योजनाओं में हम देश में अव्वल

प्रदेश में ऐसी कई योजनाएँ बनायी गयी हैं, जिनमें हम देश में नम्बर-1 हैं। इनमें- लोक सेवा गारंटी अधिनियम-2010 में शामिल सेवाएँ, मध्यप्रदेश भूमिगत पाइप लाइन, केबल एवं डक्ट अधिनियम-2012, कम्प्यूटर खसरा एवं बी-1 वेबसाइट पर डालने का कार्य और मध्यप्रदेश भूमि-स्वामी एवं बँटाईदार के हितों का संरक्षण विधेयक-2016 शामिल हैं। भारत सरकार ने इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार की सराहना की है।

 
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