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जन-कल्याण के 11 वर्ष

शिक्षा के जरिये युवाओं को मिले बेहतर अवसर

प्रदेश में स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में आया बदलाव

भोपाल : सोमवार, दिसम्बर 12, 2016, 18:34 IST
 

मध्यप्रदेश में पिछले 11 वर्ष में स्कूल शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की तरफ विशेष ध्यान दिया गया है। इसका असर यह हुआ है कि मध्यप्रदेश के युवाओं को उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययन करने के बेहतर अवसर मिले हैं। मध्यप्रदेश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विभिन्नता की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए शिक्षा के क्षेत्र के विकास के लिये प्रभावी प्रयास किये गये हैं। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के जरिये प्रायवेट स्कूलों में वंचित वर्ग के बच्चों के लिये न्यूनतम 25 प्रतिशत सीट पर प्रवेश सुनिश्चित किया गया है। अब तक करीब 8 लाख 60 हजार बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाया गया है। प्रदेश का हर बच्चा स्कूल जा सके, इसके लिये प्रतिवर्ष जन-भागीदारी के माध्यम से स्कूल चलें हम अभियान को व्यापक जन-आंदोलन का रूप दिया गया है।

शाला त्याग दर में 15 फीसदी की हुई कमी

प्रदेश में वर्ष 2005 में प्राथमिक-स्तर पर शाला त्याग दर 21.4 प्रतिशत थी, जो घटकर वर्ष 2015-16 में 6.1 प्रतिशत रह गयी। माध्यमिक-स्तर पर शाला त्याग दर में भी कमी आयी है। वर्ष 2005 में यह दर 21.5 प्रतिशत हुआ करती थी, जो वर्ष 2015-16 में घटकर 9.5 प्रतिशत रह गयी। इसका प्रमुख कारण स्कूल चलें हम अभियान रहा। अभियान की सफलता के लिये गाँव-गाँव तक 75 हजार प्रेरक को जोड़ा गया। प्रदेश में कक्षा एक से 5 तक के 83 हजार 890 प्राथमिक, 30 हजार 341 माध्यमिक शाला, 4751 हाई स्कूल और 3756 हायर सेकेण्डरी स्कूल सरकारी स्तर पर संचालित किये जा रहे हैं। करीब 34 हजार विद्यालय निजी क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं।

प्रोत्साहन योजना

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चे मन लगाकर पढ़ सकें, इसके लिये राज्य सरकार ने अनेक प्रोत्साहन योजनाओं की शुरूआत की। नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तक योजना में कक्षा एक से 12 तक सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध करवायी जा रही हैं। पिछले 11 वर्ष में करीब 11 करोड़ बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध करवायी गयीं। नि:शुल्क साइकिल योजना में कक्षा 9 में पढ़ने वाले ऐसे छात्रों, जिनके गाँव में स्कूल नहीं है, उन्हें साइकिल उपलब्ध करवायी गयी। ऐसे छात्र, जो कक्षा 5 पास कर कक्षा 6 में प्रवेश लेते हैं और उनके गाँव में माध्यमिक शाला नहीं है, तो उन्हें भी स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से साइकिल उपलब्ध करवायी जा रही है। वर्ष 2009-10 से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिये लेपटॉप देने की योजना शुरू की गयी। कक्षा 12 में माध्यमिक शिक्षा मण्डल की बोर्ड परीक्षा में 85 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले बच्चों को लेपटॉप दिये जा रहे हैं। वर्ष 2016 में करीब 17 हजार 900 प्रतिभाशाली बच्चों को लेपटॉप उपलब्ध करवाये गये।

गुणवत्ता सुधार के लिये किये गये कार्य

राज्य में स्कूल शिक्षा गुणवत्ता सुधार की तरफ भी विशेष ध्यान दिया गया है। कक्षा एक और दो में पढ़ाने वाले शिक्षकों को दक्ष करने के लिये विशेष प्रशिक्षण दिलवाया गया। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को नियमित रूप से डाइट के माध्यम से प्रशिक्षण दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। सर्वशिक्षा अभियान में माध्यमिक-स्तर के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिये कम्प्यूटर आधारित प्रशिक्षण दिलवाये जाने के लिये हेड-स्टार्ट कार्यक्रम 3052 शाला में चलाया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से राज्य की करीब 1450 सरकारी माध्यमिक शाला में स्मार्ट क्लास की स्थापना की गयी है। सरकारी स्कूल में विज्ञान विषय में बच्चों की रुचि जागृत करने के लिये 12 हजार 800 मिडिल शालाओं में गणित तथा विज्ञान किट की व्यवस्था की गयी है। सभी प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में लायब्रेरी की स्थापना की गयी है। शिक्षकों की गुणवत्ता के लिये अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के साथ कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है। आईआईएम लखनऊ के सहयोग से शिक्षा प्रशासकों और प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण भी आयोजित किया जा चुका है।

प्रतिभा पर्व

स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता का निरंतर अध्ययन करने के लिये विभाग द्वारा प्रतिभा पर्व कार्यक्रम किया जा रहा है। प्रतिभा पर्व का उद्देश्य स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता की सही स्थिति का आकलन करना और बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों के प्रति शिक्षकों, शिक्षा प्रशासन और जन-प्रतिनिधियों को उत्तरदायी बनाना है। इस कार्यक्रम का मुख्य बिन्दु गुणवत्ता का आकलन थर्ड पार्टी के माध्यम से करवाना है। शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के लिये 'शाला सिद्धि-हमारी शाला ऐसी हो'' कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के जरिये बच्चों को कक्षाओं में भयमुक्त और आनंददायी वातावरण उपलब्ध करवाना है। इसके लिये करीब 3100 संकुल पर स्कूलों का चयन किया गया है। प्रदेश में बच्चे आज के दौर के हिसाब से प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकें, इसके लिये इंगलिश मीडियम की शासकीय शालाओं की शुरूआत भी की गयी है। इसके साथ ही ब्रिटिश काउंसिल के माध्यम से उज्जैन संभाग और सीहोर जिले में शिक्षकों को अंग्रेजी भाषा का प्रशिक्षण दिलवाया गया है। आने वाले दो वर्ष में करीब 50 हजार शिक्षक को इस तरह का प्रशिक्षण दिलवाया जायेगा।

अधोसंरचना विकास

सर्वशिक्षा अभियान में एक लाख 26 हजार 816 अतिरिक्त कक्ष, 27 हजार प्राथमिक शाला, 19 हजार 800 माध्यमिक शाला भवन का निर्माण किया गया। इसके साथ ही 12 हजार 460 हेडमास्टर कक्ष, 18 हजार 650 पेयजल सुविधा और 322 बीआरसी भवन का निर्माण किया गया। विद्युत कनेक्शन विहीन शालाओं में बिजली पहुँचाने के लिये मुख्यमंत्री शाला ज्योति योजना बनायी गयी है। इसके लिये करीब 360 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। राशि जुटाने के भी प्रयास किये गये हैं। नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र में संचालित सरकारी स्कूलों में शौचालयों की सफाई के लिये भी करीब 224 करोड़ की राशि जुटाने की व्यवस्था की गयी है।

स्कूल शिक्षा विभाग में आई.टी. का उपयोग

स्कूल शिक्षा विभाग में गुड गवर्नेंस के लिये इन्फार्मेशन टेक्नालॉजी का उपयोग भी किया जा रहा है। विभाग में एजुकेशन पोर्टल http://www.educationportal.mp.gov.in तैयार किया गया है। एजुकेशन पोर्टल को भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की ओर से सर्वश्रेष्ठ ई-गवर्नेंस का पुरस्कार मिला है। पोर्टल में सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों की वेतन संबंधी जानकारी को कम्प्यूटराइज कर यूनिक कोड तैयार किया गया है। शिक्षकों की समस्याओं एवं शिकायतों का ऑनलाइन पंजीयन और निराकरण की मॉनीटरिंग की व्यवस्था की गयी है। करीब एक लाख 22 हजार शाला प्रबंध समिति के खाते में सीधे राशि ट्रांसफर करने की व्यवस्था भी की गयी है। सभी सरकारी स्कूलों की जीआईएस मेपिंग की गयी है। इस कार्य के लिये मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय-स्तर पर सीएसआई निहिलेंट अवार्ड भी प्राप्त हुआ है। एम शिक्षा मित्र मोबाइल एप तैयार किया गया है। इस एप में छात्रों की स्कालरशिप की स्थिति और शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति की स्थिति के मूल्यांकन की सुविधा है। शिक्षकों और छात्रों को नॉलेज शेयरिंग के लिये नॉलेज हब पोर्टल बनाया गया है। कक्षा एक से बारहवीं तक सभी पाठ्य-पुस्तकें ऑनलाइन की गयी हैं।

छात्रवृत्ति योजना

समेकित छात्रवृत्ति योजना वर्ष 2013-14 में लागू की गयी है। योजना में 8 विभाग की 30 प्रकार की छात्रवृत्ति को शामिल किया गया है। समग्र पोर्टल पर उपलब्ध डाटा की डाइस कोडवार शाला से मेपिंग की जाकर छात्रवृत्ति सीधे छात्रों के खाते में हस्तांतरित की जा रही है। पिछले वर्ष करीब डेढ़ करोड़ छात्रों की छात्रवृत्ति सीधे हस्तांतरित की गयी।

खेल गतिविधि

स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में खेलों के प्रति रुचि जागृत करने के लिये बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करवायी गयी हैं। प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने वर्ष 2015-16 में 115 स्वर्ण, 116 रजत और 119 काँस्य, इस प्रकार कुल 350 पदक राष्ट्रीय-स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में प्राप्त किये हैं। पेसेफिक इंटरनेशनल स्कूल गेम्स एडिलेड (ऑस्ट्रेलिया) में 34 खिलाड़ी ने सहभागिता की है। जिम्नेशियाड अंतर्राष्ट्रीय शालेय प्रतियोगिता, जो तराब जोन तुर्की में हुई थी, में 15 छात्र ने सहभागिता करते हुए 11 पदक हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

 
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