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"नमामि देवी नर्मदे-नर्मदा सेवा यात्रा-2016

भोपाल : मंगलवार, दिसम्बर 20, 2016, 21:22 IST
 

मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी नदी नर्मदा के संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 11 दिसम्बर से नर्मदा के उदगम-स्थल अमरकंटक से 'नमामि देवी नर्मदे''-नर्मदा सेवा यात्रा का शुभारंभ किया गया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा नदी संरक्षण अभियान है, जिसमें साधु-संत, जन-प्रतिनिधि और आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गयी है।

नर्मदा सेवा यात्रा का संचालन 144 दिन में लगभग 200 सदस्यों के कोर-ग्रुप द्वारा अमरकंटक से सोण्डवा (प्रदेश में नर्मदा प्रवाह का अंतिम स्थल) से पुन: अमरकंटक तक की यात्रा के रूप में किया जायेगा। यात्रा के दौरान नर्मदा तटीय क्षेत्र में चिन्हांकित स्थानों पर संगोष्ठी, चौपाल और विविध गतिविधियाँ होंगी, जिनके जरिये जन-समुदाय को नर्मदा नदी के संरक्षण की जरूरत और वानस्पतिक आच्छादन, साफ-सफाई, मिट्टी एवं जल-संरक्षण, प्रदूषण की रोकथाम आदि के बारे में जागरूक किया जायेगा।

नर्मदा नदी देश की प्राचीनतम नदियों में से है, जिसका पौराणिक महत्व भी गंगा नदी के समान माना जाता है। नर्मदा अनूपपुर जिले के अमरकंटक की पहाड़ियों से निकलकर मध्यप्रदेश, महाराष्‍ट्र और गुजरात से होकर करीब 1310 किलोमीटर का प्रवाह-पथ तय कर गुजरात के भरूच के आगे खम्भात की खाड़ी में विलीन हो जाती है। मध्यप्रदेश में नर्मदा का प्रवाह क्षेत्र अमरकंटक (जिला अनूपपुर) से सोण्डवा (जिला अलीराजपुर) तक 1077 किलोमीटर है, जो नर्मदा की कुल लम्बाई का 82.24 प्रतिशत है।

नर्मदा अपनी सहायक नदियों सहित प्रदेश के बहुत बड़े क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल का बारहमासी स्रोत है। नदी का कृषि, पर्यटन और उद्योगों के विकास में अति महत्वपूर्ण योगदान है। इसके तटीय क्षेत्रों में उगाई जाने वाली मुख्य फसलें धान, गन्ना, दाल, तिलहन, आलू, गेहूँ, कपास आदि हैं। नर्मदा तट पर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्यटन-स्थल हैं, जो देश-प्रदेश, विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। नर्मदा नदी का सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, साहित्यिक रूप से काफी महत्व है।

जन-आंदोलन बनाया

नर्मदा नदी देश की अन्य बड़ी नदियों की बनिस्बत साफ है। इसके बावजूद इसमें प्रदूषण न बढ़े, लोग संरक्षण के प्रति जागरूक हों, उसके संसाधनों का समुचित उपयोग हो और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ जल मिले, इसलिये इसके संरक्षण के कार्य को जन-आंदोलन बनाया जा रहा है।

नर्मदा सेवा यात्रा का उद्देश्य टिकाऊ एवं पर्यावरण हितैषी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिये जन-जागृति, प्रदूषण के विभिन्न कारकों की पहचान और रोकथाम, जल-भरण क्षेत्र में जल-संग्रहण के लिये जन-जागरूकता, नदी की पारिस्थितिकी में सुधार के लिये गतिविधियों का चिन्हांकन और उनके क्रियान्वयन में स्थानीय जन-समुदाय की जिम्मेदारी तय करना, मिट्टी के कटाव को रोकने के लिये पौधे लगाना आदि है।

यात्रा की रणनीति

  • यात्रा अमरकंटक से 11 दिसम्बर से शुरू होकर 11 मई, 2017 को अमरकंटक में ही समाप्त होगी।

  • यात्रा का नेतृत्व करने के लिये लगभग 200 विषय-विशेषज्ञों, स्वयंसेवी, समाज-सेवी और जन-प्रतिनिधियों का कोर-ग्रुप बनाया गया है। कोर-ग्रुप के अलावा आमजन भी स्वेच्छा से यात्रा में चिन्हित किसी भी स्थान से शामिल हो सकते हैं।

  • यात्रा मुख्य रूप से पदयात्रा होगी। निर्जन क्षेत्र में वाहन का उपयोग किया जायेगा। इसमें अन्य जिलों से आने वाली उप-यात्राएँ भी जुड़ सकेंगी।

  • यात्रा नर्मदा नदी के जल एवं मिट्टी-संरक्षण, स्वच्छता, प्रदूषण की रोकथाम, जैविक कृषि को बढ़ावा और तटीय क्षेत्रों के संरक्षण पर केन्द्रित है।

  • मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी 16 जिले और 51 विकासखण्ड से होती हुई 1077 किलोमीटर का मार्ग तय करती है। यात्रा अवधि में लगभग 1100 कस्बों तथा ग्रामों के लोगों की सहभागिता होगी। कोर-ग्रुप/यात्रा दल इस अवधि में लगभग 3350 किलोमीटर की यात्रा करेगा।

  • यात्रा उज्जैन, इंदौर, भोपाल, होशंगाबाद और रीवा संभाग के 16 जिले अनूपपुर, डिण्डोरी, मण्डला, सिवनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, हरदा, खण्डवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, धार, देवास, सीहोर और रायसेन जिले से गुजरेगी।

  • यात्रा में विषय-विशेषज्ञों और जन-समुदाय की सहभागिता के लिये वेबसाइट www.namamidevinarmade.mp.gov.in पर पंजीयन की व्यवस्था की गयी है। नर्मदा गीतों के माध्यम से इस यात्रा को विशेष बनाया गया है।

  • चिन्हित कस्बों और गाँव में ग्रामवासियों के सहयोग से चौपालें होंगी, जिनमें कोर-ग्रुप नदी के सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं धार्मिक महत्व की जानकारी देंगे। इनमें प्रदूषण के कारकों, स्रोतों और जीवन के विविध आयामों से संबंधित पर्यावरण संरक्षण की सतत चलने वाली गतिविधियों पर भी चर्चा की जायेगी।

  • कस्बों और गाँव में नर्मदा नदी के संरक्षण पर फिल्में और डाक्यूमेंट्री का प्रदर्शन और प्रचार-प्रसार सामग्री का वितरण होगा। यात्रा में नर्मदा नदी के संरक्षण, समस्या आदि पर गाँववालों द्वारा दिये गये सुझावों का भी संकलन किया जायेगा।

  • सहज रूप से जानकारी देने के लिये स्थानीय कलाकारों के सहयोग से नदी संरक्षण पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।

  • कोर-ग्रुप स्थानीय समुदाय के सहयोग से पौध-रोपण, मृदा एवं जल-संरक्षण, स्वच्छता, जैविक कृषि प्रोत्साहन, प्रदूषण की रोकथाम से संबंधित सांकेतिक गतिविधियाँ भी करेगा।

  • वर्तमान में कचरे के प्रबंधन के लिये प्रचलित विधियों को केन्द्र में रखते हुए नर्मदा नदी के प्रदूषण को कम करने के उपायों पर बल दिया जायेगा।

ईको क्लब विद्यार्थी भी करेंगे सक्रिय भागीदारी

दुनिया के इस सबसे बड़े नदी संरक्षण अभियान में एप्को (पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन) भी भागीदारी कर रहा है। नदी संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिये एप्को ने ईको क्लब शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है, जो विद्यार्थियों के माध्यम से यात्रा के दौरान विभिन्न गतिविधियाँ करेंगे।

नर्मदा सेवा यात्रा के पहले राष्ट्रीय हरित-कोर योजना में ईको क्लब शिक्षकों को नर्मदा नदी का पर्यावरणीय महत्व, जन-सामान्य में जागरूकता लाने के माध्यम जैसे- रैली, नुक्कड़ नाटक, समूह चर्चा आदि, पॉलिथिन के दुष्प्रभाव, उद्योगों-कारखानों से निकलने वाले दूषित जल से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव, सड़नशील एवं पुनर्चक्रित किये जाने वाले कचरे का सही निष्पादन, स्थानीय क्षेत्र की साफ-सफाई एवं व्यक्तिगत स्वच्छता आदि पर जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, हरदा, खण्डवा में एक-दिवसीय जिला-स्तरीय प्रशिक्षण दिया गया है।

प्रशिक्षित शिक्षक अपने विद्यालय में ईको-क्लब छात्रों के माध्यम से नर्मदा यात्रा के दौरान विभिन्न गतिविधियाँ करेंगे। इनमें नर्मदा संरक्षण, प्रदूषण के प्रभाव, कचरा प्रबंधन पर स्लोगन लेखन, स्थानीय रहवासियों में नुक्कड़ नाटक, समूह चर्चा आदि द्वारा उद्योगों-कारखानों से निकलने वाले प्रदूषित जल के कुप्रभाव के प्रति जागरूक करना, सड़नशील एवं पुनर्चक्रित किये जाने वाले कचरे के सही निष्पादन के बारे में लोगों को जागरूक करना शामिल है। इसके अलावा ये विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण की समझाइश देते हुए लोगों को कपड़े और कागज से बने हुए बैग का वितरण करेंगे एवं नर्मदा संरक्षण, पर्यावरणीय उन्नयन और पॉलिथिन के वहिष्कार के लिये लोगों को शपथ दिलवायेंगे।

विद्यार्थी नर्मदा तट पर स्थित शहर-गाँव के लोगों के मध्य संरक्षण पर केन्द्रित समूह चर्चा करेंगे। जन-जागरूकता वाली तख्तियों के साथ रैली निकालेंगे। विद्यार्थी यात्रा के मार्ग में आने वाले मंदिरों के भक्तों को मंदिर परिसर की साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने के साथ स्वच्छता अभियान, मानव श्रंखला, वाद-विवाद, पोस्टर-पेंटिंग आदि प्रतियोगिताओं का भी आयोजन करेंगे।

यात्रा के दौरान एप्को द्वारा समुदाय स्वच्छता, श्रमदान एवं पौध-रोपण कार्यक्रम भी होंगे। इनमें राष्ट्रीय पर्यावरण जागरूकता अभियान से जुड़ी संस्थाएँ भाग लेंगी। एप्को द्वारा 'नदी स्वच्छता कार्यक्रम'' में नदी संरक्षण का सांस्कृतिक महत्व, जलीय चट्टानों के पुनर्भरण में नदी का महत्व, नदी प्रदूषण एवं जल गुणवत्ता, नदियों एवं जन-सामान्य का स्वास्थ्य, घाटों की सफाई एवं नदी के किनारों का विकास, स्थानीय वनस्पति एवं वृक्षारोपण द्वारा नदी का पुनर्जीवीकरण की गतिविधियाँ भी होंगी।

 
आलेख
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