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जन-कल्याण के 11 वर्ष

लोगों के साथ नगरों का विकास - माया सिंह

पहली बार है जब 83 हजार करोड़ खर्च होंगे शहरी क्षेत्र में नागरिकों की सुविधाओं पर

भोपाल : शुक्रवार, दिसम्बर 23, 2016, 19:15 IST
 

नगरीय क्षेत्रों का विकास एक बहुत बड़ी चुनौती 11 वर्ष पहले नई सरकार के सामने थी। मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। शहरों में रहने के बावजूद रहवासी शहरी सुविधाओं से वंचित थे। सरकार बदली तो शहरों के हालात भी बदले। मैं यहाँ कहना चाहूँगी कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में पहली बार विकास की समान नीति अपनायी। उन्होंने जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्रमुखता दी, वहीं शहरी क्षेत्रों को भी सुसज्जित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी इस नीति का ही परिणाम है कि वे आज प्रदेश के अब तक के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं। शहरों के सौंदर्यीकरण से लेकर नागरिक सुविधाओं का विस्तार पिछले 11 वर्ष में 65 वर्ष के मुकाबले भारी है। सड़कें, नाली, सीवेज, ओव्हर-ब्रिज, स्मार्ट-सिटी के बाद अब हम मेट्रो चलाने के प्रयासों में लगे हैं। आज हमारे शहर न केवल सुन्दर बने है, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन जीने का वातावरण मिला है।

यह सब आसान नहीं था। इसके लिये जिस दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता थी, जो हमारे राजनैतिक नेतृत्व में थी। मध्यप्रदेश स्थापना के बाद पहली बार होगा कि अगले तीन वर्ष में शहरी क्षेत्रों के विकास पर 83 हजार करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि खर्च की जायेंगी। इसके जरिये सुनियोजित विकास की ऐसी नींव मध्यप्रदेश के शहरी क्षेत्रों में रखी जायेगी, जो आने वाले कई वर्षों तक नगरों को नियोजित और बेहतर बनाये रखेगी।

पेयजल

शहरी क्षेत्रों में सबसे बड़ी जरूरत यह थी कि लोगों को स्वच्छ और भरपूर पीने का पानी मिले। अमृत योजना और मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना के जरिये सभी नगरीय निकाय में पानी की उपलब्धता के काम हो रहे हैं। इसकी कार्य-योजना तैयार कर ली गयी है। वर्तमान में प्रदेश में 146 निकाय में 1997 करोड़ 49 लाख लागत की योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है। इनमें से 24 का कार्य पूरा हो गया है। इसके जरिये सतही तथा स्थायी जल-स्रोतों से 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जायेगी। जे.एन.एन.यू.आर.एम. योजना में चार बड़े शहर भोपाल, इंदौर, जबलपुर तथा उज्जैन में 2679 करोड़ की 28 परियोजना और यू.आई.ई.बी.एस.एस.एम.टी. योजना में 114 निकाय की 181 परियोजना वर्ष 2000 में स्वीकृत की गयीं, जो पूरी हो चुकी हैं।

अधोसंरचना

बढ़ते शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए शहरों की आधुनिक अधोसंरचनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिये वर्ष 2012-13 में मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास कार्यक्रम शुरू किया गया। योजना में सभी नगरीय निकाय को अधोसंरचना विकास की राशि स्वीकृत की गयी है। मुख्यत: इस योजना में सड़कों का निर्माण प्राथमिकता से किया जा रहा है। इसके लिये 1428 करोड़ की राशि स्वीकृत की गयी। वर्ष 2016-17 में इस योजना में सभी नगरीय निकाय में 1157 किलोमीटर बी.टी. रोड का निर्माण कार्य हाथ में लिया गया है। इसमें से 853 किलोमीटर बी.टी. रोड पूरी हो चुकी है। इसी तरह 474 किलोमीटर सी.सी. रोड बनायी जा रही हैं। इसमें से भी 320 किलोमीटर सी.सी. रोड पूरी हो चुकी है। नगरीय निकायों में 598 किलोमीटर नाला-नाली निर्माण कार्य में से 428 किलोमीटर का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसी तरह 157 किलोमीटर डिवाइडर में से 116 किलोमीटर डिवाइडर का कार्य पूरा हो चुका है। शहरी क्षेत्रों में 445 किलोमीटर फुटपाथ, पाँच सामुदायिक भवन और 22 पार्क का निर्माण, 100 किलोमीटर विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया जा चुका है। साथ ही वर्ष 2016-17 की भी कार्य-योजना बना ली गयी है। अगले वित्त वर्ष में बी.टी. रोड़ 304 किलोमीटर, सी.सी. रोड़ 154 किलोमीटर, नाला-नाली 170 किलोमीटर, डिवाइडर 41 किलोमीटर, फुटपाथ 83 किलोमीटर, पाँच सामुदायिक भवन और 22 पार्क तथा 99 किलोमीटर विद्युतीकरण का कार्य किया जायेगा।

मध्यप्रदेश की अपनी स्मार्ट सिटी परियोजना

मुख्यमंत्री श्री चौहान की मंशा थी कि भारत सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना की तर्ज पर राज्य सरकार की भी ऐसी ही योजना हो। इससे जो शहर भारत सरकार की परियोजना में छूट जाएंगे उन्हें इसमें शामिल किया जा सके। इससे प्रदेश के सभी शहरों का समान रूप से विकास हो सकेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास कार्यक्रम के ‍िद्वतीय चरण में 1800 करोड़ के बजट में 300 करोड़ रुपये स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए रखे गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि शेष बचे शहरों का स्मार्ट सिटी के रूप में चयन उसी प्रकार करवाया जाए जिस तरह भारत सरकार की प्रक्रिया है। नगरीय निकायों के बीच प्रतियोगिता के आधार पर शहर का चयन हो। इस योजना में उन शहरों को भी शामिल किया जाएगा जिनको मुख्यमंत्री ने स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की घोषणा की है।

स्मार्ट सिटी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक महत्वाकांक्षी योजना स्मार्ट सिटी की शुरूआत की है। इस योजना में भारत के 100 शहर शामिल किये गये, जिसमें मध्यप्रदेश के 7 शहर का चयन हुआ है। प्रथम चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और सतना को योजना में शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश ही देश में एकमात्र राज्य है, जहाँ के सर्वाधिक शहर योजना में शामिल किये गये हैं। स्मार्ट सिटी की अवधारणा है कि नागरिकों को बुनियादी सुविधा के साथ स्वच्छ और टिकाऊ पर्यावरण मिले और जीने के लिये उच्च-स्तरीय गुणवत्ता उपलब्ध हो। यह योजना राज्य सरकार और भारत सरकार के 50-50 प्रतिशत के अंशदान से संचालित की जा रही है। योजना में भोपाल, इंदौर तथा जबलपुर शहर की स्पेशल पर्पज व्हीकल कमेटी का गठन किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन और स्वच्छ भारत अभियान

साफ-सफाई लोगों के जीवन का अनिवार्य अंग बने, इसके लिये मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन की शुरूआत की थी। भारत सरकार की स्वच्छ भारत अभियान की अवधारणा में अब इस मिशन का समावेश किया गया है। शौचमुक्त शहर बनाने के लिये व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण तेजी से चल रहा है। प्रदेश में 4 लाख शौचालय में से 2 लाख 23 हजार से अधिक शौचालय का निर्माण हो चुका है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश पूरे देश में इस मामले में तीसरे स्थान पर है। शहर में साफ-सफाई रहे, इसके लिये घर-घर से कचरा संग्रहण के लिये नगरीय निकायों को 955 छोटे कचरा वाहन, 535 साइकिल रिक्शा और 52 कॉम्पेक्टर के लिये अनुदान दिया गया है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जन-निजी भागीदारी से किया जा रहा है। प्रदेश में 4069 वार्ड में घर-घर से कचरा इकट्ठा किया जा रहा है। कटनी और सागर क्लस्टर में पूरे क्षेत्र में घर-घर से कचरा उठाने का कार्य शुरू हो चुका है। भोपाल में करीब 466 करोड़ की कचरे से विद्युत निर्माण की कार्य-योजना बनायी गयी है। इससे 21 मेगावॉट विद्युत का उत्पादन होगा। जबलपुर में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित किया गया है, जिससे 178 करोड़ की 11.5 मेगावॉट विद्युत का उत्पादन शुरू हो गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना

मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने प्रधानमंत्री आवास योजना में 53 शहर का हाउसिंग फॉर ऑल प्लान ऑफ एक्शन भारत सरकार को प्रस्तुत किया है। ग्वालियर शहर का तैयार किया गया एक्शन प्लान भारत सरकार ने देश के सभी राज्य में मॉडल के रूप में मान्य किया है। योजना में वर्ष 2015-2022 के दौरान प्रथम चरण में 74 शहर और द्वितीय चरण में 91 शहर को शामिल किया गया है। भारत सरकार ने प्रस्तुत किये गये 49 शहर की 5584.48 करोड़ की राशि से बनने वाले 59 हजार 61 आवासीय इकाइयों को स्वीकृति प्रदान की है। वर्ष 2018 तक 5 लाख शहरी आवास के निर्माण का कार्य किया जाना है, जिसमें लगभग 20 हजार करोड़ की राशि का निवेश होगा। अभी तक निर्मित आवासों में 30 हजार 176 आवास आवंटित किये जा चुके हैं।

अमृत योजना

भारत सरकार की अमृत (अटल मिशन फॉर रिज्युवेनेशन एण्ड अर्बन ट्रांसफार्मेशन) योजना में पाँच वर्ष के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गयी है, जिनकी लागत 8279.5 करोड़ है। योजना में प्रदेश के 34 शहर के 16 नगर निगम, 17 नगरपालिका और एक नगर परिषद का चयन किया गया है। प्रदेश के दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में केन्द्र शासन 35 प्रतिशत, राज्य शासन द्वारा 50 प्रतिशत एवं नगरीय निकायों द्वारा 17 प्रतिशत का अंशदान दिया जायेगा। योजना में पेयजल के करीब 802 करोड़ के 17 कार्य स्वीकृत किये गये हैं। इसी तरह सीवरेज के 1538 करोड़ से ज्यादा के 13 कार्य को स्वीकृति दी गयी है।

परिवहन

शहरों में बढ़ते यातायात को नियंत्रित करने के लिये भी राज्य सरकार ने सुनियोजित कोशिशें शुरू की हैं। पर्यावरण प्रदूषित न हो और लोक परिवहन का उपयोग नागरिक करें, इसे दृष्टि-पत्र-2018 में मिशन के रूप में शामिल किया गया है। प्रदेश के प्रमुख शहर भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर और उज्जैन नगर के लिये पार्किंग, लोक परिवहन, विज्ञापन और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेव्हलपमेंट मास्टर-प्लान तैयार किया जा रहा है। प्रदेश के चार शहर भोपाल में 225, इंदौर में 175, जबलपुर में 119 और उज्जैन में 89 आधुनिक एवं आरामदायक बस, लोक परिवहन सेवा के जरिये संचालित की जा रही हैं। इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिये डेडीकेटेड अर्बन ट्रांसपोर्ट फण्ड राज्य एवं शहर-स्तर पर बनाया गया है। इसके लिये इस वित्त वर्ष में 48 करोड़ का बजट प्रावधान प्रस्तावित है। लोक परिवहन के लिये 20 नगरीय निकाय में अमृत योजना में प्रस्ताव स्वीकृत किये जा चुके हैं।

मेट्रो रेल परियोजना

नागरिकों को उच्च-स्तरीय लोक परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने और प्रदेश को विश्व परिवहन मानचित्र पर रेखांकित करने के लिये राज्य शासन ने भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल प्रारंभ करने की परियोजना बनायी है। इसकी डीपीआर भारत सरकार को भेजी जा चुकी है। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कम्पनी का गठन हो चुका है। प्रथम चरण में भोपाल में 7000 करोड़ की लागत से 28 किलोमीटर और इंदौर में 8000 करोड़ लागत के 31 किलोमीटर के मार्ग निर्माण की योजना प्रस्तावित है।

समावेशी विकास

समावेशी विकास योजना में शहरी गरीबों को स्व-रोजगार स्थापित करने में मदद दी जा रही है। योजना में करीब डेढ़ लाख हितग्राही को लाभान्वित किया है। कौशल प्रशिक्षण में 4 लाख 11 हजार हितग्राही को प्रशिक्षित किया गया है। योजना में 52 हजार हाथठेला एवं रिक्शा-चालक, 25 हजार 847 पथ पर विक्रय करने वालों, 7,596 केश-शिल्पियों को स्व-रोजगार स्थापना में लाभान्वित किया गया है। घरेलू कामकाजी 52 हजार से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। आवासीय भूमि के पट्टे 87 हजार से ज्यादा भूमिहीन व्यक्ति को दिये गये हैं।

शहरी सुधार कार्यक्रम और ई-प्रशासन

नगरीय निकायों की कार्य-प्रणाली में वित्तीय, प्रशासकीय, ई-गवर्नेंस, सम्पत्ति कर और उपभोक्ता प्रभार में सुधार का काम शहरी सुधार कार्यक्रम में लिया गया है। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी डिजिटल इण्डिया योजना के मद्देनजर प्रदेश के सभी नगरीय निकाय में ई-गवर्नेंस रिफार्म किया जा रहा है। नगर निगमों में अनुज्ञा की प्रक्रिया को सुगम बनाते हुए ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान एप्रूवल सिस्टम लागू किया गया है। इस परियोजना में मैदानी जाँच के लिये मोबाइल एप की सुविधा भी उपलब्ध करवायी गयी है। राज्य-स्तर से 154 नगरीय निकाय में द्वि-प्रविष्टीय लेखा प्रणाली के आधार पर खातों के संधारण का कार्य करवाया जा रहा है।

-प्रशासन स्थापित करने के लिये राज्य-स्तर पर ई-नगरपालिका सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसका पायलेट के तौर पर 7 नगरीय‍निकाय होशंगाबाद, बैरसिया, बुधनी, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और सतना में क्रियान्वयन किया जा चुका है। शेष नगरीय निकाय में चरणबद्ध क्रियान्वयन किया जा रहा है। सभी नगरों में 31 मार्च, 2017 तक इसका क्रियान्वयन पूरा करने का लक्ष्य है। राज्य के 147 नगरीय निकाय में जीआईएस आधारित नक्शे तैयार कर सम्पत्ति कर सुधार का कार्य चल रहा है। यूएस-एमआईएस सॉफ्टवेयर द्वारा प्रदेश में चल रही सभी नगरीय परियोजना की मॉनीटरिंग की जा रही है।

सभी नगरीय निकाय में स्थापित किये गये फायर ब्रिगेड

पिछले 11 वर्ष में मुख्यमंत्री की घोषणा के पालन में फायर ब्रिगेड इकाई को सभी नगरीय निकाय में सुदृढ़ बनाया गया है।

यह पहली बार है कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सुनियोजित विकास की चहुँमुखी परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। राज्य सरकार की योजनाओं के साथ ही केन्द्र की योजनाओं का लाभ शहर में रहने वाले नागरिकों को मिले, उनके जीवन-स्तर में सुधार हो और वे बेहतर पर्यावरण के बीच मूलभूत सुविधाओं का उपभोग करते हुए जीवन-यापन करें, यह सरकार का संकल्प है।

 
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