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जन-कल्याण के 11 वर्ष

सार्वजनिक वितरण प्रणाली हुई सुदृढ़ और असरकारी

भोपाल : मंगलवार, दिसम्बर 27, 2016, 18:34 IST
 

मध्यप्रदेश में पिछले 11 वर्ष सार्वजनिक वितरण प्रणाली की वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के साथ समर्थन मूल्य पर गेहूँ-धान आदि के व्यवस्थित उपार्जन को समर्पित रहे हैं। इसके अलावा इस अरसे में प्रदेश की भण्डारण क्षमता में वृद्धि के स्टील सायलो जैसे सफल प्रयास, ई-उपार्जन, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के सफल क्रियान्वयन, अपनी सुविधा-अपना राशन जैसी व्यवस्था, पीडीएस को पारदर्शी और ई-उपकरणों से लैस बनाने जैसे कदमों से मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर जाना गया।

ग्यारह साल में तीन गुना हुआ गेहूँ का उपार्जन

राज्य सरकार द्वारा किसानों को उनकी फसल का अधिकतम दाम देने, कृषि और कृषि उत्पादन में आई क्रांति का परिणाम उपार्जन में हुई तीन गुना वृद्धि के रूप में सामने आया है। किसानों द्वारा वर्ष 2004 में तीन लाख 14 हजार 611 मीट्रिक टन गेहूँ समर्थन मूल्य खरीदी केन्द्र पर दिया गया था। वर्ष 2016-17 में 49 लाख 91 हजार 661 मीट्रिक टन गेहूँ किसानों ने समर्थन मूल्य पर विक्रय किया। उपार्जन में यह वृद्धि 2004-05 से लगातार बढ़ती गई। इसी तरह द्यान के उपार्जन में भी वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2004-05 में 53 हजार 832 मीट्रिक टन द्यान का समर्थन मूल्य खरीदी केन्द्र पर उपार्जन हुआ था जो 2015-16 में बढ़कर 12 लाख 65 हजार 309 मीट्रिक टन हो गया। राज्य सरकार द्वारा ई-उपार्जन में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई। इससे किसानों के हितों की सुरक्षा और उनकी उपज के बाजार दर से ज्यादा दाम दिलाने में सफलता मिली है।

ई-उपार्जन

ई-उपार्जन की व्यवस्था बेहतर ढंग से अपनाने के लिए प्रदेश को भारत सरकार के आई टी विभाग से 2011-12 का 'बेस्ट आई.टी. मॉसेस प्रोजेक्ट इम्पलीमेंटेशन अवार्ड'', कम्प्यूटर सोसायटी आफ इंडिया का 2011-12 का सीएसआई निहिलेन्ट ई-गवर्नेंस अवार्ड और 2013 में लेनेवो नेस्कॉम और सीएनवीसी टीवी 18 का हॉरिजेन्टल कैटेगरी में 'बेस्ट गव्हर्नमेन्ट प्रोजेक्ट इन सोशल इन्क्लूजन'', आदि अवार्ड प्राप्त हुए हैं। आई टी से अधिक जनोन्मुखी, अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और गतिशील उपार्जन व्यवस्था को बनाने में राज्य सरकार ने कामयाबी दर्ज की है।

पीपीपी मॉडल पर बनाए गए स्टील सायलो ने प्रदेश को दुनिया में पहचान दिलाई। प्रदेश में इन्दौर, उज्जैन, देवास, भोपाल, विदिशा, सीहोर, हरदा, होशंगाबाद और सतना जिलों में 9 स्थान पर 4 लाख 50 हजार मीट्रिक टन क्षमता के स्टील सायलो प्रोजेक्ट भारत में पहली बार पीपीपी माडल पर स्थापित किये गये हैं। प्रदेश के इस कदम को देश और विदेश में सराहा गया है। इसका दूसरे राज्य भी अनुसरण कर रहे हैं। खाद्यान्न भंडारण के लिए यह बेहतर उपाय है। प्रदेश को इसके लिए चौथा 'राष्ट्रीय टेक्नोलॉजी इनोवेशन इन 2013-14'' अवार्ड प्राप्त हुआ है। प्रदेश में अब उपार्जित खाद्यान्न के भंडारण की कोई समस्या नहीं है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का सफल क्रियान्वयन

प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 का सफल क्रियान्वयन किया गया है । वर्ष 2014 में 92 लाख परिवार के 3 करोड़ 88 लाख व्यक्ति को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली से एक रूपये प्रति किलोग्राम खाद्यान्न, एक रूपये प्रति किलोग्राम नमक और 13.5 रूपये प्रति किलोग्राम शक्कर का वितरण शुरू किया गया। इन परिवारों की संख्या में हर माह वृद्धि हुई और नवम्बर 2016 की स्थिति में 72 लाख से बढ़कर 118 लाख 21 हजार परिवार और व्यक्तियों की संख्या 3 करोड़ 88 लाख से बढ़कर 5 करोड़ 50 लाख हो गई। अधिनियम के अंतर्गत मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में रियायती दर पर खाद्यान्न का लाभ दिए जाने के लिए राज्य सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा पर्व नाम से विशेष अभियान चलाया गया। पर्व के दौरान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों से घर-घर जाकर घोषणा-पत्र भरवाये गये।

सामग्री के अपव्यय को रोकने के लिये किए गए इंतजाम

सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सामग्री के अपव्यय को रोकने के लिए समय-समय पर इंतजाम किए गए। उपभोक्ताओं की सुविधा की दृष्टि से यह व्यवस्था की गई कि राशनकार्ड धारक किसी माह के दौरान उस माह की पात्रतानुसार सामग्री का क्रय नहीं करता है, तो वह ऐसी शेष सामग्री अगले माह प्राप्त कर सकेगा। उचित मूल्य दुकानों को दो माह तक वितरण के बाद शेष रही सामग्री का आगामी माह के आवंटन में समायोजन कर आवंटन करने की व्यवस्था की गई है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली से महिला सशक्तिकरण

प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से महिलाओं को सशक्त करने के कदम भी उठाए गए हैं। प्रदेश की एक तिहाई उचित मूल्य दुकानों को संचालन के लिए महिलाओं की संस्थाओं को आवंटित करने का प्रावधान किया गया। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में परिवार की महिला मुखिया को नि:शुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध करवाया जा रहा है।

पारदर्शी और ई उपकरण के साथ सशक्त पीडीएस व्यवस्था

प्रदेश में पीडीएस की दुकानों को शेड निर्माण और अन्य जरूरी सुविधाओं से लैस करने के बाद इन दुकानों में इलेक्ट्रानिक तौल काँटा और पीओएस मशीन लगाई गई है। इलेक्ट्रानिक तौल काँटे से जहाँ शुद्ध तौल और पीओएस मशीन के माध्यम से वास्तविक हितग्राही को राशन उपलब्ध करवाने की व्यवस्था कायम हुई है।

अपनी सुविधा-अपना राशन (असर व्यवस्था)

ऑन लाईन असर व्यवस्था को प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया है। प्रथम चरण में भोपाल, इंदौर और खंडवा जिलों के नगर निगम क्षेत्रों में इस व्यवस्था को लागू किया गया है। भविष्य में इसे अन्य नगरीय क्षेत्रों में लागू किया जायेगा। इस व्यवस्था में पात्र परिवारों का संपूर्ण डाटा सेन्ट्रल सर्वर पर उपलब्ध रहता है। उचित मूल्य दुकान से वितरण की जाने वाली सामग्री की जानकारी आनलाईन अपडेट होती है। जिन पात्र परिवारों के आधार नंबर डाटा बेस में उपलब्ध है, उसे नगर की किसी भी उचित मूल्य दुकान से जहाँ पर यह सेवा क्रियान्वित हो रही है, राशन लेने की सुविधा होती है। लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के एंड टू एंड कम्युनिकेशन के तहत खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा ट्रांसपेरेंसी पोर्टल की स्थापना की गई है। इस पोर्टल पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली संबंधी सभी जानकारी, जिसमें प्रदेश के कुल हितग्राहियों की संख्या श्रेणीवार, हितग्राहियों की पात्रता, परिवार सदस्य संख्या, उचित मूल्य दुकानवार, स्थानीय निकायवार, जिलेवार, मासिक आवंटन, पीओएस मशीन से किए गए वितरण और स्टॉक आदि, पब्लिक डोमेन में की गई है। बेहतर ट्रांसपेरेंसी का यह आदर्श उदाहरण है।

पीडीएस प्रणाली को आधार अथेंटिकेशन आधारित बनाया गया है। प्रदेश की सभी 22 हजार 409 उचित मूल्य दुकानों पर पीओएस मशीनें लगाई गई हैं। इनमें पात्र परिवारों के डाटाबेस में न्यूनतम एक सदस्य की आधार सीडिंग भी की जा चुकी है। पात्र परिवारों की पहचान बायो-मेट्रिक के आधार पर की जाकर राशन वितरण की व्यवस्था लागू की जा रही है। पहले चरण में इन्दौर, भोपाल और खंडवा से यह व्यवस्था शुरू कर दी गई है। प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में कम से कम एक राशन दुकान स्थापित करने की योजना भी अंतिम चरण में है। इस तरह प्रदेश में राशन वितरण व्यवस्था पारदर्शी और उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुविधानुकूल बनाने के लिये राज्य सरकार ने हर संभव प्रयास किए हैं और कर रही है।

 
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