आलेख

नर्मदा और सहायक नदियाँ प्रदेश में स्‍थाई परिवर्तन की संवाहक बनी

भोपाल : गुरूवार, फरवरी 16, 2017, 14:29 IST
 

नर्मदा और उसकी सहायक नदियों में उपलब्‍ध जल राशि का विकास में उपयोग करने के लिये पिछले 11 वर्षों में जो योजनाबद्ध प्रयास हुए उनसे नर्मदा और उसकी सहायक नदियाँ मध्‍यप्रदेश के एक बडे भू-भाग में स्‍थाई परिवर्तन की संवाहक बनी है। उल्लेखनीय है कि मध्‍यप्रदेश की जीवन-रेखा नर्मदा प्रदेश के अनुपपूर जिले में अमरकण्‍टक पर्वत माला से निकलकर मध्‍यप्रदेश की सीमा तक 1077 किलोमीटर प्रवाहित होती है। प्रदेश के 16 जिले इसके प्रवाह क्षेत्र में आते हैं। मध्‍यप्रदेश में अपनी यात्रा में 39 प्रमुख सहायक नदियाँ नर्मदा से मिलती हैं।

अमरकण्‍टक से निकलने के बाद नर्मदा के मुख्‍य प्रवाह पर रानी अवंतीबाई सागर परियोजना बांध निर्मित है। बांध की बाँयी मुख्‍य नहर से जबलपुर तथा नरसिंहपुर जिले में 1 लाख 57 हजार हेक्‍टेयर रकबा सिंचित होगा। वर्तमान में 1 लाख 20 हजार हेक्‍टेयर क्षेत्र सिंचित हो रहा है। बांध की दाँयी मुख्‍य नहर से जबलपुर, कटनी, रीवा और सतना जिलों में 2 लाख 45 हजार हेक्‍टेयर क्षेत्र सिंचित होगा। सिंचाई का यह विस्‍तार इन जिलों में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की ओर अग्रसर है। परियोजना जलाशय मछली उत्‍पादन के स्‍थाई लाभ के साथ ही 100 मेगावाट बिजली उत्‍पादन का लाभ भी दे रहा है। जलाशय से 175 मीट्रिक टन औसत मछली उत्‍पादन हो रहा है।

मुख्‍य नदी पर इसके आगे चिंकी सिंचाई योजना का निर्माण होगा। चिंकी उद्वहन प्रणाली रायसेन और नरसिंहपुर जिलों में 1 लाख 4 हजार हेक्‍टेयर कृषि रकबा सिंचित करेगी। चिंकी उद्वहन प्रणाली के आगे नर्मदा का प्रमुख इंदिरा सागर बांध जलाशय निर्मित है। इस विशाल जलाशय की जलसंग्रह क्षमता 12.2 अरब घनमीटर है। इंदिरा सागर परियोजना से खरगोन, खण्‍डवा और बड़वानी जिलों का करीब सवा लाख हेक्‍टेयर रकबा सिंचित होगा। वर्तमान में मुख्‍य नहर से एक लाख हेक्‍टेयर से अधिक रकबा सिंचित हो रहा है। जलाशय से प्रति वर्ष औसतन 2 हजार 300 मीट्रिक टन मछली उत्‍पादन के साथ ही 1000 मेगावाट बिजली उत्‍पादन किया जा रहा है।

इंदिरा सागर जलाशय के बाद नर्मदा पर ओंकारेश्‍वर परियोजना बांध जलाशय निर्मित है। परियोजना से 1 लाख 48 हजार हेक्‍टेयर सिंचाई क्षमता खरगोन, धार तथा खण्‍डवा जिलों में निर्मित होगी। वर्तमान में एक लाख हेक्‍टेयर रकबा सिंचित हो रहा है। जलाशय से 520 मेगावाट बिजली उत्‍पादन के साथ ही प्रति वर्ष औसतन 12 मीट्रिक टन मछली उत्‍पादन हो रहा है। ओंकारेश्‍वर के बाद 400 मेगावाट बिजली उत्‍पादन क्षमता की महेश्‍वर जल विद्युत उत्‍पादन योजना बनकर तैयार है।

12 सहायक नदियों पर भी योजनाएँ निर्माणाधीन

अमरकण्‍टक से उदगम के बाद नर्मदा से मिलने वाली मुख्‍य सहायक नदी हालोन पर मण्‍डला जिले में हालोन सिंचाई बांध परियोजना निर्माणाधीन है। इससे मण्‍डला जिले में 13 हजार हेक्‍टेयर कृषि रकबा सिंचित होगा। इसके आगे मण्‍डला जिले में ही नर्मदा की सहायक मटियारी नदी पर मटियारी योजना 10 हजार 120 हेक्‍टेयर सिंचाई का लाभ दे रही है। इसके आगे नर्मदा की सहायक शक्‍कर नदी पर प्रस्‍तावित योजना नरसिंहपुर छिन्‍दवाड़ा जिलों को 64 हजार 700 हेक्‍टेयर सिंचाई का लाभ देगी। इसके आगे नर्मदा से मिलने वाली बारना नदी पर निर्मित बांध जलाशय रायसेन तथा सीहोर जिलों में 60 हजार हेक्‍टेयर रकबा सिंचित कर रहा है। अगले पड़ाव पर होशंगाबाद जिले में नर्मदा की सहायक दूधी नदी पर 50 हजार हेक्‍टेयर क्षमता की सिंचाई योजना प्रस्‍तावित है। इसके आगे सीहोर जिले में 33 हजार हेक्‍टेयर सिंचाई क्षमता की सहायक नदी कोलार पर होशंगाबाद, हरदा जिलों में 2 लाख 42 हजार हेक्‍टेयर सिंचाई क्षमता की तवा परियोजना लाभ दे रही है। होशंगाबाद जिले में ही नर्मदा की सहायक मोरण्‍ड और गंजाल नदियों पर 52 हजार हेक्‍टेयर कमाण्‍ड क्षेत्र निर्मित करने वाली सिंचाई योजनाओं का निर्माण होगा।

सहायक नदियों के जल उपयोग के क्रम में सुक्‍ता नदी पर निर्मित सिंचाई योजना खण्‍डवा जिले में 16 हजार हेक्‍टेयर रकबा सिंचित कर रही है। वहीं खरगोन जिले में नर्मदा की सहायक बेदा नदी पर निर्मित परियोजना से 10 हजार हेक्‍टेयर सिंचाई का लाभ मिल रहा है। मध्‍यप्रदेश में नर्मदा प्रवाह के अंतिम भाग पर मिलने वाली सहायक नदी मान पर 15 हजार हेक्‍टेयर तथा जोबट पर 10 हजार हेक्‍टेयर क्षमता की योजनाएँ आदिवासी बहुल धार जिले को लाभ दे रही हैं। मध्‍यप्रदेश की सीमा के अंदर सहायक नदी गोई पर सिंचाई परियोजना पूर्णता की ओर है। इससे बड़वानी जिले में 13 हजार हेक्‍टेयर रकबा सिंचित होगा।

नर्मदा जल उपयोग के नवाचारी प्रयास

नर्मदा जल के उपयोग की नवाचारी प्रयासों के अंतर्गत ओंकारेश्‍वर जलाशय की नहर प्रणाली से जल उद्वहन कर नर्मदा-क्षिप्रा-सिंहस्‍थ लिंक योजना पूर्ण करने के बाद इन्‍दौर और उज्‍जैन जिलों में 50 हजार हेक्‍टेयर सिंचाई क्षमता की नर्मदा-मालवा-गम्‍भीर लिंक योजना का कार्य जारी है। इसी क्रम में नर्मदा-कालीसिंध और नर्मदा-पार्वती लिंक योजनाएँ भी प्रस्‍तावित हैं। इंदिरासागर मुख्‍य नहर से जल उद्वहन कर 15 उद्वहन माईक्रो सिंचाई योजनाओं का क्रमबद्ध निर्माण आरम्‍भ किया गया है। इनसे आने वाले समय में खरगोन, खण्‍डवा, अलीराजपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, सीहोर, देवास, इन्‍दौर और कटनी जिलों में 3 लाख 61 हजार सिंचाई क्षमता निर्मित होगी।

नर्मदा जल पेयजल और उद्योगों के विकास का स्थायी समाधान बना

मध्‍यप्रदेश में नर्मदा और उसकी सहायक नदियां सिंचाई क्षेत्र के अभूतपूर्व विस्‍तार और कृषि उत्‍पादन के साथ ही पेयजल और उद्योगों के विकास का स्‍थाई समाधान बन रही है। वर्तमान में नर्मदा घाटी के 29 बडे़ और मध्‍यम नगरों को एक हजार मिलियन लीटर पेयजल प्रदाय हो रहा है। खण्‍डवा, खरगोन, बडवानी, धार, इन्‍दौर, देवास, उज्‍जैन अंचल के उद्योगों को लाभ मिल रहा है। कुल मिलाकर 1.50 मिलियन एकड़ फीट जल का उपयोग पेयजल और उद्योग क्षेत्र में किया जायेगा। नर्मदा और उसकी सहायक नदियों पर निर्मित बांध जलाशयों में मछली उत्‍पादन राजस्‍व की प्राप्‍ति का बड़ा स्‍त्रोत होगा।

नर्मदा सिंचाई योजनाओं से खाद्यान्न उत्पादन में 150 से 200 लाख मी. टन की वृद्धि

एक अनुमान के अनुसार मध्‍यप्रदेश में नर्मदा घाटी सिंचाई योजनाओं से आने वाले समय में वर्तमान की तुलना में 150 से 200 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्‍त खाद्यान्‍न उत्‍पन्‍न होने लगेगा। इससे प्रदेश की कृषि अर्थ-व्‍यवस्‍था नई ऊँचाइयों पर पहुँचेगी और मध्‍यप्रदेश मानव विकास संकेतकों के अपेक्षित बिन्‍दुओं को छूते हुए देश के सकल घरेलु उत्‍पाद में महत्‍वपूर्ण योगदान देगा। नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से वर्ष 2024 तक 19 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई लेने की योजना है। इससे लगभग 20 हजार करोड़ रूपये रबी फसल का उत्‍पादन होगा। अभी लगभग 5 हजार करोड़ रूपये की रबी फसल का उत्‍पादन हो रहा है।


दुर्गेश रायकवार
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