आलेख
"नमामि देवि नर्मदे"-सेवा यात्रा

एक सार्थक अभियान के साथ जुड़ता जन-जन - डॉ. नरोत्तम मिश्र

भोपाल : मंगलवार, मार्च 28, 2017, 21:03 IST
 

हाल ही मे मैं सीहोर जिले के जैत गाँव में पहुँचा। अवसर था 'नमामि देवि नर्मदे'-सेवा यात्रा के दौरान नर्मदा तट पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का। ग्राम में जनता में काफी उत्साह दिखा। करीब तीन किलोमीटर की पदयात्रा में मुख्यमंत्री श्री चौहान के साथ यह उत्साह दिखाई दिया। आसपास के ग्रामों की बालिकाएँ और महिलाएँ सिर पर कलश रखे चल रही थीं। इनके उत्साहवर्धन के लिए 'नमामि देवि नर्मदे''-सेवा यात्रा के कार्यकर्ता गुलाब की पंखुड़ियों से उनका स्वागत कर रहे थे। मेरे साथ सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री नंदकुमार सिंह चौहान, संगठन महामंत्री श्री सुहास भगत जी और बहुत से और जन-प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए। हम सभी ने जनता के बीच किसी यात्रा के असल आनंद का अनुभव किया। जैत गाँव के नर्मदा घाट पर की गई विद्युत सजावट उज्जैन के कुंभ मेले की याद दिला रही थी।

नर्मदा यात्रा, दरअसल दुनिया का सबसे बड़ा नदी संरक्षण अभियान है। देश में अभी तक किसी भी मुख्यमंत्री की अगुवाई में ऐसा अभियान नहीं चलाया गया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर सौ दिन पूरे कर चुकी नर्मदा के शुद्धिकरण और संरक्षण की नर्मदा सेवा यात्रा को अपार जन-समर्थन मिल रहा है। इसमें सभी धर्म और समुदाय के लोग आगे बढ़कर भाग ले रहे हैं और नर्मदा मैया के संरक्षण के साथ ही शुद्धिकरण के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। यात्रा एक जन-आंदोलन के रूप में उभर कर आ रही है। यात्रा में साधु-संत, मौलवी, मौलाना सहित खेल और फिल्म जगत के अलावा सामाजिक क्षेत्र की महान हस्तियों ने सहयोग देने की बात कही है। इन वर्गों ने यात्रा में शामिल होकर ऐसा सहयोग दिया भी है। कहते हैं कि नर्मदा मैया के दर्शन मात्र से मुक्ति मिल जाती है। कहा भी गया है कि गंगा माँ के जलपान, यमुना के स्नान और नर्मदा मैय्या के दर्शन से मनुष्य पवित्र हो जाता है। इस यात्रा े हमारे मध्यप्रदेश को हरा-भरा रखने का संकल्प भी पूरा होगा। हम जानते ही हैं कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नर्मदा सेवा यात्रा का शुभारम्भ नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से 11 दिसम्बर 2016 को शुरू किया था। तकरीबन साढ़े तीन हजार किलोमीटर की यात्रा 11 मई 2017 को अमरकंटक में ही सम्पन्न भी होगी।

यात्रा बहुत लम्बी है। कुल 3334 किलोमीटर लम्बी। नर्मदा विश्व की यह एकमात्र ऐसी नदी है, जिसकी परिक्रमा की जाती है। आपको मध्यप्रदेश की इस पावन नर्मदा मैया के बारे में यह भी बताना चाहता हूँ कि अनेक धर्म ग्रंथों में नर्मदा जी का माहात्मय वर्णन मिलता है। नर्मदा जी की कई प्रार्थनाएँ, आरतियाँ और भजन रचे गए हैं। मध्यप्रदेश के निवासी नर्मदा मैया के प्रति विशेष सम्मान और आस्था का भाव रखते हैं।

नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवन-रेखा है। अनूपपुर जिले के अमरकंटक से निकलकर गुजरात में खम्भात की खाड़ी तक इसकी यात्रा तय होती है। दिनांक 11 दिसम्बर 2016 से अमरकंटक से नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा शुरू हुई है। यह मध्यप्रदेश के नर्मदा तटीय जिलों से निकल रही है। यात्रा का शुभारंभ बहुत आध्यात्मिक वातावरण में हुआ था। यह वातावरण कायम है।

##### मुझे यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि केन्द्रीय प्रदूषण निवारण मंडल के अनुसार नर्मदा नदी देश की सबसे कम प्रदूषित नदी की श्रेणी 'क' में आती है। बीते दस वर्ष में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं औद्योगिक नीतियों का कड़ाई से पालन करवाने के कारण नर्मदा नदी श्रेणी 'क' में आई है। हम सभी जानते हैं कि देश की नदियों की क्या हालत हो रही है। नदी को प्रदूषण से मुक्त कर संरक्षित करने की बड़ी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अपने कंधों पर ली है। इससे भावी पीढ़ियों को हम स्वच्छ जल और प्रदूषण मुक्त वातावरण दे सकेंगे।

इस अनूठी यात्रा का मुख्य उद्देश्य नर्मदा के संरक्षण और उससे जुड़े संसाधनों के सतत उपयोग के संबंध में जागरूकता ब़ढ़ाना, नदी के तटों से लगे क्षेत्रों के संरक्षण और भूमि कटाव को रोकने के लिए नर्मदा तटों पर वृक्षारोपण करना, जैविक खेती को बढ़ावा देना और नदी को प्रदूषित करने वाले स्रोतों की पहचान कर जन-जागरूकता तथा जन-सहभागिता से उन्हें रोकना है। अभियान के अंतर्गत नशा मुक्ति, स्वच्छता एवं पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोग जागरूक हो भी रहे हैं।

आज जब पूरे विश्व में पर्यावरण की बात हो रही है तब मुख्यमंत्री श्री चौहान का यह मानना एक सामयिक चिंतन ही है कि मध्यप्रदेश की नर्मदा मैया को पर्यावरणीय संकटों से उबारना बहुत आवश्यक है। गत दशकों में निरंतर वन कम होने से नर्मदा मैया की धार भी प्रभावित हुई है। जिस नदी ने हमें जल, विद्युत, कृषि, उद्यानिकी की सौगात दी है, उसे हम प्रदूषित करने में पीछे नहीं रहे। यह एक तरह का मनुष्य का अपराधिक कृत्य माना जाएगा कि हमारी नदियाँ लगातार प्रदूषित होती गई हैं। अब वह समय आ गया है जब पुरानी त्रुटियों के लिए पश्चाताप करते हुए नदियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए वातावरण बनाया जाए और मिलकर कार्य किया जाए। नर्मदा तट के पास स्थित गाँव में स्वच्छ शौचालय बनेंगे, नगरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था होगी, घाटों पर पूजन कुण्ड, मुक्ति धाम और महिलाओं के चेंजिंग रूम भी बनेंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि यात्रा के दौरान दोनो तटों पर एक-एक किलोमीटर तक फलदार, छायादार पौधे लगाए जाएंगे। इसकी शुरूआत यात्रा के प्रारंभ से हो चुकी है। स्वच्छता, जैविक खेती, नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण के संयुक्त अभियान के रूप में यह यात्रा हमारे सामने है। समाज और सरकार के सामूहिक संकल्प से नर्मदा की पवित्रता का संरक्षण अवश्य सफल होगा।

ऐसा विश्वास व्यक्त किया गया है कि जन-जागृति से नदियों के संरक्षण का दायित्व बोध भी बढ़ेगा। नदियों में गंदगी प्रवाहित न करने की शपथ लेकर उसे कार्य रूप में लागू कर सुख-समृद्धि की एक नई शुरूआत होगी। नर्मदा मैया की कृपा भी जनता को प्राप्त होगी। शुद्ध मन से नर्मदा सेवा यात्रा में हिस्सेदारी करने वाले, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अच्छा समाज बनाने और उसे सँवारने का कार्य कर रहे हैं। यात्रा के प्रति आम लोगों का रूझान बढ़ता ही जा रहा है।

नर्मदा प्रदेश के 16 जिलों से गुजरकर लगभग 1100 किलोमीटर की यात्रा करती है। इसके माध्यम से चार करोड़ से अधिक आबादी को पेयजल प्राप्त होता है तथा 17 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। नर्मदा नदी से 2400 मेगावाट की बिजली भी उत्पन्न होती है। नर्मदा नदी के दोनों तरफ एक किलोमीटर दूर तक फलदार पेड़ लगाये जायेंगे। आगामी दो जुलाई को पौधे लगाने का कार्य बड़े पैमाने पर होगा। नर्मदा को प्रदूषित होने से रोकने के लिए शौचालय निर्माण, हवन कुंड निर्माण, शवदाह गृहों का निर्माण, महिलाओं के लिए स्नानघरों का निर्माण करवाया जा रहा है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सबके निरंतर सहयोग और भागीदारी की जरूरत है।


लेखक मप्र शासन के जं.स मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता हैं
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