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आलेख
स्वच्छ भारत मिशन

स्वच्छता से सेवा की दिशा में मध्यप्रदेश के तेज डग

भोपाल : शुक्रवार, सितम्बर 29, 2017, 15:38 IST
 

पिछले तीन साल में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। आज की स्थिति में प्रदेश में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मिशन के क्रियान्वयन ने जन-आन्दोलन का रूप ले लिया है। लोग अपनी बस्ती, ग्राम, शहर और जिले को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिये सरकार के प्रयासों से इतर नये-नये नवाचार कर रहे हैं। इसके अलावा स्वच्छता के अन्य क्षेत्रों में जागरूकता दिखाई दे रही है। हाल ही में प्रदेश में प्रधानमंत्री का जन्मदिन 17 सितम्बर सेवा दिवस के रूप में मनाया गया। जिसमें मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर राज्य मंत्रि-परिषद के सदस्यों और अन्य जन-प्रतिनिधियों ने शौचालय निर्माण के लिये गड्डे खोदे। प्रदेश में 15 सितम्बर से गाँधी जयंती 2 अक्टूबर 2017 तक 'स्वच्छता सेवा पखवाड़ा' संचालित किया जा रहा है। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश स्वच्छता के मूल मंत्र को जन-सेवा से जोड़कर इस दिशा में तेज डग भर रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)

मध्यप्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में सभी 22 हजार 824 ग्राम पंचायतों के एक करोड़ 18 लाख 15 हजार आवासीय घरों में स्वच्छ शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित कर पूर्ति की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। राज्य सरकार का संकल्प प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र को 'खुले में शौच' मुक्त बनाना है।

शहरी मिशन में प्रदेश की उपलब्धि

  • स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण-2017 में इन्‍दौर देश में स्‍वच्‍छता में प्रथम स्‍थान

  • स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण-2017 में भोपाल देश में स्‍वच्‍छता में द्धितीय स्‍थान

  • 22 शहर देश में प्रथम 100 स्‍वच्‍छ शहरों में शामिल।

  • समस्‍त 378 नगरीय निकाय खुले में शौच से मुक्‍त, 361 नगरीय निकायों को क्‍वालिटी काउन्सिल आफ इण्डिया का प्रमाणीकरण।

अभियान में अब तक प्रदेश के 11 जिले, 51 विकासखण्ड, 7532 ग्राम पंचायत और 17 हजार 989 ग्राम खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं। खुले में शौच मुक्त जिलों में आगर-मालवा, भोपाल, बुरहानपुर, ग्वालियर, हरदा, इन्दौर, खरगोन, नीमच, सीहोर, उज्जैन और नरसिंहपुर शामिल हैं। ओडीएफ घोषित 59 विकासखण्ड में आगर, बारोद, नलखेड़ा, सुसनेर, बैरसिया, फन्दा, बुरहानपुर, खाकनार, छिन्दवाड़ा, धार, भितरवार, डबरा, घाटीगाँव, मोरार, हरदा, खिरकिया, टिमरनी, देपालपुर, इन्दौर, महू, साँवेर, बड़वाह, भगवानपुरा, भिकनगाँव, गोगाँव, कसरावद, खरगोन, महेश्वर, सेगाँव, झिरण्या, मल्हारगढ़, बाबई चीचली, चाँवरपाठा, गोटेगाँव, करेली, नरसिंहपुर, सांईखेड़ा, जावद, मनासा, नीमच, आष्टा, बुधनी, इछावर, नसरूल्लागंज, सीहोर, बड़नगर, घटिया, खाचरौद, महिदपुर, तराना और उज्जैन।

वर्ष 2013-14 में अभियान की शुरूआत पर ग्रामीण क्षेत्र में 5 लाख 15 हजार 584 शौचालय थे, जो अब 78 लाख 81 हजार से ज्यादा हैं। इस वर्ष सितम्बर तक शौचालय विहीन 99 लाख 92 हजार 103 परिवारों ने शौचालय निर्माण के लिये पंजीयन करवाया है। इसमें से अब तक 78 लाख 81 हजार 74 शौचालय बन चुके हैं। शेष 21 लाख 11 हजार 33 शौचालय निर्माण के विभिन्न चरण में हैं।

 नर्मदा कछार क्षेत्र

नर्मदा कछार के क्षेत्र को स्वच्छ बनाने की मुहिम में क्षेत्र के 16 जिलों में से 4 जिले हरदा, खरगोन, सीहोर और नरसिंहपुर खुले में शौच मुक्त घोषित हो चुके हैं। साथ ही 12 विकासखण्ड, 124 ग्राम पंचायत और 124 ग्राम भी ओडीएफ घोषित हो गये हैं।

इस वर्ष का लक्ष्य एवं रणनीति

इस वर्ष 22 लाख 75 हजार से ज्यादा नए घरेलू शौचालयों का निर्माण कर इसके कवरेज को 40 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाना है। दस हजार ग्राम पंचायतों और 18 जिलों को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने का लक्ष्य है। व्यापक प्रचार-प्रसार, हितग्राही के खाते में वेब एप्लीकेशन के माध्यम से सीधे राशि का हस्तांतरण आदि भी इस वर्ष किया जा रहा है। इसी तरह सभी जिलों में समुदाय अभिप्रेरणा गतिविधियाँ कर खुले में शौच की प्रवृत्ति को खत्म करने में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने का भी लक्ष्य है।

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)

      प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 02 अक्टूबर, 2014 से प्रारंभ इस मिशन में सम्पूर्ण भारत को खुले में शौच मुक्त करना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन लागू करना, सूचना शिक्षा संप्रेषण से नागरिकों में व्यवहार परिवर्तन लाने का लक्ष्य मिशन अवधि वर्ष 2014-2019 तक पूर्ण करने का निर्धारित किया गया है। लक्ष्य पूर्ति की दिशा में व्यक्तिगत शौचालय के लिये 4000 रुपये, सार्वजनिक/ सामुदायिक शौचालय के लिये 39,200 रुपये प्रति सीट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु 35 प्रतिशत तथा सूचना शिक्षा संप्रेषण के लिये 15 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है।

प्रदेश की प्रगति एवं अद्यतन स्थिति

      प्रदेश में जनगणना- 2011 के अनुसार लगभग 7 लाख 31 हजार से अधिक शौचालय विहीन परिवार चिन्हित हुए। सभी नगरीय क्षेत्रों में सर्वे कराकर 6 लाख 18 हजार व्यक्तिगत शौचालय स्वीकृत किये जाकर अभी तक 4 लाख 80 हजार निर्मित करवाये जा चुके हैं। इस वित्त वर्ष में लगभग 2 लाख शौचालय निर्माण का लक्ष्य है। मिशन अवधि में लगभग 40 हजार सीट सार्वजनिक/ सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य है। इसमें से 12 हजार 223 सीटों का निर्माण किया जा चुका है।

अपशिष्ट प्रबंधन

            प्रदेश में सभी 378 नगरीय निकायों के 26 समूह गठित कर एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना क्षेत्रीय लैण्डफिल की अवधारणा पर जन-निजी भागीदारी (पीपीपी) से क्रियान्वित करने की अभिनव पहल की गई है। इन प्रोजेक्ट्स में लगभग 4,100 करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा। वेस्ट टू एनर्जी प्लांटस भी इस योजना का हिस्सा है।

इन 26 समूह आ‍धारित योजनाओं में से भोपाल (आठ निकाय), इन्दौर (आठ निकाय), ग्वालियर (पन्द्रह निकाय) एवं रीवा (28 निकाय) एवं रतलाम (22 निकाय) में कचरे से विद्युत उत्पादन के संयंत्र लगाकर लगभग 72 मेगावॉट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से भोपाल, इन्‍दौर, ग्‍वालियर एवं रीवा के लिये जन-निजी भागीदार नियुक्‍त कर अनुबंध किया जा चुका है। रतलाम क्‍लस्‍टर के लिये जन-निजी भागीदार का चयन इसी माह में कर लिया जायेगा। कटनी, सागर, भोपाल, इन्‍दौर, ग्‍वालियर की परियोजनाओं के लिये राशि 1461 करोड़ रुपये की कार्य-योजनाएँ तैयार की जाकर जन-निजी भागीदारी से क्रियान्वित की जा रही है।

      शेष समूह की योजनाओं में खाद एवं आरडीएफ आदि का उत्पादन किया जाएगा। सभी 26 योजना का क्रियान्वयन मार्च, 2019 तक पूर्ण कर योजना के संचालन का लक्ष्य रखा गया है।

भावी लक्ष्य एवं रणनीति

      मिशन के अंतर्गत प्रदेश ने अपने लक्ष्य का निर्धारण कर उनकी पूर्ति की रणनीति तैयार की है। राज्‍य स्‍तर पर ''समग्र स्‍वच्‍छता'' के पाँच स्‍तम्‍भ, सरलता, पारदर्शिता, निरंतरता, संवहनीयता, जनजागरूकता के आधार पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा स्वयं के स्रोतों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सफल क्रियान्वयन तथा योजना को वहनीय बनाने के लिये निकायों को 20 प्रतिशत अनुदान तथा 30 प्रतिशत तक राशि, यदि आवश्यक हो, तो 5 प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिये जाने, व्यक्तिगत शौचालय के लिये हितग्राही को 6,880 रुपये तथा सामुदायिक/ सार्वजनिक शौचालय के लिये निकाय को 32 हजार 500 रुपये प्रति सीट का अनुदान दिये जाने का प्रावधान किया गया है।

नोट :- कृपया आलेख का प्रकाशन 2 अक्टूबर, 2017 के अंक में करने का अनुरोध है।


सुरेश गुप्ता
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