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आलेख
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस-1 नवम्बर 2017 पर विशेष

राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए महा-अभियान

भोपाल : गुरूवार, अक्टूबर 26, 2017, 16:27 IST
 

प्रदेश में किसानों, ग्रामीणों और आमजनों के राजस्व विभाग से संबंधित मामलों के त्वरित निराकरण के लिये राजस्व महा-अभियान चलाया जा रहा है। इस महा-अभियान के सौ दिन पूर्ण हो गये हैं। इन सौ दिनों में 75 प्रतिशत से भी अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जनहित में इस महा-अभियान को निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं।

राजस्व महा-अभियान में अभी तक किसानों को खसरा एवं बी-1 की 4 करोड़ 12 लाख नकलें नि:शुल्क वितरित की जा चुकी हैं। प्रदेश के स्थापना दिवस एक नवंबर, 2017 तक शेष किसानों को खसरा और बी-1 की नि:शुल्क नकलें उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2008 और 2013 में भी किसानों को खसरा और बी-1 की नि:शुल्क नकलें उपलब्ध करवायीं गयी थीं। महा-अभियान के दौरान अब तक 2 लाख से अधिक पात्र आवासहीनों को आवासीय पट्टे वितरित कर दिये गये हैं। शेष आवासहीनों को 31 दिसंबर, 2017 तक शत-प्रतिशत पट्टा वितरण की कार्यवाही जारी है। अब तक राजस्व महा-अभियान में 3 लाख 5 हजार से भी अधिक अविवादित नामांतरण एवं बँटवारे के आवेदनों का निराकरण कर दिया गया है।

राजस्व वर्ष 2016-17 में प्रदेश में 12 लाख 5 हजार 961 राजस्व प्रकरण दर्ज किये गये और 9 लाख 2 हजार 461 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इस तरह लगभग तीन चौथाई राजस्व प्रकरणों का निराकरण अभी तक किया जा चुका है। महा-अभियान में दो वर्ष से अधिक अवधि के पुराने राजस्व प्रकरणों का सौ फीसदी निराकरण करने के लिये विशेष अभियान चलाया जा रहा है जिसकी समय-सीमा 31 मार्च, 2018 निर्धारित की गई है। राज्य शासन द्वारा भू-अर्जन की कार्यवाही में किसानों की ली गई भूमि की निर्विवादित भू-अर्जन राशि का दिसंबर 2017 तक वितरण करने का प्रयास किया जा रहा है। सीमांकन के प्रकरणों को तेजी से निपटाने के लिये एटीएस मशीन द्वारा 'प्रथम आवेदन-प्रथम निराकरण' व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।

मुख्य सचिव द्वारा मॉनिटरिंग

मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह स्वयं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दूरस्थ अंचलों तक कार्यरत राजस्व न्यायालयों का आकस्मिक निरीक्षण कर रहे हैं। संभागायुक्त एवं जिला कलेक्टर की टीम राजस्व न्यायालयों के निरीक्षण में जुटी है। इससे राजस्व प्रकरणों के निराकरण में काफी तेजी आई है। लोगों ने राहत महसूस की है। राजस्व प्रशासन में कसावट आई है। राजस्व प्रकरणों के निराकरण में गुणवत्ता के साथ गति भी दिखाई दे रही है।

राजस्व प्रशासन को सिटीजन फ्रेण्डली बनाने की कवायद

मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप राजस्व प्रशासन को सिटीजन फ्रेण्डली बनाया जा रहा है। राजस्व प्रकरणों के निराकण की व्यवस्था को पारदर्शी और जन-कल्याणकारी बनाने के लिये नये सरल कानून बनाने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने, राजस्व विभाग में रिक्त पदों पर समय-सीमा में भर्ती, राजस्व ग्रामों में कोटवारों की व्यवस्था, पटवारियों तथा अन्य राजस्व अमले के प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था, विभाग में पदों के युक्तियुक्तकरण, नजूल के पट्टों के नवीनीकरण, नई बसाहटों का नजूल सर्वे और राजस्व न्यायालयों के लिये रीडरों का नया कैडर बनाने की कार्यवाही जारी है। राजस्व निरीक्षण वृत्तों का पुनर्गठन भी किया जा रहा है। राज्य स्तर पर विधिक सलाह प्रकोष्ठ गठित किया जा रहा है। राजस्व न्यायालयों में संसाधन बढ़ाने के साथ अभिलेखों के संधारण के लिये आधुनिक तकनीक का उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

रेवेन्यू केस मैनेजमेंट सिस्टम

राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण और राजस्व न्यायालयों की कार्य-प्रणाली का बेहतर एवं पारदर्शी तरीके से प्रबंधन करने के लिये रेवेन्यू केस मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। इस सिस्टम से नागरिकों को उपलब्ध वाद सूची से किसी तिथि पर नियत प्रकरण की जानकारी मिल जाती है। प्रकरण को सर्च कर उसके बारे में जानकारी ली जा सकती है। इसके साथ ही जिन प्रकरणों में निर्णय हो चुके हैं, उनके आदेश की कॉपी भी डाउनलोड की जा सकती है।

'उत्तरा एप' प्रभावशील

प्रदेश में राजस्व विभाग से संबंधित समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिये 'उत्तरा एप' बनाया गया है। इस एप से सीमांकन, बटाँकन, नामाँतरण, जाति प्रमाण-पत्र सहित अन्य आवेदन ऑनलाइन प्रस्तुत किये जा सकते हैं। प्राप्त आवेदनों को समय-सीमा में निराकृत कर आवेदक को रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मैसेज भी इस एप से दिया जा रहा है। इस एप के माध्यम से जिलों में राजस्व विभाग के लंबित, प्रचलित एवं निरस्त आवेदनों की स्थिति एक साथ देखी जा सकती है। संबंधित अधिकारियों को लंबित आवेदनों के संबंध में जरूरी निर्देश भी इस एप से दिये जा सकते हैं। प्रभारी अधिकारी भी इस एप से लंबित आवेदनों की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर उस पर जरूरी कार्यवाही कर रहे हैं। 'उत्तरा एप' में श्रेणीवार आवेदनों के डेश-बोर्ड के अतिरिक्त पटवारी के लिये भी डेश-बोर्ड दिया गया है।

तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारी के 8584 नये पद

कॉडर रिव्यू में वर्तमान जरूरतों के मद्देनजर तहसीलदार के 249 और नायब तहसीलदार के 947 नये पद प्रस्तावित किए गए हैं। पटवारी के 7398 नये पद स्वीकृत किये जा चुके हैं। नायब तहसीलदार के 294 पद की भर्ती राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा की जा रही है। तहसीलदार के अभी 519, नायब तहसीलदार के 620 और पटवारी के 11 हजार 622 पद स्वीकृत हैं।

110 तहसीलें सूखा प्रभावित घोषित

राज्य शासन द्वारा अल्प वर्ष के मद्देनजर 13 जिलों की 110 तहसील को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। जिला अशोकनगर की 7, भिण्ड की 8, छतरपुर की 11, दमोह की 7, ग्वालियर की 5, इंदौर की 5, पन्ना की 9, सागर की 11, सतना की 10, शिवपुरी की 9, सीधी की 7, टीकमगढ़ की 10 और विदिशा की 11 तहसील को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

प्राकृतिक प्रकोप पीड़ितों की राहत राशि में चार गुना वृद्धि

राज्य सरकार द्वारा पिछले ग्यारह वर्ष में प्राकृतिक प्रकोप से पीड़ित किसानों और अन्य व्यक्तियों को दी जाने वाली राहत राशि चार गुना तक बढ़ा दी गयी है। प्राकृतिक आपदा से मृत्यु पर वर्ष 1994 में 10 हजार, वर्ष 2006 में एक लाख और वर्ष 2017 में 4 लाख रुपये मिल रहे हैं। पानी में डूबने से मृत्यु पर 2006 में कोई प्रावधान नहीं था। अभी एक लाख रुपये दिये जाते हैं। हॉल ही में लिये गये निर्णय अनुसार अब पानी में डूबने अथवा नाव दुर्घटना होने से मृतक के परिजन को 4 लाख रूपये तक की सहायता दी जायेगी। सर्प/गुहेरा या जहरीले जंतु के काटने से अथवा बस या अन्य अधिकृत पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नदी में गिरने या पहाड़ी आदि से खड्डे में गिरने से इन वाहन पर सवार व्यक्तियों की मृत्यु होने पर मृत व्यक्ति के परिजन को दी जाने वाली सहायता 50 हजार से बढ़ाकर 4 लाख रूपये तक कर दी गयी है।

पक्का मकान पूरा नष्ट होने पर पहले 2500 रुपये और अब 95 हजार 100, झुग्गी नष्ट होने पर 6000 और पान के बरेजे नष्ट होने पर पहले 300 से 12000 रुपये और अब 500 से 30,000 रुपये तक दिये जाते हैं। प्राकृतिक प्रकोप से निजी कुएँ या नलकूप आदि की टूट-फूट या धँस जाने पर उसके मालिक को हानि के आकलन के आधार पर 6000 के स्थान पर अब 25 हजार रुपये तक की सहायता दी जायेगी। आग अथवा अन्य प्राकृतिक आपदा से कृषक की बैलगाड़ी अथवा कृषि उपकरण नष्ट हो जाने पर 4000 के स्थान पर अब 10 हजार रुपये की सहायता दी जायेगी। कुम्हारों के ईंट भट्टों एवं मिट्टी के बर्तनों को प्राकृतिक आपदा से क्षति होने पर दी जाने वाली आर्थिक सहायता अब 3000 के स्थान पर 10 हजार रुपये तक की दी जायेगी।

ऐसे छोटे दुकानदारों जिनकी दुकानें अग्नि दुर्घटना या अति वर्षा/बाढ़ से नष्ट हो जाती हैं और उसकी दुकान का बीमा नहीं हो तथा दुकानदार के पास दुकान नष्ट हो जाने पर जीविकोपार्जन के अन्य सभी साधनों से वार्षिक आय एक लाख रुपए तक हो, तो दी जाने वाली सहायता में प्रति दुकानदार 12 हजार रुपए तक की वृद्धि की गयी है। पहले इसमें वार्षिक आय 35 हजार होने पर सहायता राशि 6 हजार रुपए दी जाती थी।

फसल हानि राहत

फसल हानि 25 से 33 प्रतिशत होने पर पहले 2000 से 5000 रुपये और अब 5000 से 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर, 33 प्रतिशत से अधिक क्षति पर पहले 3000 से 10,000 रुपये और अब 8000 से 20,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से राहत राशि दी जाती है। बैल, भैंस और घोड़ा की मृत्यु पर वर्ष 2006 में 1800 रुपये और अब 30,000 रुपये दिये जाते हैं। गाय की मृत्यु पर पहले के 1800 रुपये की तुलना में अब 25,000 रुपये की राहत राशि दी जाती है। मुर्गे की मृत्यु पर वर्ष 1992 में 15 रुपये, वर्ष 2006 में 40 वर्ष और वर्ष 2015 से 60 रुपये प्रति मुर्गे की दर से सहायता दी जाती है।

राहत राशि में वृद्धि के अनुरूप राजस्व विभाग का बजट भी बढ़ा है। वर्ष 2005-06 में कुल बजट प्रावधान 577 करोड़ का था, जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 3829 करोड़ का हो गया है।


राजेश पाण्डेय
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