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आलेख
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस- एक नवंबर 2017 पर विशेष

मालवा का खोया वैभव लौटाने की ऐतिहासिक पहल

भोपाल : गुरूवार, अक्टूबर 26, 2017, 16:29 IST
 

एक समय था जब मध्यप्रदेश का मालवा क्षेत्र अपनी सम्पन्नता और खुशहाली के लिये देश, दुनिया में जाना जाता था। मुगलकालीन भारत में भी मालवा मुगल शासकों के लिये निरन्तर आकर्षण का केन्द्र बना रहा। मालवा की सम्पन्नता और खुशहाली का आधार थी यहाँ कल-कल बहने वाली नदियाँ, हरे-भरे जंगल और उपजाऊ भूमि। समय बीतने के साथ मालवा के इस वैभव का क्षरण होने लगा। बढ़ती आबादी का दबाव, वनों और पर्यावरण की अनदेखी और अनियंत्रित औद्योगीकरण ने मालवा अंचल को श्रीहीन बना दिया। लगभग तीन दशक से यह क्षेत्र सूखती नदियों, अदृश्य होते वनों और तेजी से गिरते भू-जल स्तर के दुष्परिणामों को भोग रहा था। खाद्यान्न उत्पादन में कमी, पीने के पानी का संकट, उद्योगों की तालाबन्दी ने सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया था।

मध्यप्रदेश में श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बनी सरकार ने मालवा के खोये वैभव को लौटाने की चिन्ता की, साथ ही इस संबंध में इच्छा शक्ति भी प्रदर्शित की। राज्य सरकार ने मालवा के खोये वैभव को लौटाने का मुख्य आधार बनाया सदा प्रवाहित नर्मदा को। नर्मदा से मालवा की प्रमुख नदियों और उसके कछारों को जल सम्पन्न बनाने के लिये नर्मदा-क्षिप्रा, नर्मदा-गम्भीर, नर्मदा-कालीसिन्ध और नर्मदा-पार्वती लिंक जैसी चुनौतीपूर्ण योजनाओं की रूपरेखा बनाई गई।

अभियान के प्रथम चरण में 432 करोड रूपये लागत की नर्मदा-क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक योजना का कार्य केवल 14 माह की रिकार्ड अवधि में पूरा किया गया। नर्मदा के जल से प्रवाहमान क्षिप्रा ने पिछले सिंहस्थ को दुनिया भर में प्रसिद्धी दिलवाई। अगले चरण में नर्मदा-मालवा-गम्भीर लिंक योजना का काम हाथ में लेकर 2187 करोड रूपये की इस योजना का 75 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। नर्मदा गम्भीर लिंक योजना इन्दौर और उज्जैन जिले के 158 गांवो में 50 हजार हेक्टेयर रकबा सिंचित करेगी। योजना के जरिये 15 क्यूमेक्स नर्मदा जल 416 मीटर तक उद्वहन कर गम्भीर नदी में छोड़ा जायेगा। नर्मदा-मालवा लिंक योजना के दूसरे चरण में 30 क्यूमेक्स जल उद्ववहन कर उज्जैन और इन्दौर जिलों को एक लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई लाभ दिया जाना प्रस्तावित है।

मालवा के खोये वैभव को लौटाने के इस अभियान के अगले चरण में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 2215 करोड रूपये की लागत से बनने वाली नर्मदा-क्षिप्रा लिंक के दूसरे चरण के निर्माण की अनुमति दी है। परियोजना से ओंकारेश्वर जलाशय से 15 क्यूमेक्स जल उद्वहन कर क्षिप्रा कछार में लाया जायेगा। इससे उज्जैन तथा शाजापुर जिले में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा। इसके साथ ही देवास, उज्जैन, नागदा, मक्सी, शाजापुर, घटिया, तराना जैसे क्षेत्रों को पीने का पानी तथा नागदा और उज्जैन की औद्योगिक इकाइयों को पानी मिलेगा।

नर्मदा-मालवा लिंक अभियान के लिये मुख्यमंत्री की चिन्ता और रूचि का ही परिणाम है कि नर्मदा नियंत्रण मण्डल की हाल ही में सम्पन्न बैठक में 3490 करोड रूपये लागत से बनने वाली नर्मदा-कालीसिंध लिंक के प्रथम चरण तथा 4407 करोड रूपये लागत की नर्मदा-कालीसिंध लिंक परियोजना के द्वितीय चरण का भी अनुमोदन कर दिया गया है। दो चरण में निर्मित होने वाली मालवा क्षेत्र की इस अति महत्वपूर्ण परियोजना से देवास, शाजापुर, सीहोर और राजगढ़ जिलों के 366 गाँव का 2 लाख हेक्टेयर कृषि रकबा सिंचित होगा। नर्मदा-मालवा लिंक अभियान के तहत निर्मित हो रही परियोजनाएँ जहाँ मालवा के सिंचित रकबे में बढ़ोत्तरी करेंगी वहीं मालवा के उद्योगों को आवश्यक जल-सुलभ होगा। इन परियोजनाओं के अप्रत्यक्ष लाभ के रूप में मालवा भू-भाग का तेजी से गिरता जल-स्तर ऊपर आयेगा। भू-जल स्तर बढ़ने से हरियाली और पर्यावरण का विकास निश्चित है। मध्यप्रदेश सरकार के नर्मदा-मालवा लिंक अभियान को देखते हुए यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि मालवा का खोया वैभव आने वाले दिनों में पुर्नस्थापित होकर रहेगा।


दुर्गेश रायकवार
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