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आलेख
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस-1 नवम्बर 2017 पर विशेष

युवाओं का कौशल उन्नयन कर रोजगार के योग्य बनाती मध्यप्रदेश सरकार

भोपाल : गुरूवार, अक्टूबर 26, 2017, 17:27 IST
 

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा युवाओं को बेहतर ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार के योग्य बनाने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना ने विद्यार्थियों के माता-पिता को उच्च शिक्षा के खर्च की चिंता से मुक्त कर दिया है। तकनीकी संस्थाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2003 की तुलना में इंजीनियरिंग कालेज 63 से बढ़कर 187, पालीटेक्निक कालेज 44 से 151 और आई.टी.आई. 159 से बढ़कर 1038 हो गयी हैं। शत-प्रतिशत दृष्टि-बाधित एवं श्रवण-बाधित युवाओं के लिए अलग से योजना बनाई गयी है। आठ संभागीय स्तर की संस्थाओं में 173 दृष्टि-बाधित एवं 229 श्रवण-बाधित युवाओं को प्रवेश दिया गया है। आई.टी.आई. में बच्चों की रूचि जागृत करने के लिए ' रोजगार की पढ़ाई- चलें आई.टी.आई.' अभियान चलाया गया।

गरीब विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा की राह हुई आसान

गरीब परिवार के बच्चों की उच्च शिक्षा की राह मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना ने आसान कर दी है। अब इन परिवारों को अपने लाड़ले/लाड़ली को किसी भी बड़े कॉलेज में पढ़ाने के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में अभी तक 28 हजार 592 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से विभिन्न संस्थाओं द्वारा 15 हजार 897 आवेदन सत्यापित किये जा चुके हैं। इनमें से 8 हजार 310 आवेदन स्वीकृत हो चुके हैं। शेष आवेदनों की स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है।

सत्यापित आवेदनों में प्रदेश एवं भारत सरकार के राष्ट्रीय संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले 16, लॉ के 21, मेडिकल के 145, इंजीनियरिंग के 327, पॉलीटेक्निक के 54 और राज्य में संचालित विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों के 15 हजार 72 से अधिक विद्यार्थियों के आवेदन शामिल हैं।

योजना का लाभ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत और सी.बी.एस.ई. और आई.सी.एस.ई. की परीक्षा में 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को मिल रहा है। विद्यार्थी को योजना का लाभ तब ही मिलता है जब उसके पालक की वार्षिक आय 6 लाख रुपये से कम हो।

मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन एवं कौशल्या योजना में 70% प्लेसमेंट

मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन एवं कौशल्या योजना में 35 शासकीय आईटीआई में फूड प्रोसेसिंग, प्लंबर, केपिटल गुड्स, आटोमोटिव, फर्नीचर फिटिंग, इलेक्ट्रानिक्स, सिक्युरिटी, ब्यूटी वेलनेस, आईटी सेक्टर के अलग-अलग 57 मॉडयूल्स में प्रशिक्षण शुरू किया जा चुका है। योजना में 10 सेक्टर में जो कोर्स प्रारंभ किये जा रहे हैं, उनके लिए ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स में 148 प्रशिक्षक का सर्टिफिकेशन सेक्टर ऑफ काउंसिल द्वारा किया जा चुका है।

योजना का मुख्य उददेश्य विभिन्न विभागों द्वारा संचालित कौशल संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप (नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क अंतर्गत) प्रमाणीकरण एवं एकरूपता लाते हुए प्रशिक्षण में गुणवत्ता एवं रोजगार अवसर में वृद्धि लाना है। इस वित्त वर्ष में साढ़े चार लाख प्रशिक्षणार्थी को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना में ढाई लाख युवक-युवतियों एवं मुख्यमंत्री कौशल्या योजना में दो लाख युवतियों को प्रशिक्षण दिया जाना है। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार दिलाये जाने का प्रावधान किया गया है। प्लेसमेंट के बाद कम से कम तीन माह तक उनकी मॉनिटरिंग की जायेगी।

प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में शासकीय आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलीटेक्निक कॉलेज, उच्च शिक्षा विभाग एवं अर्ध शासकीय संस्थाओं के रूप में एटीडीसी, निफ्ट, आईजीटीआर, क्रिस्प, सीपेट, आदि से एमओयू कर नवम्बर 2017 से बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण प्रारंभ किया जाना है। योजना में 100 घंटे से 1200 घंटे की अवधि के कोर्स शामिल हैं। इसमें मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण एनसीव्हीटी के मापदंड अनुरूप किया जायेगा।

उद्यमिता विकास सेल

आईटीआई प्रशिक्षित छात्रों को स्वयं का उद्यम स्थापित करने का मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से राज्य कौशल विकास मिशन द्वारा उद्यमिता विकास सेल स्थापित किया गया है। सेल में उद्यम स्थापना, उसके संचालन एवं वित्तीय सहायता संबंधी मार्गदर्शन दिया जायेगा। विद्यार्थी इस संबंध में जिला नोडल आईटीआई में उद्यमिता प्रशिक्षण अधिकारी से भी सम्पर्क कर सकते हैं। सेल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'मेक-इन-इण्डिया'' की कल्पना को साकार रूप देने में मदद करेगा। सेल ने आईटीआई अध्ययनरत एवं प्रशिक्षित इच्छुक छात्रों को स्टार्ट-अप प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने के लिये सभी जिलों में तीन दिवसीय उद्यमिता उन्मुखीकरण कार्यक्रम किया है। इसके साथ ही 60 घंटे का उद्यम स्थापना संबंधी अंशकालीन प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। सेल की गतिविधियों को पूरे प्रदेश में क्रियान्वित करने के लिये आईटीआई के प्रशिक्षण अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री कौशल उत्कृष्टता पुरस्कार

कौशल विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री कौशल उत्कृष्टता पुरस्कार से नवाजा जायेगा। कुल 82 अधिकारी-कर्मचारी को 13 लाख 5 हजार रुपये के पुरस्कार दिये जायेंगे। पुरस्कार योजना का उद्देश्य कौशल विकास योजनाओं के गुणात्मक एवं सकारात्मक परिणाम में वृद्धि के लिये अधिकारियों/ कर्मचारियों को प्रोत्साहित करना है। मुख्य रूप से 'रोजगार की पढ़ाई-चलें आई.टी.आई.', मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन एवं कौशल्या योजना के क्रियान्वयन और युवाओं के प्लेसमेंट के लिए बेहतर कार्य, चयन के मुख्य आधार होंगे। बेहतर कार्य के आधार पर 2 कमिश्नर, 10 कलेक्टर, 3 जिला शिक्षा अधिकारी/ सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, 2 संयुक्त संचालक कौशल विकास, 8 प्राचार्य कौशल विकास, 16 प्रशिक्षण अधिकारी कौशल विकास, 3 स्टेट टीम के सदस्य, 3 राज्य स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी, 3 कौशल विकास के क्षेत्र में कार्य कर रही अन्य 24 विभाग की टीम, 16 केम्पेन मैनेजर और 16 स्टाफ कौशल विकास विभाग को पुरस्कृत किया जायेगा। नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन रहेगी। वेबसाइट mpskill.gov.in पर आवेदन करना होगा।

भोपाल में बनेगा ग्लोबल स्किल पार्क

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में बनने वाले देश के सबसे बड़े ग्लोबल स्किल पार्क का शिलान्यास 3 जुलाई को किया है। यह पार्क आई.टी.ई.ई.एस. सिंगापुर के सहयोग से गोविन्दपुरा नरेला संकरी क्षेत्र में 37 एकड़ में बनाया जायेगा।

पार्क की निर्माण लागत 645 करोड़ है। पार्क में हर साल एक हजार विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रशिक्षक विश्व स्तर के होंगे। प्रशिक्षित विद्यार्थियों का प्लेसमेंट भारत एवं इंटरनेशनल स्तर पर किया जायेगा। पार्क 'इंडस्ट्री के साथ एवं इंडस्ट्री के लिये' की भावना पर संचालित होगा। अन्तर्राष्ट्रीय संयुक्त प्रमाणीकरण का प्रावधान भी होगा। इस पार्क की स्थापना से प्रदेश के युवाओं, उद्यमियों और उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय मानदण्डों एवं बाजारों की माँग अनुसार अपेक्षित स्तर की न केवल सुविधाएँ उपलब्ध होंगी बल्कि कौशल विकास से जुड़ी अन्य सेवाएँ भी मिलेंगी।

पार्क में इंक्यूबेशन सेंटर, उद्यमिता विकास सेल, शिक्षुता प्रोत्साहन केन्द्र, प्रदेश की सभी आई.टी.आई. के विद्यार्थियों के लिए केन्द्रीकृत प्लेसमेंट की सुविधा और अनुसंधान, बेंच मार्किंग एवं आकलन सेवाएँ उपलब्ध रहेंगी।

कौशल विकास के लिये हुए प्रमुख एम.ओ.यू.

  • कौशल विकास के लिए एमपी प्लास्टिक पार्क डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड एवं सेन्ट्रल इन्स्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीपेट), भोपाल के मध्य ।

  • बहुउद्देश्यीय कौशल केन्द्र की स्थापना के लिए कॉन्‍फेडरेशन ऑफ इंडियन इण्डस्ट्रीज एवं मध्यप्रदेश ट्रेड एण्ड इनवेस्टमेंट फेसिलिटेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के मध्य ।

  • मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में प्रशिक्षण सहायता के लिये टाटा स्ट्राइव एवं मध्यप्रदेश काउंसिल फॉर वोकेशनल एज्यूकेशन एण्ड ट्रेनिंग के मध्य।

  • कौशल विकास प्रशिक्षण करवाने के लिए प्रकाश एसफाल्टिंग एण्ड टोल हाईवेस लिमिटेड एवं मध्यप्रदेश स्टेट स्किल डेव्हलपमेंट मिशन के मध्य।

  • आईटीआई में शिक्षारत विद्यार्थियों की केपेसिटी निर्माण एवं करियर गाईडेन्स के लिए सीबीएसएल ग्रुप एवं मध्यप्रदेश स्टेट स्किल डेव्हलपमेंट मिशन के मध्य ।

  • विद्यार्थियों को ऑटोमोबाइल, मशीनरी एवं अन्य विनिर्माण क्षेत्र का प्रशिक्षण कराने के लिए एसोसिएशन ऑफ इण्डस्ट्रीज मध्यप्रदेश एवं मध्यप्रदेश स्टेट स्किल डेव्हलपमेंट मिशन के मध्य।

  • टीसीएस के माध्यम से 25,000 युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिये मध्यप्रदेश स्टेट स्किल डेव्हलपमेंट मिशन एवं टाटा कन्सल्टेंसी सर्विसेज के मध्य।

  • ऑटोमोबाईल क्षेत्र में कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए जेबीएम ऑटो लिमिटेड एवं मध्यप्रदेश स्टेट स्किल डेव्हलपमेंट मिशन के मध्य।

  • 50,000 महिलाओं को लघु अवधि कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने के लिए महिला-बाल विकास विभाग एवं मध्यप्रदेश स्टेट स्किल डेव्हलपमेंट मिशन के मध्य।

  • निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए नेशनल एकेडमी ऑफ कन्सट्रक्शन एवं मध्यप्रदेश स्टेट स्किल डेव्हलपमेंट मिशन के मध्य।

  • इस तरह प्रदेश में युवाओं के कौशल उन्नयन और उनको रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए हर स्तर पर प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।


राजेश पाण्डेय
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