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दीनदयाल वनांचल सेवा : शिक्षा, स्वास्थ्य की नई परिभाषा

भोपाल : शुक्रवार, अक्टूबर 27, 2017, 17:58 IST
 

दीनदयाल वनांचल सेवा के माध्यम से वन सुरक्षा एवं विकास के साथ वनवासियों के कल्याण का एक अभिनव प्रयास शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 20 अक्टूबर, 2016 से आरंभ योजना में सुदूर वनांचलों में पदस्थ वन अधिकारी और कर्मचारी वनवासियों की शिक्षा और स्वास्थ्य में भागीदारी कर उनके विकास के नये द्वार खोल रहे हैं।

मध्यप्रदेश में 94 हजार 689 वर्ग किलोमीटर में वन हैं। वन क्षेत्र से 5 किलोमीटर दूरी तक के वनों में 15 हजार 228 वन समितियाँ कार्यरत हैं। दूरस्थ वनांचलों में महिला-बाल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग का अमला बड़ी कठिनाई से पहुँच पाता है। इससे वनवासियों का विकास अवरुद्ध हो रहा था। अब वन अधिकारी-कर्मचारी के जुड़ने से दूरस्थ अंचलों में भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और जागरूकता में वृद्धि स्पष्ट रूप से परिलक्षित होने लगी है। स्थानीय लोगों को वनों की सुरक्षा एवं विकास में सहयोग के मद्देनजर वन समितियाँ दूर-दराज के क्षेत्रों में बनायी गयी हैं। वन विभाग के कर्मचारियों का इनसे सतत सम्पर्क बना रहता है। जहाँ अन्य विभागों की पहुँच कम है, वहाँ वन अधिकारी-कर्मचारी वनांचल सेवा में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण आदि बेहतर ढंग से उपलब्ध करा रहे हैं।

दीनदयाल वनांचल सेवा स्वस्थ जन-स्वस्थ वन की अवधारणा पर आधारित है। वनकर्मी लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा एवं आदिम-जाति कल्याण विभाग की योजनाओं और कार्यक्रमों को न केवल वनवासियों तक पहुँचा रहे हैं बल्कि इनका लाभ भी सुनिश्चित कर रहे हैं। वनकर्मी आँगनवाड़ी केन्द्रों का निर्माण, शौचालयों की मरम्मत एवं उन्नयन, नर्सरी, पौधारोपण, वन उपज, ग्रामोद्योग, कृषि कार्य इत्यादि में भी वनवासियों की मदद कर रहे हैं।

योजना में वनकर्मी दूरस्थ स्थानों की महिलाओं को स्वास्थ्य परीक्षण स्थल तक लाना, गर्भवती महिलाओं के संस्थागत प्रसव, अति कम वजन और कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य केन्द्र तक लाने-ले जाने में भी मदद कर रहे हैं। वे पोषण दिवसों में होने वाले परामर्श सत्रों में भी सहयोग करते हैं। दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य अमले को टीकाकरण, राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण, आयरन फॉलिक एसिड, अति कम वजन वाले बच्चों को थर्ड मील और लघु वनोपज संघ व आयुष विभाग के सहयोग से सुपृष्टि चूर्ण प्रदाय करने में भी सहयोग दे रहे हैं। वनकर्मी दूरस्थ अंचलों की कन्याओं को उदिता योजना में स्वच्छता संदेश और इन्द्रधनुष मिशन के टीकाकरण अभियान में भी सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

दीनदयाल वनांचल सेवा अंतर्विभागीय समन्वय का अभूतपूर्व उदाहरण है। स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष वन-रक्षक स्वास्थ्य प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया है। वन-रक्षकों के स्वास्थ्य उन्मुखीकरण के लिये प्रदेश स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स (आशा कार्यकर्ता) को प्रशिक्षित कर विभिन्न वन मण्डलों के साथ संलग्न किया गया है। वन वृत्तों और राष्ट्रीय उद्यानों में अंतर्विभागीय बैठक और कार्यशालाएँ की गयी हैं। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से अब तक 274 प्रशिक्षण कार्यक्रम में 8,342 वनकर्मी प्रशिक्षित किये जा चुके हैं।

सुदूर वन ग्रामों में अब तक 454 शिविरों का आयोजन किया जाकर 52 हजार 202 ग्रामीणों को लाभान्वित किया जा चुका है। शिविरों के माध्यम से मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने, जटिल बीमारियों से ग्रसित मरीजों को निकटतम अस्पताल पहुँचाना, गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराना, महामारी-संक्रामक रोगों की सूचना देने, टीकाकरण, मलेरिया उन्मूलन, किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य सुधार एवं कुपोषण दूर करने के प्रयास किये जा रहे हैं। वनकर्मी वन ग्रामों में जिंक/ओआरएस डिपो बनाने, दस्तक भ्रमण अभियान दल को 5 वर्ष तक के बच्चों के घर में ओआरएस पैकेट पहुँचाने, दस्त रोग से बचाव संबंधी परामर्श प्रदान करने आदि में सहयोग दे रहे हैं।

वनांचलों में स्कूल शिक्षा एवं आदिम-जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित शालाओं में शिक्षा की उपलब्धता के साथ वनकर्मी पाठ्येत्तर गतिविधियों की भी निगरानी कर रहे हैं। वर्षा ऋतु में पौधे उपलब्ध कराने के साथ स्कूली बच्चों को पौध-रोपण और उनकी देखभाल के लिये भी प्रेरित किया जा रहा है।

 
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