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चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में अग्रणी मध्यप्रदेश

भोपाल : रविवार, नवम्बर 5, 2017, 19:41 IST
 

मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में पिछले 12 वर्ष में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। अस्पतालों के हालातों में आमूल-चूल परिवर्तन आया है, चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है। अब लोगों को उपचार के लिये निकट के अस्पतालों में ही अत्याधुनिक संसाधनों के साथ इलाज की सभी सुविधायें उपलब्ध हैं। प्रदेश में व्यापक जनहित में नए चिकित्सा महाविद्यालय खोले गए हैं। पूर्व से संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों में सीटें बढ़ाई गई हैं ताकि चिकित्सकों की कमी को पूरा किया जा सके।

स्टेट कैंन्सर इंस्टीट्यूट, टर्सरी सेंटर और नये मेडिकल कॉलेज

जबलपुर में राज्य कैंन्सर इंस्टीट्यूट की स्थापना की जा रही है। इस परियोजना की लागत 120 करोड़ रुपये है। ग्वालियर में टर्सरी केयर-सेंटर की परियोजना पर कार्य शुरू किया गया है, इसकी लागत 45 करोड़ रुपये है। इस लागत का तीन चौथायी हिस्सा भारत सरकार एवं शेष एक चौथायी राज्य शासन द्वारा वहन किया जाएगा। इन संस्थाओं की स्थापना से प्रदेश के कैंन्‍सर पीड़ित मरीजों को सुनिश्चित उत्कृष्ट उपचार मिल सकेगा।

स्वतंत्रता के बाद प्रदेश में वर्ष 2004 तक पाँच ही मेडिकल कॉलेज थे। इनमें रीवा, भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर शामिल हैं। वर्ष 2007 में सागर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई। इसके बाद 7 मेडिकल कॉलेज विदिशा, शहडोल, रतलाम, दतिया, खण्डवा, शिवपुरी और छिन्दवाड़ा में खोले जाना प्रस्तावित हैं। इसके लिए 1200 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं। इसमें भारत सरकार एवं राज्य शासन द्वारा 60:40 के अनुपात में व्यय किया जायेगा। वर्तमान में राज्य के शासकीय मेडिकल कॉलेज में एम.बी.बी.एस. की 800 सीटें है जिनमें लगभग 600 सीटों की वृद्धि की जायेगी। नये शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हो जाने से सीटों की वृद्धि होगी, जिससे चिकित्‍सकों की कमी को पूरा किया जा सकेगा। प्रदेश के 7 नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों में नये पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा 5 चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस की सीटों में वृद्धि और 3 सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए नये पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना में मेडिकल कॉलेज ग्वालियर, रीवा एवं जबलपुर में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का निर्माण किया जा रहा है। इससे प्रदेश में 42 सुपर स्पेशियलिटी डाक्टर तैयार होंगे। इनके जरिये प्रदेशवासियों को कॉर्डियोलाजी, न्यूरोलॉजी एवं न्यूनेटोलाजी की उच्चतम चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।

हमीदिया चिकित्सालय भोपाल का पुन-र्निर्माण

भोपाल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हमीदिया अस्पताल में 1200 से 1500 मरीज प्रतिदिन इलाज के लिये आते हैं। करीब सौ से सवा सौ मरीज प्रतिदिन भर्ती होते हैं। हमीदिया अस्पताल एवं सुल्तानिया अस्पताल में कुल 1160 बिस्तर हैं। सुपर स्पेशियलिटी के लिए विभाग का उन्नयन भी किया जा रहा है। इससे मरीजों को नवीनतम चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सकेगा। इसी उद्देश्य से दो हजार बिस्तर का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण चरणबद्ध तरीके से करवाया जा रहा है। इस काम के लिए 435 करोड़ 97 लाख रुपये स्वीकृत किए गये हैं। ग्वालियर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चिकित्सालय 400 बिस्तर का है। चिकित्सालय में इलाज करवाने प्रति दिन 1500 मरीज ओपीडी में आते हैं और 1200 मरीज भर्ती होते हैं। जयारोग्य चिकित्सालय का विस्तार कर इसे एक हजार बिस्तर क्षमता का बनाया जा रहा है। जबलपुर में मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है। इससे प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी मेडिकल कॉलेज के स्नातक, स्नातकोत्तर एवं उच्च स्नातकोत्तर डिग्रीधारी छात्रों को राष्ट्रीय मानक के आधार पर उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त हो सकेगी। साथ ही यूनानी, होम्योपैथिक, नर्सिंग, आयुर्वेदिक, फिजियोथेरेपी एवं अन्य विभाग की परीक्षाएँ इस विश्वविद्यालय से संचालित होंगी।

चिकित्सालय के सुदृढ़ीकरण के लिए 26 नवीन पद सृजित किए गये है, संचालनालय में 14 पद, रीवा में नाक, कान और गला विभाग के लिए 5 पद, इंदौर में स्त्री रोग के लिए 13 नवीन पद, प्रदेश के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रशासकीय, वित्तीय तथा प्रबंधकीय कार्यों के लिए विशेषज्ञ नियुक्त करने की स्वीकृति दी गई है। इसी के साथ ही प्रदेश के समस्त चिकित्सा महाविद्यालयों में सफाई एवं सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए टर्न की बेसिस पर यह कार्य केन्द्र सरकार की 100 प्रतिशत सीपीएसई संस्था को दिया गया है।

चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर में कार्डिओलॉजी सेंटर स्थापित करने के लिए 31 करोड़ 88 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के लिए 200 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटें स्थापित करने के लिए और शिवपुरी एवं छिन्दवाड़ा में 335 करोड़ रुपये की लागत के नए चिकित्सालय स्वीकृत किए गये हैं। इसी तरह, प्रदेश के 5 चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल, रीवा, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में मरीजों की संख्या में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश क्षमता बढ़ाने के लिए नवीन अस्पताल निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिसकी लागत 630 करोड़ रुपये है।

प्रदेश में मरीजों को सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएँ देने के उद्देश्य से ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में सुपर स्पेशियलिटी यूनिट के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिसकी लागत 135 करोड़ रुपये है।

भोपाल मेडिकल कॉलेज में वायरोलॉजी लैब की स्थापना

तेरहवें वित्त आयोग भोपाल मेडिकल कॉलेज में स्टेट वायरोलॉजी लैब की स्थापना की जा रही है। इसका सौ फीसदी वित्त पोषण भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है। इस लैब का कार्य सितम्बर, 2013 से आरंभ हुआ है। भवन निर्माण का काम लगभग पूर्ण हो चुका है, उपकरण खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पिछले कई वर्षों से वायरल जनित बीमारियों के काफी मरीज आ रहे हैं। वायरल बीमारियाँ जैसे स्वाईन फ्लू, डेंगू, एचआईव्ही, हेपेटायटिस-बी, हेपेटायटिस-सी, जापानी इनफेलाईटिस्ट इत्यादि की जाँच तथा उच्च-स्तरीय शोध कार्य इस लैब के जरिये हो सकेगा।

दीनदयाल चिकित्सा गारंटी योजना : इस योजना में चिकित्सा महाविद्यालयों से संबद्ध चिकित्सालयों में बीपीएल मरीजों को चिकित्सा सुविधा दी जाती है। इसमें गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले प्रति परिवार को बीस हजार रुपये की नि:शुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

विक्रमादित्य और ग्रीन कार्ड योजना : इस योजना में सामान्य वर्ग के उत्कृष्ट छात्रों को शासन की ओर से शिक्षण शुल्क दिया जाता है। ऐसे छात्र-छात्राएँ, जिनके माता-पिता ग्रीन-कार्ड योजना में आते हैं, का प्रशिक्षण शुल्क इस योजना में राज्य शासन द्वारा दिया जाता है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल नि:शुल्क दवा वितरण योजना : राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चिकित्सालय में सरकार वल्लभ भाई पटेल योजना में नि:शुल्क दवाइयों का वितरण, जाँच और उपचार किया जाता है।

 
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