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मुख्यमंत्री पद की मिसाल हैं श्री शिवराज सिंह चौहान - अंतर सिंह आर्य

भोपाल : सोमवार, नवम्बर 27, 2017, 20:36 IST
 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से मैं जब-जब मिला, एक बात हमेशा मेरा ध्यान आकर्षित करती थी। वह थी उनका कमजोर तबके और महिलाओं के उत्थान के लिए कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छा-शक्ति। यह विचारधारा तब और पुष्ट हुई, जब मैंने श्रम, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण, पशुपालन, मछलीपालन, कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री का काम सम्हाला। मुख्यमंत्री इन विभागों की चर्चाओं और बैठकों में काफी संवेदनशील हो जाया करते थे।

शायद यह पहली बार हुआ है कि किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री में आज तीर्थ-दर्शन योजना के माध्यम से किसी बुजुर्ग को अपना बेटा दिखता है, युवाओं के लिए पढ़ाई से लेकर रोजगार तक की विभिन्न योजनाओं के कारण युवा वर्ग इन्हें अपना मामा मानते हैं। महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए किये गये प्रयासों ने महिलाओं के ह्रदय में इन्हें भाई का मजबूत ओहदा दिया है। मुख्यमंत्री बनने के पहले भी श्री चौहान गरीब-बेसहारा कन्याओं का विवाह करवाते थे। सीमित संसाधनों के कारण उस समय उनकी हर गरीब कन्या का विवाह कराने की इच्छा हर बार सफल नहीं पाती थी। इस इच्छा की पूर्ति के लिये मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने लाड़ली लक्ष्मी योजना और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना लागू की।

मैंने जीवन में पहली बार देखा है कि बेटियों के बारे में सदियों से अमरबेल की तरह गहरी जड़ें जमाई कुरीतियाँ कैसे बदलती है। कन्या जन्म अब माँ-बाप के माथे पर चिंता की रेखाएँ नहीं खुशियाँ लेकर आता है। लाड़ली लक्ष्मी योजना और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना इसका साक्षात प्रमाण हैं। आज जहाँ लाखों गरीब माता-पिता की कन्याओं के हाथ सरकार की सहायता से पीले हो गए हैं और वे अपना सुखी जीवन जी रही हैं, वहीं लगभग 26 लाख कन्याओं को लाड़ली लक्ष्मी योजना का भरपूर लाभ मिला है। इसलिये गरीब माँ-बाप मुख्यमंत्री को आशीर्वाद देते नहीं थकते हैं।

महिलाओं पर अत्याचार और अपराध रोकने में मुख्यमंत्री ने न केवल पहल की है, बल्कि केबिनेट में 12 साल या उससे कम उम्र की लड़कियों से रेप अथवा गैंगरेप के आरोपी को फांसी की सजा का कानूनी प्रावधान तय करने का निर्णय लिया। यह देश में पहली बार हो रहा है। उम्मीद है जिस तरह से लाड़ली लक्ष्मी और मुख्यमंत्री कन्यादान निकाह/विवाह योजना का अनुसरण दूसरे राज्यों ने किया है, वैसे ही यह प्रावधान भी दूसरे राज्यों के लिये मिसाल बनेगा। महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत और स्थानीय निकायों एवं संविदा शाला शिक्षक पदों पर भी 50 प्रतिशत आरक्षण देकर मुख्यमंत्री ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना दिया है।

किसानों के हित में भी क्रांतिकारी निर्णय लिए गये हैं। किसानों के नुकसान की भरपाई करने वाली भावांतर योजना भी दूसरे राज्यों के लिए अध्ययन का विषय बन रही है। वर्ष 2003 में किसानों को 18 प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण दिये जाते थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ब्याज दरों को लगातार घटाते हुए शून्य प्रतिशत कर दिया। सिंचाई रकबे में लाखों हेक्टेयर वृद्धि होने से सिंचाई रकबा बढ़ा और कृषि लाभ का धंधा बनी है। प्रदेश ने लगातार 5 कृषि कर्मण अवार्ड जीते। श्री शिवराज सिंह चौहान ने खेतिहर मजदूरों की कमजोर सामाजिक और आर्थिक अवस्था को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री सुरक्षा योजना शुरू कर भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को भी लाभान्वित किया है। गेहूँ, धान, प्याज के समर्थन मूल्य व बोनस घोषित हुए। किसानों को सस्ती और भरपूर बिजली दी जा रही है। अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को विशेष लाभ दिए गये हैं। प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल योजना लागू की गई है। किसानों की आय को दोगुना करने के लिए पशुपालन और मछलीपालन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना, मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना, मुख्यमंत्री युवा इंजीनियर कांट्रेक्टर योजना आदि और युवाओं को कौशलयुक्त बनाने के लिए राज्य कौशल मिशन की सहायता से युवाओं को रोजगार देने के प्रयास जारी हैं। प्रदेश की आर्थिक उन्नति के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।

आम लोगों को लोक सेवाएँ मिलने में कोई कठिनाई नहीं हो, इसके लिए मुख्यमंत्री ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम लागू किया है। आम जनता से जुड़े विभागों की 164 सेवाओं को इस अधिनियम में शामिल किया गया है। जन-शिकायतों के निवारण के लिए श्री चौहान ने सी.एम. हेल्पलाइन 161 के रूप में अभिनव पहल की है। यह कॉल-सेंटर रोज सुबह 7 से रात 11 बजे तक काम करता है।

मैंने हमेशा देखा कि मुख्यमंत्री गरीबों की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति चिंतित रहते हैं। उनके दखल के कारण ही प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में आज राज्य बीमारी सहायता योजना, मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना, बाल स्वास्थ्य योजना, नि:शुल्क डायलिसिस, कीमोथैरेपी की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित हो पाई हैं। अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोग न केवल महंगा इलाज करवा पा रहे हैं, बल्कि बहुत बड़ी संख्या में लोगों को नि:शुल्क दवाइयाँ भी मिल रही हैं।

आज गाँव-गाँव तक सड़कों की पुख्ता व्यवस्था है। इससे प्रदेश के सर्वांगीण विकास को वांछित गति मिली है। प्रदेश में गरीबों को एक रुपये किलो में गेहूँ, चावल और नमक मिल रहा है। होशंगाबाद जिले के गाँव बावड़िया की रहने वाली श्रीमती विद्या तंवर और गेंदाबाई कहती हैं कि पेट की चिंता न होने से हम अपना पैसा दूसरे कामों में खर्च करने लगे हैं। इससे हमको सुकून भी मिला है और जीवन में उम्मीदें भी बढ़ने लगी हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे 12 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद भी कभी एक प्रशासक के रूप में लोगों के बीच नहीं लाते। लोग आज भी उन्हें अपने परिवार का भाई, बेटा, मामा और अपने बीच का ही समझते हैं। इसीलिए समस्या होने पर उनसे गुहार करने में नहीं सकुचाते। श्री चौहान ने महिला, हम्माल, कामकाजी महिला, किसान, मछुआ को अपनेपन का एहसास कराया है। उन्होंने उस मिथक को तोड़ा है जो पहले एक मुख्यमंत्री और आम जनता के बीच हुआ करता था।

मुख्यमंत्री का मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने का सपना एक सार्थक मुकाम तय कर चुका है। इसकी जड़ में है गरीबों का उत्थान, महिलाओं का सशक्तिकरण और कमजोर तबकों का विकास। मुख्यमंत्री अपने लक्ष्य को एक दिन अवश्य हासिल करेंगे क्योंकि उनके ज़हन में हमेशा कमजोर वर्गों की तरक्की और विकास के लिए मंथन चलता रहता है। वे मानते हैं गरीब का उत्थान प्रदेश का उत्थान है और मुख्यमंत्री रहते हुए वे अपने इस सपने को बेहतर ढंग से सच कर
सकते हैं।

 
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