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आलेख

"नमामि देवि नर्मदे"-नर्मदा सेवा यात्रा की उपलब्धियों का वर्ष

भोपाल : शनिवार, दिसम्बर 9, 2017, 17:09 IST
 

विश्व के पर्यावरण प्रयासों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाली 'नमामि देवि नर्मदे''-नर्मदा सेवा यात्रा 11 दिसम्बर, 2016 को अनूपपुर जिले के नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक से शुरू हुई थी। नर्मदा नदी के जल, मृदा संरक्षण, स्वच्छता, प्रदूषण की रोकथाम, जैविक कृषि के प्रोत्साहन और तटीय क्षेत्रों के संरक्षण पर केन्द्रित यात्रा में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने यात्रा आरंभ से लेकर समापन तक स्वयं 49 स्थानों पर भाग लिया।

  • शुभारंभ कार्यक्रम मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री गुजरात श्री विजय रूपानी, स्वामी अवधेशानन्द गिरीजी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री भैय्या जी जोशी, सह सरसंघचालक एवं जलपुरुष श्री राजेंद्र सिंह और भारी जन-समुदाय की उपस्थिति में हुआ।

  • यात्रा में 11 दिसम्बर 2016 से 15 मई 2017 तक कुल 148 दिनों में नर्मदा नदी के दोनों तटों पर कुल 3350 किमी. की दूरी तय की गयी। यात्रा के दौरान कुल 615 ग्राम पंचायतों, 1100 ग्रामों, 51 विकासखण्डों एवं 16 जिलों मे नर्मदा जन-संवाद किया गया।

  • यात्रा के दौरान 25 लाख से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति में 1100 जन-संवाद हुए। आस-पास के गाँव और शहरों से भी लगभग 1900 उप-यात्राएँ मुख्य यात्रा में सम्मिलित हुई। नर्मदा सेवा की वेबसाईट पर लगभग एक लाख नर्मदा सेवकों ने अपना पंजीयन कराया।

  • मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 49 स्थानों क्रमश: रामघाट-अमरकंटक, बोंदर एवं करंजिया, गाडासरई, डिंडौरी, चाबी, रामनगर मण्डला, घंसौर सिवनी, बरगी नगर, हरदुली जबलपुर, ब्रम्हकुण्ड गोटेगांव नरसिंहपुर, सांडिया, सांगाखेड़ाखुर्द, सेठानीघाट होशंगाबाद, हंडिया, करनपुरा हरदा, सिंगाजी, पूरनी/हनुवंतिया, ओंकारेश्वर खण्डवा, नावडाटौडी खरगौन, मोहीपुरा बडवानी, भगोरिया मैदान छकतला अलीराजपुर, कोटेश्वर, बाकानेर धार, महेश्वर खरगौन, नावघाट खेडी खरगौन, नेमावर देवास, तुरनाल सीहोर, छीपानेर, मण्डी, बावरी, आंवलीघाट, होलीपुरा, बुदनीघाट, शाहगंज, सुडानिया, जैतघाट, भारकछ, बगलवाडा, घाट पिपरिया, बौरास, नीमखेड़ा (हीरापुर), भेड़ाघाट जबलपुर, ग्वारीघाट, बरेला, मण्डला, शहपुरा, कनेरी, ग्राम शाहपुर, सिवनी संगम अमरकंटक एवं हेलीपेड क्षेत्र अमरकंटक में पद यात्रा एवं जन-संवाद कार्यक्रमों में भाग लिया।

यात्रा के दौरान सांकेतिक रूप से लगभग 40 हज़ार पौधों का रोपण किया गया। नशामुक्ति एवं नर्मदा सरंक्षण के लिए लगभग 25 लाख लोगों ने संकल्प लिया। संबंधित 16 जिलों की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में 712 नर्मदा सेवा समितियों का गठन किया गया। यात्रा दल के सदस्यों के लिए भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं में लगभग 2100 सामाजिक संस्थाओं ने सहयोग किया। नदी के संरक्षण, वानस्पतिक एवं जल संरक्षण की प्राचीन पारम्परिक पद्धति का संकलन एवं दस्तावेजीकरण का कार्य मध्यप्रदेश कांउसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नॉलाजी के माध्यम से नेशनल इनोवेटिव फाउंडेशन द्वारा दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। यात्रा के 148 दिनों में 16 जिलों, 51 विकासखण्डों, 1100 गाँव में जन-संवाद हुए। जन-संवाद में मुख्यमंत्री श्री चौहान के 49 जन-संवाद, मंत्रीगणों के 102, धर्मगुरूओं के 70, विषय-विशेषज्ञों के 30, कलाकारों के 40, खिलाडि़यों के 51 तथा राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ख्याति-प्राप्त विशेष अतिथियों के 20 जन-संवाद शामिल हैं। इससे ''नमामि देवि नर्मदे''-नर्मदा सेवा यात्रा एक जन-आन्दोलन में परिणित हुई।

नर्मदा सेवा मिशन का गठन

राज्य शासन द्वारा नर्मदा सेवा निरन्तर जारी रखने के लिये 27 मार्च 2017 को नर्मदा सेवा मिशन का गठन किया गया। मिशन में विभिन्न विभागों को जोड़ा गया। इन विभागों द्वारा आगामी 3 वर्षो की कार्य-योजना तैयार कर नर्मदा सवंर्धन एवं संरक्षण के लिए कार्य किये जा रहे हैं।

  • वन विभाग द्वारा 2 जुलाई, 2017 को एक दिन में 3 करोड़ 37 लाख 26 हजार पौधों का रोपण किया गया। 15 जिलों का स्थल चयन कर 495 स्थलों पर तालाब निर्माण के लिए कार्यवाही जारी।

  • किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा 2 जुलाई, 2017 को एक दिन में 56.32 लाख पौधों का रोपण किया गया। जैविक कृषि के प्रमाणीकरण के लिए 347 ग्रामों का चयन किया गया है। 16 जिलों में नाडेप-4640, वर्मी कम्पोस्ट-19400, बायोगैस-1354 में यूनिट स्थापित किये जाकर 28.49 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये गए। इनमें से मेड़-बंधान के 24030 कार्य पूर्ण, 1572 बायोगैस निर्मित, विविध खेती के लिए 5100 किसान को प्रशिक्षण और कृषि वानिकी में 75 लाख 26 हजार पौधों का रोपण हुआ।

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 187.42 लाख पौधों का रोपण किया गया। 16 जिलों के 15,973 ग्रामों में 4,561 शांतिधाम निर्माण का कार्य पूर्ण। 362 ग्राम में से 73 गाँव खुले में शौचमुक्त।

  • उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा करीब 42 लाख पौधों का रोपण किया गया। विभाग ने 26,139 किसानों से फल पौधरोपण के लिए वचन-पत्र भी भरवाये। फल पौधरोपण करने वाले हितग्राही किसानों को 3 सालों तक 20000 रूपये प्रति वर्ष प्रति हैक्टेयर के मान से राशि के भुगतान की कार्यवाही की जा रही है।

  • जन-अभियान परिषद्, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा 21 लाख 40 हजार पौधों का रोपण किया गया। विकेन्द्रीकृत योजना के लिए तकनीकी सहायता समूहों के गठन की कार्यवाही पूरी हो चुकी है। सभी 16 जिलों में 712 नर्मदा सेवा समितियों का गठन किया गया है।

  • मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग द्वारा 563 मछुआरों को प्रशिक्षित किया गया और 2 करोड़ 94 लाख 15 हजार भारतीय मेजरकार्प फिंगरलिंग एवं 34 लाख 24 हजार मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन किया गया।

  • नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2017-18 में 173.632 करोड़ राशि से 26 घाट का निर्माण प्रस्तावित है। पाँच घाटों की निविदा आमंत्रित की जा चुकी है।

  • नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा 51 लाख 81 हजार रुपये की लागत से नगरीय निकायों में 309 कचरा पेटियां स्थापित की गई हैं और मॉनीटरिंग के लिए 54 सूचनापट्ट लगाये गये हैं। प्रत्येक नगरीय निकाय को 2 मोबाईल टायलेट उपलब्ध कराये गये। अमरकंटक में 5 घाटों का निर्माण एवं रामघाट का सौंदर्यीकरण किया गया।

  • पशुपालन विभाग द्वारा 48 ग्राम पंचायतों में गौ-शालाओं का संचालन किया जा रहा है। नर्मदा तटीय 576 ग्राम पंचायतों में पशु-चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर 21 हजार 271 पशुओं का उपचार किया गया।

  • कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा पेड़ों के पत्तों से दोने एवं पत्तले बनाने की 274 इकाईयों एवं मिट्टी से कुल्हड़ एवं प्लेट बनाने की आधुनिक 59 छोटी-छोटी इकाईयॉ की स्थापना के लिए कार्यवाही जारी।

  • राजस्व विभाग द्वारा नर्मदा एवं नर्मदा की अन्य सहायक नदियों की सीमाओं के अन्तर्गत 08 जिलों में 639 सीमांकन तथा 925 स्थानों पर रकबा 276.007 हेक्टेयर का अतिक्रमण मुक्त कराया गया।

  • खनिज साधन विभाग द्वारा रेत के अवैध उत्खनन को रोकने के लिए अप्रैल 2017 से अक्टूबर 2017 तक 2408 प्रकरण दर्ज किये गए और अर्थदण्ड के रूप में 588 लाख रूपये राशि वसूलने के साथ 79 वाहन राजसात किये गए।

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा नदी स्वास्थ्य संकेतक प्रारूप विकसित करने का प्रारंभिक कार्य पूरा कर लिया गया है। बिजली से चलने वाली आधुनिक कचरा निष्पादन वाली मशीनों के लिए सर्वे कर तकनीकी दस्तावेज का संग्रहण किया गया।

  • वाणिज्य उद्योग एवं रोजगार विभाग द्वारा सीवरेज पाईप लाईन बिछाने एवं मुख्य सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से संबंधित सिविल निर्माण का कार्य 20 प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है।

  • ऊर्जा विभाग द्वारा अविद्युतीकृत ग्रामों का विद्युतीकरण एवं जबलपुर जिले के ग्राम झॉसीघाट टोले का कार्य प्रगति पर है।

  • पर्यटन विभाग ने अमरकंटक, हनुवंतिया, सैलानी आयलैंड, महेश्वर में नर्मदा किनारे स्थित पर्यटन विभाग के होटल के कचरे का वैज्ञानिक निष्पादन का कार्य पूरा कर लिया है।

  • पर्यावरण विभाग ने नर्मदा तट किनारे 2.94 टन पॉलिथिन जप्त की। नदी के 31 स्थानों पर जल गुणवत्ता परिणाम मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाईट पर प्रदर्शित किये। प्रमुख 11 उद्योगों के अपशिष्टों की उपचार व्यवस्था की गई।

  • नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विकास विभाग द्वारा नर्मदा नदी के किनारे सिंचाई के लिए 39 सोलर पम्प स्थापित किये गए।

  • संस्कृति विभाग ने नर्मदा महोत्सव, बुधनी महोत्सव, निमाड़ उत्सव आदि सांस्कृतिक गतिविधियों तथा संत और समाज के बीच समन्वय एवं संवाद का आयोजन किया।

  • स्कूल शिक्षा विभाग ने 23 दिसम्बर, 2017 को संकल्प दिवस घोषित कर प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में जल-संरक्षण एवं पर्यटन विषय पर चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया।

  • जनसंपर्क विभाग द्वारा 'नमामि देवि नर्मदे''- सेवा यात्रा के निर्णय के साथ से अब तक संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रचार-प्रसार का कार्य जारी है।

नर्मदा सेवा यात्रा के उद्देश्य

  • नर्मदा नदी के संरक्षण एवं नदी में उपलब्ध संसाधनों एवं समुचित उपयोग के लिए जन-जागरण।

  • नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में वानस्पतिक आच्छादन बढ़ाने एवं मृदा क्षरण को रोकने के लिए पौधरोपण।

  • नदी की पारिस्थितिकी में सुधार हेतु गतिविधियों का चिन्हांकन एवं उनके क्रियान्वयन में स्थानीय जन समुदाय की जिम्मेदारी तय करना।

  • टिकाऊ एवं पर्यावरण हितैषी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए जन-जागरण।

  • नदी में प्रदूषण के विभिन्न कारकों की पहचान एवं उनकी रोकथाम के लिए जन-जागरण।

  • नदी के जलग्रहण क्षेत्र में जल संग्रहण के लिए जन-जागरूकता।


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