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आलेख

विकास के पुरोधा शिवराज यशस्वी बने रहें - रामपाल सिंह

भोपाल : शनिवार, मार्च 3, 2018, 19:59 IST
 

पाँच मार्च की तारीख मध्यप्रदेश के लिए खास महत्व का है क्योंकि यह दिन हमारे अपने शिवराजसिंह चौहान के जन्म-दिन का है। एक ऐसे मुख्यमंत्री का जन्म-दिन है जिसने मध्यप्रदेश की सूरत बदलने में स्वयं को झोंक दिया। एक किसान के बेटे होने का उन्हें गर्व है तो मध्यप्रदेश को उनके मुख्यमंत्री होने पर गर्व है। अपनी स्थापना के बाद मध्यप्रदेश को कई मुख्यमंत्री मिले लेकिन शिवराजसिंह चौहान उनमें से एकदम भिन्न हैं, अलग हैं। वे अलग इसलिए हैं कि वे मध्यप्रदेश का सम्पूर्ण विकास चाहते हैं। वे अलग इसलिए भी हैं कि मध्यप्रदेश को आगे ले जाने के लिए सत्ता को सीढ़ी नहीं बनाते हैं बल्कि खुद सीढ़ी बनकर मध्यप्रदेश को विकसित करते हैं। आज पूरे देश में मध्यप्रदेश की अलग और विशिष्ट पहचान है, तो वह हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के अथक प्रयासों से है। वे हमारे मार्गदर्शक हैं और उनके मार्गदर्शन में हमने अपने विभागों की कार्य-प्रणाली को न केवल सुधारा है बल्कि परिणामोन्मुखी बनाया है। आज इस शुभ अवसर पर उन्हें जन्म-दिन की शुभकामनाएँ देते हुए अपनी जनता के समक्ष उनके प्रयासों की एक मिसाल रखना चाहूंगा कि हमारे मुख्यमंत्री ने बीते सालों में मध्यप्रदेश की सड़कों को सुधारा नहीं बल्कि विकास के चौतरफा रास्ते खोल दिए हैं।

आज के विकसित मध्यप्रदेश की किसी ने कल्पना नहीं की थी। इसके पहले मध्यप्रदेश की पहचान एक बीमारू प्रदेश के रूप में रही है लेकिन इसे विकसित प्रदेश के रूप में स्थापित करने का सम्पूर्ण श्रेय हमारे अपने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को जाता है। पिछले 12 वर्षों में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह ने मध्यप्रदेश की अधोसंरचना को सम्पन्न बनाने और उन्हें विस्तार देने में दिन-रात एक कर दिया था। वे जमीन से जुड़े नेता हैं और उन्हें इस बात का हमेशा ध्यान रहा है कि जब जमीन पक्की होगी तो विकास पक्का होगा और इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पूरे मध्यप्रदेश में सडक़ों का जाल बिछा दिया। जिन रास्तों पर चलने में घंटों लगते थे, आज वही रास्ते मिनटों में मुसाफिर को अपनी मंजिल तक पहुँचा रहे हैं। इस बात को हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान बखूबी जानते हैं कि विकास सडक़ के सहारे आता है। अनेक उद्योगपतियों ने पहले मध्यप्रदेश में आने से इसलिए इंकार किया कि मध्यप्रदेश की सडक़ें बेहद खस्ताहाल हैं लेकिन आज उनकी राय भी बदल गई है। 

कोई 12 वर्ष पहले की बात करें तो मध्यप्रदेश में सडक़ों का मतलब सिर्फ गड्ढे और गड्ढे ही थे लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता बदलाव होने लगा और आज जो बदलाव है, वह सबके सामने है। जो मैं कह रहा हूँ वह तथ्यात्मक और तर्कसंगत है। जब आप पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यों के आँकड़ों से तुलना करते हैं तो स्वयंमेव स्पष्ट हो जाता है। यथा वर्ष 1994-95 से वर्ष 2004-05 तक लोक निर्माण विभाग में योजना मद में सडक़ निर्माण/उन्नयन के लिये रु। 3506।25 करोड़ का व्यय किया गया। इस अवधि में मात्र 11462।00 किलोमीटर सडक़ों के निर्माण/उन्नयन की कार्यवाही की गयी। योजना मद में इसी प्रकार वर्ष 2001-02 से वर्ष 2004-05 तक भवन निर्माण के संबंध में मात्र रु। 160।60 करोड़ का ही व्यय किया जा सका। वर्ष 2001-02 से वर्ष 2004-05 के गैर-योजना मद में मात्र रु। 509।47 करोड़ का व्यय मार्ग निर्माण/उन्नयन में तथा रु। 138।45 करोड़ का व्यय भवन निर्माण में किया जा सका। इसकी तुलना में वर्ष 2005-06 से वर्ष 2015-16 के मध्य योजना मद में सडक़ निर्माण/उन्नयन के लिये लगभग रु। 21412 करोड़ व्यय कर 33781 कि।मी। सडक़ों का निर्माण किया गया।

सडक़ों को दुरूस्त करने की रफ्तार यहीं नहीं रूकी है बीते वित्तीय वर्ष 2016-17 में योजना मद में रु। 5000 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी जिसका उपयोग सीमेंट-कांक्रीट की सडक़ें बनाने में किया गया। निजी पूँजी निवेश के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। विगत वर्षों में वर्ष 2005-06 से वर्ष 2016-17 के मध्य लगभग रु। 14521 करोड़ की राशि से लगभग 6500 कि।मी। उच्च गुणवत्तापूर्ण सडक़ों का निर्माण कार्य किया गया है। मध्यप्रदेश एकमात्र राज्य है, जहाँ बीओटी, बीओटी+एन्युटी तथा ओएमटी तीनों वित्तीय मॉडलों में आवश्यकतानुसार निजी पूँजी निवेश को प्रोत्साहित करते हुए मार्ग निर्माण/संधारण की कार्यवाही की गयी है। इतनी अधिक मात्रा में निजी पूँजी निवेश इस तथ्य का भी द्योतक है कि निवेशकों का विश्वास भी राज्य के प्रति बढ़ा है।

‘जोडऩा-जुडऩा ही विकास है’ बात को चरितार्थ करते हुए भोपाल-इंदौर राजमार्ग ने औद्योगिक शहर इंदौर में उपलब्ध अवसरों को बड़े जन-समूह के लिये खोल दिया है। इन दो शहरों के बीच की दूरी तय करने में पहले जहाँ 5 से 6 घंटे लगते थे, अब यही दूरी 2 से 3 घंटे में पूरी हो जाती है। इसी तरह नागौद-सिंहपुर-कलिंजर मार्ग पर पडऩे वाले कई गाँवों के लिये यह सडक़ बदलाव का संदेश लेकर आयी है। बाढ़ के कारण जो गाँव पहले अलग-थलग पड़ जाते थे, अब वर्षभर एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। बैगा आदिवासियों के लिये शहडोल-सिंहपुर-तुलरा-पडरिया मार्ग ने सरकार की योजनाओं एवं विकास दरवाजे खोल दिए हैं। इस मार्ग के बन जाने से हाट बाजारों की व्यवस्था अब सुगम हो चली है जिससे लोगों को रोजगार सुलभ हो रहा है। रीवा-हनुमना मार्ग बन जाने से किसान अपनी फसल एवं अन्य उत्पादों को कम समय में मण्डी पहुँचा पाते हैं। पहले इसी काम के लिए उन्हें घंटों लगते थे और कई बार फसल समय पर मंडी तक पहुंचा भी नहीं पाते थे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सरकार ने मध्यप्रदेश के नागरिकों के लिए सभी सेक्टरों में बुनियादी सुविधाओं में इतना इजाफा किया है कि सडक़ के साथ अब बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल जैसी जरूरतों के लिए भटकना नहीं पड़ता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान की खास बात यह है कि वे मुख्यमंत्री होते हुए भी आम आदमी सरीखे हैं। कोई भी चाहे, उनसे मिल सकता है। उनसे मिलने के लिए कोई वीआइपी होना जरूरी नहीं है जबकि पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों से मिलना तो दूर उन्हें देखने के लिए जनता जर्नादन तरस जाती थी। पांव-पांव वाले भइया शिवराजसिंह चौहान 12 साल पहले भी जैसे थे, वैसे आज भी हैं। वे संभवत: देश के पहले मुख्यमंत्री होंगे जो आम आदमी को मुख्यमंत्री निवास पर बुलाकर उनकी समस्या सुनते और सुलझाने का प्रयास करते हैं। आम आदमी के साथ बतियाते हैं और भोजन भी करते हैं। ऐसा सरल और मिलनसार मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश को अब तक नहीं मिला है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सादगी से आम आदमी प्रभावित है। पूरे प्रदेश में लोग बार-बार और हर बार शिवराजसिंह चौहान को ही मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। ऐसा जादू, ऐसा अपनापन पाने के लिए स्वयं को खपाना पड़ता है। आम आदमी के बीच स्वयं की विश्वसनीयता स्थापित करना होती है और शिवराजसिंह चौहान ने एक मुख्यमंत्री के रूप में, एक व्यक्ति के रूप में यह छवि स्थापित की है। इसका परिणाम यह हुआ कि वे जब, जहाँ खड़े हो जाएं, लोग उनके साथ हो लेते हैं। किसानों के दर्द को समझने वाले वे ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनके प्रयासों से मध्यप्रदेश को लगातार कृषि कर्मण अवार्ड से नवाजा गया तो उन्होंने मध्यप्रदेश के पर्यटन-स्थलों को इस तरह देश के नक्शे पर स्थापित किया कि हर बार राष्ट्रीय सम्मान मध्यप्रदेश के नाम होता है।

यह मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शिवराजसिंह चौहान की तारीफ करते हैं। उनकी योजनाओं को सराहते हैं और देशव्यापी बनाने का ऐलान करते हैं। शिवराजसिंह चौहान की कई योजनाओं को देश के अनेक राज्यों में लागू किया गया। यह भी शायद उनके कार्यकाल की सफलताओं में गिना जाएगा ऐसे दूरदृष्टि वाले मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अनगिगत वर्षों तक मध्यप्रदेश की सत्ता के सिरमौर बने रहें। मध्यप्रदेश को आगे ले जाने में उनके प्रयासों को सफलता मिले और हम जैसे लोगों को उनका मार्गदर्शन मिलता रहे। उनके यशस्वी, दीर्घजीवी होने की कामना मैं और हमारा पूरा मध्यप्रदेश करता है क्योंकि ऐसे बिरले राजनेता हमें मिले, इसका हमें गौरव है।


लेखक मध्यप्रदेश के लोक निर्माण एवं विधि-विधायी मंत्री है।
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